कोरोना वायरस ने उद्धव ठाकरे के अयोध्या दौरे में पैदा की मुश्किल?

  • नीलेश धोत्रे
  • बीबीसी मराठी संवाददाता, अयोध्या से
उद्धव ठाकरे

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे शनिवार को अयोध्या जा रहे हैं, जहां वो रामजन्मभूमि में रामलला मंदिर के दर्शन करेंगे.

अपनी सरकार के 100 दिन पूरे होने के मौक़े पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सपरिवार अयोध्या पहुंच रहे हैं. अयोध्या में वो रामलला के साथ ही हनुमानगढ़ी के दर्शन भी करने वाले हैं.

उद्धव ठाकरे ने पिछले साल 28 नवंबर को काफी उठापटक के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. उन्होंने कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से महाराष्ट्र में सरकार बनाई.

उद्धव ठाकरे के अयोध्या जाने को लेकर शिवसेना सांसद संजय राउत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात भी की. उन्होंने ट्वीट कर इसकी जानकारी भी दी थी.

उद्धव का तीसरा अयोध्या दौरा

उद्धव ठाकरे तीसरी बार अयोध्या जाने वाले हैं. इससे पहले वो साल 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले अयोध्या आए थे और फिर दूसरी बार महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव होने से ठीक पहले उन्होंने रामलला के दर्शन किए थे.

इससे पहले दोनों दौरों के वक़्त तक अयोध्या की विवादित भूमि पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला नहीं आया था, लेकिन अब जब उद्धव अयोध्या पहुंच रहे हैं तो इस विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आ चुका है.

महाराष्ट्र विधानसभा के नतीजे आने के बाद ही उद्धव ने कह दिया था कि वो रामलला के दर्शन करने के लिए अयोध्या जाएंगे.

अब क्योंकि उनकी सरकार के 100 दिन पूरे हो गए हैं साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या की विवादित भूमि पर राम मंदिर निर्माण के पक्ष में फ़ैसला सुनाया है तो उन्होंने इसी मौक़े को अपने अयोध्या दौरे के लिए मुफीद समझा है.

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क्या कोरोना डालेगा कार्यक्रम पर असर?

अयोध्या में उद्धव ठाकरे ने पहले से तय कार्यक्रम में सरयू नदी की आरती करना, संत-महात्माओं से मुलाक़ात करना जैसी बातें शामिल थीं. यह एक लंबा-चौड़ा कार्यक्रम था.

अब इस कार्यक्रम में बदलाव किया गया और इसे छोटा कर दिया गया है. पहले से तय कार्यक्रम में से सरयू तट पर आरती को हटा दिया गया है.

कार्यक्रम में हुए इस बदलाव के पीछे कोरोना वायरस को वजह बताया जा रहा है. राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कोरोना वायरस के संबंध में कुछ दिशानिर्देश जारी किए हैं जिनका पालन करने के कारण उद्धव ठाकरे को अपना कार्यक्रम छोटा करना पड़ा है.

इस बात की पुष्टि शिवसेना सांसद संजय राउत ने बीबीसी से की और कहा, "राज्य सरकार ने हमसे गुज़ारिश की है कि हम अपने कार्यक्रम को छोटा कर दें क्योंकि जिस तरह की स्थिति कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में बनी हुई है वैसे में कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं किया जा सकता."

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इसके साथ ही उद्धव ठाकरे अयोध्या में किसी तरह की जनसभा को भी संबोधित नहीं करेंगे.

संजय राउत के अनुसार अब उद्धव ठाकरे के अयोध्या दौरे की शुरुआत एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस से होगी, उसके बाद वो रामलला के दर्शन के लिए जाएंगे और फिर वो शहर में कुछ अन्य जगहों का दौरा करेंगे.

इस नए कार्यक्रम में यह बात भी नहीं बताई गई है कि उद्धव संतों से मुलाक़ात करेंगे या नहीं.

माना जा रहा है शनिवार शाम को ही उद्धव वापस महाराष्ट्र चले जाएंगे. इस समय महाराष्ट्र में विधानसभा सत्र भी चल रहा है.

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हज़ारों शिवसैनिक अयोध्या पहुंचे

उद्धव ठाकरे अयोध्या आगमन से पहले ही हज़ारों शिवसैनिक अयोध्या पहुंच चुके हैं.

महाराष्ट्र के ठाणे और मुंबई से दो ट्रेन भरकर शिवसैनिक अयोध्या पहुंचे हैं. इसके अलावा कई कार्यकर्ता बसों के ज़रिए भी अयोध्या पहुंच चुके हैं.

अनुमान के मुताबिक़ करीब पांच हज़ार शिवसेना कार्यकर्ता अयोध्या पहुंच चुके हैं.

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संतों का विरोध

अयोध्या में कुछ संत उद्धव ठाकरे के दौरे का विरोध भी कर रहे हैं. इनमें सबसे मुखर हैं, महंत परमहंस दास.

उन्होंने उद्धव ठाकरे के दौरे से पहले कहा कि उद्धव ठाकरे को अयोध्या की बजाय मक्का जाना चाहिए.

बीबीसी के साथ हुई बातचीत में महंत परमहंस दास ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे ने हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए शिवसेना का गठन किया था, लेकिन उद्धव ठाकरे उनके सिद्धांतों पर नहीं चल रहे हैं.

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महंत परमहंस दास

हालांकि शिवसेना उनके इस बयान पर टिप्पणी करने से बच रही है. संजय राउत ने महंत परमहंस से जुड़े सवाल पर उन्हें पहचानने से ही इनकार कर दिया.

इसके अलावा हनुमानगढ़ी के पुजारी महंत राजू दास ने भी उद्धव ठाकरे की यात्रा का विरोध किया है.

उन्होंने ट्वीट किया, "शिवसेना, जो मुसलमानों को 5 प्रतिशत आरक्षण देती है, हिंदुत्व के रास्ते से भटक गई है. इसलिए उद्धव ठाकरे को अयोध्या नहीं आने देंगे."

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महंत राजू दास का ट्वीट

इतना ही नहीं अयोध्या के आम लोग भी उद्धव ठाकरे के इस अयोध्या दौरे पर दो-राय रखते हुए दिखे हैं. कुछ लोगों को उनके इस दौरे से कोई नाराज़गी नहीं है.

वहीं कुछ लोगों का मानना है कि शिवसेना अब पहले जैसी हिंदुत्व वाली पार्टी नहीं रही है और वह राजनीति में लाभ प्राप्त करने के लिए अपने एजेंडे से हटने लगी है.

इससे पहले जब दो बार उद्धव ठाकरे अयोध्या आए थे तो आम लोग ख़ासे उत्साहित दिखे थे लेकिन उनके अब सरकार बनाने के बाद के दौरे पर लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आ रही है.

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