मध्य प्रदेशः कमलनाथ सरकार पर संकट के नए बादल

  • शुरैह नियाज़ी
  • भोपाल से बीबीसी हिन्दी के लिए
कमलनाथ

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मध्यप्रदेश में होली से एक दिन पहले प्रदेश में सियासी हलचल तेज़ हो गई है.

संकट की आशंका के बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सभी मंत्रियों को अपने निवास पर बुला लिया है. बताया जा रहा है कि कांग्रेस के कई विधायक बेंगलुरु चले गए हैं.

ये विधायक ज्योतिरादित्य सिंधिया के ख़ेमे के बताये जा रहे है. इनकी संख्या 17 बताई जा रही है और इन सभी के मोबाइल बंद आ रहे हैं.

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोनिया गांधी से दिल्ली में मुलाक़ात की और उसके बाद फौरन वो भोपाल वापस हो गए.

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ये दावा ज़रूर किया कि पार्टी के अंदर विवाद की कोई स्थिति नहीं है.

लेकिन कमलनाथ के भोपाल पहुंचते ही मुख्यमंत्री निवास पर एक अहम बैठक आयोजित की गई.

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विवाद से इनकार

ऐसी अटकलें हैं कि मामले को सुलझाने के लिये ज्योतिरादित्य सिंधिया को मध्य प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जा सकता है.

भोपाल में इसी सब के बीच ये भी ख़बर उड़ी है कि सिंधिया की मुलाक़ात प्रधानमंत्री से होने जा रही है.

हालांकि कांग्रेस के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने पार्टी के अंदर किसी भी किस्म के विवाद से इनकार किया है.

उन्होंने कहा, "सब मीडिया के कयास है. यह सब सोशल मीडिया की ख़बर है. होली की वजह से सब छुट्टी मना रहे हैं."

मुख्यमंत्री निवास पर चल रही बैठक को लेकर उन्होंने कहा, "बजट सत्र और राज्यसभा के चुनाव है इसलिये इन सब चीज़ों पर चर्चा की जानी है."

वहीं, उन्होंने ये भी कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया अस्वस्थता की वजह से नहीं आ पाए हैं लेकिन जब उनकी ज़रूरत होगी तो वो उपलब्ध होंगे.

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ज्योतिरादित्य सिंधिया

पहले भी विधायक गुड़गाँव चले गए थे

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मध्य प्रदेश में राजनीतिक संकट पिछले एक हफ्ते से भी ज्यादा से चल रहा है. पहले कुछ विधायक गुड़गांव चले गए थे जिन्हें वापस भोपाल लाया गया था लेकिन उसके बाद कांग्रेस के चार विधायक बेंगलुरु चले गए थे. उनमें से दो विधायक वापस लौट आए हैं लेकिन दो का अभी तक पता नही है. सभी की मांग मंत्री बनने की है.

इन विधायकों के गुड़गाँव आने पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया था कि बीजेपी उनके विधायकों को रिश्वत के ज़रिए ख़रीदने की कोशिश कर रही है.

दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा था कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और बीजेपी नेता नरोत्तम मिश्रा ने उनके विधायकों को 25 से 35 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव रखा है.

पिछले साल मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी नेता गोपाल भार्गव ने कमलनाथ सरकार पर विधानसभा में हमला बोलते हुए कहा था कि अगर उनकी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से एक इशारा किया गया तो यहां कांग्रेस की सरकार 24 घंटे नहीं टिक सकती है.

पिछले साल 24 जुलाई को गोपाल भार्गव ने विधानसभा में कहा था, "हमारे ऊपर वाले नंबर एक या दो का आदेश हुआ तो 24 घंटे भी आपकी सरकार नहीं चलेगी."

गोपाल भार्गव के इस दावे के बाद विधानसभा में क्रिमिनल लॉ पर मतदान हुआ था और इसमें कमलनाथ सरकार के पक्ष में 122 विधायकों ने वोट किया था.

ये 231 विधायकों वाली विधानसभा में साधारण बहुमत से सात ज़्यादा विधायकों का समर्थन था. यहां तक कि दो बीजेपी विधायकों ने भी सरकार का समर्थन किया था. अभी राज्य विधानसभा में कुल 228 विधायक हैं. दो सीट विधायकों के निधन से ख़ाली हैं.

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सियासी समीकरण और राज्यसभा के चुनाव

2018 में प्रदेश में 15 साल बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस के 114 विधायक हैं. 230 सदस्यीय विधान सभा में भाजपा के 107 विधायक हैं. बसपा के 2, सपा के एक और निर्दलीय 4 विधायक हैं जिनका समर्थन कांग्रेस को मिलता रहा है. प्रदेश में संख्या के हिसाब से 34 मंत्री बनाए जा सकते है. अभी 29 मंत्री हैं.

असंतुष्टों को मनाने के लिये कुछ मौजूदा मंत्रियों से इस्तीफे लेने की भी बात की जा रही है. वहीं, इस रस्साकशी को राज्यसभा सीटों के लिये होने वाले चुनाव से भी जोड़ कर देखा जा रहा है. राज्य में तीन सीटों के लिये चुनाव 26 मार्च को होना है. 13 मार्च तक नामांकन किया जाना है.

संख्याबल के हिसाब से कांग्रेस और भाजपा को एक-एक सीट आसानी से मिल जाएगी लेकिन एक सीट के लिये भाजपा ने अपना उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है जिसकी वजह से मुक़ाबला बहुत रोचक हो गया है. दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों ही राज्य सभा की दावेदारी कर रहे हैं.

लेकिन बन रहे समीकरणों में ये देखना होगा कि सिंधिया किस तरह की मांग करते हैं. लोकसभा चुनाव में हार के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रदेश में एक तरह से हाशिये पर चले गए थे. उनके समर्थक मंत्री लगातार उनके लिये प्रदेश अध्यक्ष की मांग कर रहे थे. वहीं, मुख्यमंत्री कमलनाथ लगातार उन्हें नज़रअंदाज़ कर रहे थे.

लेकिन अब बनी स्थिति में कमलनाथ के लिये बड़ी चुनौती पैदा हो गई है. अब न सिर्फ उन्हें अपनी सरकार को बचाना होगा बल्कि राज्य सभा के लिए होने वाले चुनाव में भी दो सीटों पर पार्टी को जिताना होगा.

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