ज्योतिरादित्य सिंधिया क्या बड़ा ऐलान कर सकते हैं?

  • शुरैह नियाज़ी
  • भोपाल से, बीबीसी हिंदी के लिए
ज्योतिरादित्या सिंधिया

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मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार के लिये मंगलवार का दिन काफ़ी महत्वूपर्ण होगा. सोमवार की शाम तक राजधानी भोपाल में राजनीतिक सरगर्मिया तेज़ हो गईं और यह बात साफ़ हो गई कि ज्योतिरादित्य सिंधिया सरकार से नाराज़ हैं और अगला क़दम लेने से पहले किसी भी तरह की बात करने से बच रहे हैं.

देर रात कमलनाथ द्वारा बुलाई गई केबिनेट बैठक में 20 मंत्रियों ने अपने इस्तीफ़े सौंप दिये. यह बैठक सरकार पर आए संकट को लेकर बुलाई गई थी. इस्तीफ़े सौंपने वाले सभी मंत्री कमलनाथ के क़रीबी हैं.

वहीं सोमवार को दिन में ख़बर फैली कि सिंधिया गुट के 17 विधायक जिनमें छह मंत्री भी शामिल हैं उन्होंने बेंगलुरु का रुख़ कर लिया. इसके बाद इन सभी के फ़ोन बंद रहे और इनसे संपर्क दिनभर नहीं हो पाया.

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इस्तीफ़ा देने वाले मंत्रियों ने मुख्यमंत्री पर अपनी आस्था व्यक्त की और कहा कि वो अपने विवेक से कैबिनेट का विस्तार कर सकते हैं.

कमलनाथ ने बैठक के बाद कहा, "मेरे लिए सरकार होने का अर्थ सत्ता की भूख नहीं, जन सेवा का पवित्र उद्देश्य है. पंद्रह वर्षों तक भाजपा ने सत्ता को सेवा का नहीं भोग का साधन बनाए रखा था वो आज भी अनैतिक तरीक़े से मध्यप्रदेश की सरकार को अस्थिर करना चाहती है."

उन्होंने कहा, "15 साल में भाजपा के राज में हर क्षेत्र में माफ़िया समानांतर सरकार बन गया था. प्रदेश की जनता त्रस्त थी और उसने माफ़िया रूप से छुटकारा पाने के लिए कांग्रेस को सत्ता सौंपी. मैंने जनता की अपेक्षा पर माफ़िया के ख़िलाफ़ अभियान चलाया. माफ़िया के सहयोग से भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस की सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रही है."

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क्या करेंगे ज्योतिरादित्य सिंधिया?

बैठक से बाहर निकल कर मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने पत्रकारों से कहा, "लगभग 20 मंत्रियों ने अपने इस्तीफ़े मुख्यमंत्री को दे दिये हैं. जिस तरह का वातावरण भारतीय जनता पार्टी बना रही है. हमने इस्तीफ़े देकर यह बात उनके विवेक पर छोड़ी है कि मुख्यमंत्री जी अपने मंत्रिमंडल का गठन स्वतंत्रता पूर्वक कर सकते हैं. हमें कांग्रेस की सरकार चलानी है, जनता ने हमें पाँच साल के लिए चुना है. भाजपा अपनी चाल में कामयाब न हो इसलिए हमने अपने इस्तीफ़े दिए हैं."

मंगलवार की शाम को कांग्रेस ने विधायक दल की बैठक बुलाई है. वहीं ख़बर यह भी आ रही है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया दिल्ली से मंगलवार को ग्वालियर जाकर माधवराव सिंधिया की 75वीं जयंती के कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं और कोई बड़ी घोषणा कर सकते हैं.

इसके साथ ही ख़बरें यह भी चल रही हैं कि वह किसी नई पार्टी की घोषणा कर सकते हैं और भाजपा के साथ गठबंधन कर सकते हैं.

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वहीं दिल्ली में सिंधिया की मुलाक़ात सचिन पायलट से होने की बात भी कही जा रही है. सिंधिया को मनाने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद दिया जा सकता है. इसके साथ ही उन्हें राज्यसभा में भी भेजने की बात की जा रही है.

कमलनाथ के क़रीबी मंत्रियों ने इस्तीफ़ा सौंप कर मुख्यमंत्री को असंतुष्टों को मनाने के लिये छूट दे दी है ताकि नाराज़ विधायकों को कैबिनेट में जगह दी जा सके.

सिंधिया गुट के विधायकों के साथ ही सपा, बसपा और निर्दलीय विधायक भी मंत्री पद चाहते हैं.

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विधायक दल की बैठक की तस्वीर

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वहीं भाजपा के अंदर भी सरकार को लेकर बैठकों का दौर चल पड़ा है. गृह मंत्री अमित शाह के साथ दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और नरेंद्र सिंह तोमर की बैठक हुई.

भाजपा ने भी मंगलवार शाम को विधायक दल की बैठक बुलाई है. माना जा रहा है कि शिवराज सिंह चौहान को विधायक दल का नेता चुना जा सकता है. भाजपा राज्य सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव भी लाने जा रही है. प्रदेश में विधानसभा सत्र 16 मार्च से शुरू होने वाला है.

सोमवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोनिया गांधी से दिल्ली में मुलाक़त की और उसके बाद फ़ौरन वो भोपाल वापस चले गए. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ज़रूर यह दावा किया कि पार्टी के अंदर विवाद की कोई स्थिती नहीं है. लेकिन उनके भोपाल पहुंचते ही मुख्यमंत्री निवास पर एक अहम बैठक आयोजित की गई.

मध्यप्रदेश में राजनीतिक संकट पिछले एक हफ्ते से भी ज़्यादा वक़्त से चल रहा है. पहले कुछ विधायक गुड़गांव चले गये थे जिन्हें वापस भोपाल लाया गया था लेकिन उसके बाद कांग्रेस के चाक विधायक बेंगलुरु चले गए थे. उनमें से दो विधायक वापस लौट आये हैं लेकिन दो का अभी तक पता नहीं है. सभी की मांग मंत्री बनने की है.

इन विधायकों के गुड़गाँव आने पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया था कि बीजेपी उनके विधायकों को रिश्वत के ज़रिए ख़रीदने की कोशिश कर रही है.

दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा था कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और बीजेपी नेता नरोत्तम मिश्रा ने उनके विधायकों को 25 से 35 करोड़ रुपए देने का प्रस्ताव रखा है.

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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

प्रदेश में 15 साल बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस के 114 विधायक हैं. 230 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 107 विधायक हैं. बसपा के 2, सपा के एक और निर्दलीय 4 विधायक हैं जिनका समर्थन कांग्रेस को मिलता रहा है. प्रदेश में कुल 34 मंत्री बनाये जा सकते हैं और अभी 29 मंत्री हैं.

वहीं इस रस्साकशी को राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव से भी जोड़ कर देखा जा रहा है. राज्य में तीन राज्यसभा सीटों के लिये चुनाव 26 मार्च को होना है. 13 मार्च तक नामांकन किया जाना है.

संख्याबल के हिसाब से कांग्रेस और भाजपा को एक-एक सीट आसानी से मिल जायेंगी लेकिन एक सीट के लिए भाजपा ने अपना उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है. जिसकी वजह से मुक़ाबला बहुत रोचक हो गया है. दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों ही राज्यसभा की दावेदारी करते रहे हैं.

लेकिन होली के दिन दोनों ही पार्टियों द्वारा विधायक दल की बैठक बुलाना बताता है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ किस तरह की चुनौती का सामना कर रहे हैं.

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