कोरोना वायरस क्या हवा से भी फैल सकता है?- फ़ैक्ट चेक

  • 24 मार्च 2020
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कोरोना वायरस से निपटना दुनियाभर के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है. सबसे अहम बात ये है कि ये वायरस कैसे पनपा और इसका इलाज क्या हो?

इसका अब तक कोई पता नहीं है. कई शोध और अध्ययन इस वायरस से जुड़ी अधिक से अधिक जानकारी जुटाने के लिए किए जा रहे हैं.

कोरोना वायरस को लेकर लोगों के बीच कई सूचनाएं फैलाई जा रही हैं. इनमें से कुछ फ़ेक या अप्रमाणित भी हैं.

लोग इन सूचनाओं को सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप पर तेज़ी से फॉर्वर्ड कर रहे हैं. इस बीच एक मैसेज खूब शेयर किया जा रहा है.

मैसेज में दावा है कि "कोरोना वायरस एयरबॉर्न यानी हवा से फैलने वाला वायरस है, जो हवा में आठ घंटे तक रह सकता है. सभी को हर जगह मास्क पहनना अनिवार्य है. ये स्टील पर 2 घंटे और पेपर, प्लास्टिक पर 3-4 घंटे और हवा में 8 घंटे तक रह सकता है."

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'एयरबॉर्न प्रिकॉशन'

ये मैसेज व्हाट्सएप के ज़रिए बीबीसी तक पहुंचा जिसे कई ग्रुप में शेयर किया गया है. इस मैसेज के साथ सीएनबीसी न्यूज़ का एक लिंक भी शेयर किया गया है.

हमने ये पता लगाने की कोशिश की कि क्या कोरोना को हवा से फ़ैलने वाला वायरस घोषित कर दिया गया है.

सबसे पहले हमने सीएनबीसी के उस आर्टिकल को पढ़ा जिसका हवाला देते हुए ये दावा किया जा रहा है कि कोविड-19 हवा से फैलने वाली महामारी घोषित हो चुका है.

16 मार्च को छपे इस आर्टिकल में कहा गया है, "विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) मेडिकल स्टाफ़ के लिए 'एयरबॉर्न प्रिकॉशन' पर विचार कर रहा है. ऐसा एक अध्ययन के सामने आने के बाद किया जा रहा है जिसमें दावा किया गया है कि कोरोना वायरस एक ख़ास सेटअप में हवा में टिक सकता है."

इसके बाद 17 मार्च को अमरीका के नेशनल इंस्ट्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ (एनआईएच) की एक रिपोर्ट सामने आई जिसमें दावा किया गया है कि कोरोना वायरस हवा में तीन से चार घंटे रह सकता है.

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हेल्थ केयर फैसिलिटी

इस दावे को जब हमने और खंगाला तो हमें WHO की 11 फ़रवरी को की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस मिली.

जिसमें WHO के डायरेक्टर जनरल टेड्रो एडेनॉम गैब्रिएसस ने कहा था, "ज़ाहिर तौर पर कोरोना और इबोला एक जैसे नहीं है. कोरोना एयरबॉर्न यानी हवा से भी फैलने वाला वायरस है. इसलिए ये और भी ख़तरनाक है, आप सबने देखा है कैसे ये देखते ही देखते 24 देशों में फैल चुका है."

इसके अलावा 16 मार्च को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में WHO में एमरजिंग डिज़िज़ की हेड डॉक्टर मारिया केराकोव ने कहा, "एक हालिया स्टडी में सामने आया है कि कोरोना वायरस हवा में भी कुछ देर तक रह सकता है. इस रिपोर्ट में 'एरोलाइज़' की बात कही गई है जिसका मतलब ये वायरस का हवा में सामान्य से ज़्यादा देर तक रह सकते हैं."

"हेल्थ केयर फैसिलिटी यानी अस्पतालों में काम करने वाले कर्मचारियों को इसका ज़्यादा ख़तरा है. इसलिए, कर्मचारियों को ज़्यादा सावधान रहने और एयरबॉर्न प्रिकॉशन लेने की ज़रूरत है. लेकिन आम लोगों को हर वक़्त मेडिकल मास्क पहनने की ज़रूरत नहीं हैं जब तक आपको ख़ुद संक्रमण ना हो या आप किसी संक्रमित शख़्स के साथ रह रहे हो."

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अस्पतालों के आईसीयू

हालांकि 23 मार्च को WHO दक्षिण-पूर्वी एशिया की रिजनल डायरेक्टर पूनम खेत्रापाल सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, "अब तक कोरोना को ऐसा कोई केस केस सामने नहीं आया है जिसकी वजह एयरबॉर्न हो. चीन की अथॉरिटीज़ की तरफ़ से कोविड-19 के हवा से फैलने की संभावना सामने आ रही है, ख़ास कर अस्पतालों के आईसीयू और सीसीयू में ये ख़तरा बताया जा रहा है. लेकिन इसे समझने के लिए और डेटा की आवश्यकता है."

"अब तक जो केस सामने आए हैं उनमें संक्रमित इंसान के खांसी, छींक के दौरान निकने ड्रॉपलेट और उसके संपर्क में आना ही वजह रही है. इसलिए दूरी बनाए रखें और हाथों को बार-बार साफ़ करें."

दरअसल, अस्पताल के कर्मचारी जो ऐसा इलाज कर रहे हैं जिसमें एरोज़ल उत्पन्न होने की संभावना है उन्हें सावधानी बतरनी होगी.

एरोज़ल को ऐसे समझिए- मान लीजिए किसी कोरोना संक्रमित इंसान को नेब्युलाइज़र दिया गया तो इस प्रक्रिया में एक फ़्यूम बनता है क्योंकि मरीज़ सांस लेता और छोड़ता रहता है.

एरोज़ल, ड्रॉपलेट की तुलना में ज़्यादा हल्का होता है और हवा में ज्यादा देर तक टिक सकता है.

ऐसे में कोरोना के एयरबॉर्न संक्रमण का ख़तरा उन्हीं अस्पताल के कर्माचारियों को होगा जो इलाज में ऐसे प्रक्रिया का इस्तेमाल करें जो एरोज़ल पैदा करती हो.

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कोरोना वायरस

बीबीसी ने अपनी पड़ताल में पाया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस के हवा से भी फ़ैलने यानी एयरबॉर्न होने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया है.

लेकिन ये ख़तरा सिर्फ़ अस्पताल के कर्मचारियों के लिए माना जा रहा है जो संक्रमित मरीज़ों का इलाज कर रहे हैं.

ये वायरस हवा में कितनी देर रह सकता है इसे लेकर WHO ने कोई आंकड़ा नहीं दिया है. ऐसे में इसके आठ घंटे तक टिके रहने का दावा ग़लत है.

हालांकि अब तक कोरोना वायरस का ऐसा एक भी मामला सामने नहीं आया है जिसकी वजह एयरब़ॉर्न (हवा से वायरस का फ़ैलना) संक्रमण हो.

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