कोरोना वायरस: लॉकडाउन में ज़रूरी सामान कैसे ले पाएंगे आप?

  • 25 मार्च 2020
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Image caption प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कोरोना वायरस पर जनता को संबोधित किया तो बहुत कम लोग थे जिन्होंने उनका पूरा भाषण सुना.

भाषण के सातवें मिनट में ही पीएम ने एलान कर दिया था कि भारत में अगले 21 दिन पूरी तरह से लॉकडाउन लागू रहेगा.

बस फिर क्या था, इतना सुनते ही बाज़ारों में ज़रूरी सामान ख़रीदने वालों की कतारें लग गईं.

लोग सोशल डिस्टैंसिंग को भूलकर दुकानों में ज़रूरी सामान, राशन दवाइयां, सब्ज़ी, फल इकट्ठा करने में जुट गए.

यही हाल जनता कर्फ़्यू से एक दिन पहले देखने को मिला था.

नतीजा ये रहा कि किराना दुकानों में भी ज़रूरी सामान की सप्लाई कम हो गई है. दुकानदारों का कहना है कि माल पीछे से ही नहीं आ रहा है.

तो क्या देश में ज़रूरी सामानों की क़िल्लत है या फिर उस सामान के रिटेल स्टोर तक पहुंचने में परेशानी हो रही है?

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ज़रूरी सामान का स्टॉक

आँकड़ों की बात करें तो फ़ूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के मुताबिक़ मार्च तक गेंहू और चावल का स्टॉक काफ़ी है. चावल का स्टॉक 309.76 लाख मिट्रिक टन है वहीं गेंहू का 275 लाख मिट्रिक टन है.

FCI के मुताबिक़ हर साल इस महीने में स्टॉक तकरीबन इतना ही रहता है. इस साल दोनों की पैदावार भी अच्छी हुई है, जो अभी मंडी तक नहीं पहुंचा है.

इसके आलावा ज़रूरी सामानों की लिस्ट में दाल, सब्ज़िया, फल, दूध और दवाइयां भी आती हैं.

इसकी ज़िम्मेदारी NAFED की होती है यानी नेशनल एग्रीकल्चर कॉपरेटिव मार्केटिंग फ़ेडरेशन ऑफ इंडिया की. बीबीसी से बातचीत में नेफ़ेड के चेयरमैन ने बताया कि उनके पास दाल और ऑयल सीड (यानी मूंगफली, सोया) इसकी कोई कमी नहीं है.

उनके पास स्टॉक इतना है कि दो साल तक पूरे देश की मांग को पूरा कर सकें. उन्होंने सभी राज्य सरकारों को इस बारे में चिट्ठी भी लिखी है कि राज्य सरकारों के पास किसी तरह की कोई परेशानी है तो वो उनसे संपर्क कर सकते हैं. पांच से सात दिन के भीतर उन तक सामान पहुंच जाएगा.

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सप्लाई में नहीं सप्लाई चेन में है दिक्क़त

इससे साफ़ ज़ाहिर है कि परेशानी ज़रूरी सामानों की सप्लाई में नहीं बल्कि उसकी सप्लाई चेन में है.

चाहे ऑनलाइन सामानों की ख़रीद की ई-डिलिवरी की बात हो या फिर सामानों के रिटेल की दुकानों पर पहुंचने की बात हो परेशानी वहीं आ रही है.

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर लिखा है कि बॉर्डर पर ज़रूरी सामान लाने ले जाने वाले ट्रक रुके हैं. ड्राइवरों के पास खाना पानी का पैसा नहीं है. उन्होंने सरकार से मदद की गुहार लगाई है.

बीबीसी ने एसोसिएशन के सचिव नवीन गुप्ता से बात की. उनके मुताबिक़ सरकार को थोड़ा समय देना चाहिए था. हमें तैयारी करने का बिलकुल समय नहीं मिला.

उन्होंने बताया कि रविवार को जनता कर्फ़्यू था और सोमवार से ही कई राज्यों ने लॉकडाउन कर दिया था. दिक्कतें वहीं से शुरू हो गई. सबसे ज़्यादा परेशानी उन ट्रकों को आ रही है जो ट्रांजिट में हैं, यानी अभी एक जगह से दूसरे जगह जा आ रही हैं. कुछ के पास ज़रूरी सामान है और कुछ के ग़ैरज़रूरी सामान हैं. लेकिन जाने-आने का पास किसी के पास नहीं है.

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ट्रांसपोर्टर की समस्या

नवीन गुप्ता अपनी बात को बेहतर तरीक़े से समझाने के लिए उदाहरण देते हैं. मान लीजिए एक ट्रक ज़रूरी सामान लेकर गुजरात से दिल्ली के लिए चला. रास्ते में कई दिन लगेंगे. उसके पास भी नहीं है. एक बार के लिए मान लीजिए की वो सामान की चेकिंग कराने के बाद दिल्ली पहुंच गए. सामान अनलोड भी कर दिया. लेकिन फिर ख़ाली ट्रक दोबारा कैसे जाएगा. इसके लिए सरकार को इंतजाम करना चाहिए.

उन्होंने इस बारे में सरकार को चिट्ठी भी लिखी है. ट्रांसपोर्टर की समस्या यहीं ख़त्म नहीं होती. ड्राइवरों को रास्ते में खाना पानी की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है. हाई-वे के आस-पास खाने पीने की सभी चीज़े बंद हैं. ऐसे में ड्राइवर लंबी दूरी के सामान ले जाने से मना कर रहे हैं.

नवीन गुप्ता कहते हैं, ''शुरुआत के कुछ दिनों में असर कम दिखेगा. लेकिन समय रहते क़दम न उठाए गए तो 21 दिनों में हाल बुरा होने वाला है.''

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Image caption पैनिक बाइंग ने बढ़ाई समस्या

ऑन-लाइन सेवा प्रभावित

कुछ ऐसा ही हाल ऑन-लाइन सामान बेचने वाली कंपनियों के सामने भी आ रहा है. Flipkart, bigbasket, hellomilkbasket, netmed, जैसी तमाम कंपनियां जो घर तक दूध, सब्ज़ी राशन का दूसरा सामान पहुंचाने का काम करती हैं, उन्होंने फ़िलहाल देश के अलग-अलग हिस्सों में अपनी सेवाएं रोक दी हैं.

इनमें से कुछ डिलिवरी बॉय न होने को कारण बता रहे हैं तो कुछ का कहना है कि स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों और पुलिस तक ज़रूरी सेवाओं की लिस्ट ठीक से नहीं पहुंची है.

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राज्य सरकारों की पहल

लोग जहां भी हों अपनी समस्याओं से मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों को ट्विटर पर अवगत करा रहे हैं.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉंफ्रेंस करके इस समस्या का हल भी सुझाया है. दिल्ली सरकार बुधवार शाम तक एक हेल्पलाइन नंबर जारी करने जा रही है.

इस हेल्पलाइन नंबर पर फ़ोन करके जो ज़रूरी सामान को लाने ले जाने से जुड़े लोग हैं, वो ई-पास बनवा सकते हैं. सरकार बुधवार से इस ई-पास जारी करने का काम शुरू कर रही है.

ठीक इसी तरह से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी क़दम उठाए हैं. प्रधानमंत्री के भाषण के बाद उन्होंने तुंरत वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा, "10,000 गाड़ियों से घर-घर ज़रूरी सामान की डिलिवरी कराएगी राज्य सरकार. इसमें से 4500 पुलिस के वाहन होंगे, 4200 के तकरीबन 108 और 102 नंबर वाले एंबुलेंस होंगे, कुछ खाद्य विभाग की गाड़ियां होंगी. इसलिए जनता पैनिक में आकर दुकानों में भीड़ ना जुटाएं.''

Image caption लॉकडाउन के दौरान हिमाचल के एक क़स्बे में बंद दुकानें

केन्द्र सरकार क्या कर रही है.

केन्द्र सरकार ने भी आज कैबिनेट की बैठक में इस विषय पर चर्चा की. बैठक के बाद केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने पत्रकारों को बताया कि केन्द्र सरकार ने हर राज्य को लोगों की दिक्कतों का हल करने के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी करने को कहा है.

गृह मंत्रालय भी ऐसा ही नंबर जारी करने जा रहा है. जिनको भी जरूरी सामान ना मिलने संबंधी जो भी दिक्कत आ रही हो, हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर शिकायत कर सकते हैं. उस पर तुंरत सुनावाई होगी, इसका भी उन्होंने आश्वासन दिया.

इमेज कॉपीरइट Jaypalsinh Rathod (SP, Bhavnagar)
Image caption लोग भीड़ न लगाएं, इसके लिए गुजरात के भावनगर में किराना शॉप के बाहर किया गया विशेष इंतज़ाम

उनके मुताबिक लॉकडाउन की घोषणा हुए 24 घंटे का वक़्त भी नहीं गुजरा है. लोगों को थोड़ा धैर्य से काम लेना होगा. अफ़वाहों पर ध्यान न देते हुए सरकार पर जनता भरोसा रखें. किसी भी जरूरी सामान की कमी जनता को सरकार नहीं होने देगी.

जावडेकर ने कहा कि केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और ज़िला प्रशासन सब मिल जुल कर इस दिशा में काम कर रहें हैं.

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