कोरोना वायरस: चीन से भारत कैसे सीख सकता है सबक

  • 26 मार्च 2020
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कोरोना वायरस के विश्व व्यापी संक्रमण के बीच दो सबसे बड़ी आबादी वाले देशों चीन और भारत के लिए चुनौती सबसे बड़ी है.

चीन से पैदा हुए कोरोना वायरस के संक्रमण ने दुनिया के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया है. कोरोना वायरस के संक्रमण के लिए आलोचना झेलने वाले चीन का दावा है कि उसने इस पर काफ़ी हद तक क़ाबू पा लिया है और अब वो दूसरे देशों की मदद के लिए तैयार है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी चीन की कोशिशों की तारीफ़ की है. डब्लूएचओ का कहना है कि अब यूरोप और अमरीका कोरोना वायरस संक्रमण के केंद्र बन चुके हैं.

इटली तो मौतों के मामले में चीन को काफ़ी पीछे छोड़ चुका है और अब स्पेन भी चीन से आगे निकल गया है. फ़्रांस और ब्रिटेन में मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और अमरीका भी संक्रमण के मामले में ज़्यादा पीछे नहीं.

चीन में अभी तक कोरोना वायरस के कारण 3287 लोगों की मौत हुई हैं. जबकि 74 हज़ार लोग ठीक भी हुए हैं. इटली में 7500 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि स्पेन में मरने वालों की संख्या 3600 से ज़्यादा हो गई है.

लेकिन चीन के बाद सबसे ज़्यादा चिंता भारत को लेकर है. 1.37 अरब आबादी वाले देश की हर गतिविधि पर दुनियाभर की नज़र है. विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कई बार भारत को सावधान कर चुका है, तो साथ में कुछ क़दमों की सराहना भी कर चुका है.

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इस समय भारत में 21 दिनों का राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन चल रहा है. भारत की बड़ी आबादी को देखते हुए ये मुश्किल क़दम है. लेकिन साथ ही मुश्किल है हेल्थ इन्फ़्रास्ट्रक्चर.

भारत सरकार भी दबी ज़ुबान में ये मान रही है कि अभी देश की इतनी बड़ी आबादी के लिए देश का इन्फ़्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं है. वेंटिलेटर्स की कमी है और बड़ी संख्या में लोगों के टेस्ट भी नहीं हो पा रहे हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शायद इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए 15000 करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की है. लेकिन साथ ही उन्होंने लोगों से बार-बार अनुरोध किया है कि अगर कोरोना वायरस के चेन को तोड़ना है तो लॉकडाउन का सही से पालन करना है. अन्यथा एक बार स्थिति हाथ से निकल गई, तो देश वर्षों पीछे चला जाएगा.

चीन ने किया आगाह

लॉकडाउन के फ़ैसले के बावजूद चीन ने भारत को आगाह किया है और बताया है कि कैसे वो कोरोना पर नियंत्रण कर सकता है.

ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक़ चीन के सीडीसी (सेंटर फ़ॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन) एक्सपर्ट ज़ेंग गुआंग ने कहा है कि अगर भारत चाहता है कि उसे घरेलू स्तर पर कोरोना वायरस का प्रसार रोकना है, तो उसे इंपोर्टेड केस को रोकना होगा.

इंपोर्टेड केस यानी बाहर से आए लोगों के माध्यम से फैल रहे वायरस को रोकना. पिछले दिनों भारत की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी सरकार पर ये आरोप लगाए कि उसने फ़ैसले लेने में देरी की.

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अगर भारत में पहला मामला जनवरी के आख़िरी सप्ताह में पता चला था, तो सख़्त फ़ैसले लेने में इतनी देरी क्यों हुई. दरअसल इस बीच भारत में विदेशों से आए लोगों के माध्यम से कोरोना वायरस फैल गया.

हालांकि सरकार का दावा है कि अभी भी उसने सामुदायिक स्तर पर इसे फैलने से रोका है. लेकिन दिन प्रति बढ़ते मामले भारत सरकार का सरदर्द भी बढ़ा रहे हैं.

दरअसल विदेशों से आए लोगों से शुरू हुआ संक्रमण अभी उन लोगों के परिजनों और उनके संपर्क में आए लोगों में ही फैला है. सरकार लॉकडाउन करके इस चेन को सामुदायिक स्तर पर फैलने से रोकना चाहती है.

चीन ने भी भारत को यही सबक दिया है कि अगर घरेलू स्तर पर बड़ा स्वरूप लेने से बचाना है तो इंपोर्टेड केस को रोकना होगा. ज़ेन गुआंग का ये भी कहना है कि इस वायरस पर प्रभावी नियंत्रण करके भारत और चीन दुनिया को ये दिखा सकते हैं कि उन्होंने कैसे ये लड़ाई लड़ी.

चीन की ओर से मदद की पेशकश

पिछले दिनों चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से फ़ोन पर बात की और उन्हें कोरोना वायरस से लड़ने में हर संभव मदद की पेशकश की.

चीन ने हर दिन भारत में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई और कहा कि भारत चीन के अनुभव से सबक सीख सकता है.

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चीन के विदेश मंत्री ने भी माना है कि दुनिया की नज़र भारत और चीन पर इसलिए है क्योंकि दोनों की आबादी एक अरब से ज़्यादा है.

ऐसे में उनका तर्क है कि दोनों देशों को मिलकर इस वायरस से लड़ना होगा. जयशंकर ने भी कोरोना पर क़ाबू पाने की चीन की कोशिशों की सराहना की और कहा कि वे चीन की मदद की पेशकश के लिए उसका धन्यवाद देते हैं.

चीन में जब कोरोना वायरस का संक्रमण अपने चरम पर था और वुहान में हर दिन बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो रहे थे, चीन ने सिर्फ़ 10 दिनों में मेकशिफ़्ट अस्पताल बनाकर पूरी दुनिया को ये बता दिया कि वो कोरोना को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं.

चीन को इस कोशिश का फ़ायदा कोरोना को क़ाबू करने में मिला.

चीन की कई कंपनियों ने पेशकश की है कि वो मेकशिफ़्ट अस्पताल बनाने में भारत समेत अन्य एशियाई देशों की मदद भी कर सकते हैं.

चायना रेलवे कंस्ट्रक्शन कॉर्प के एक एक्सपर्ट ने ग्लोबल टाइम्स को बताया, ''चीन की कई कंपनियाँ भारत में कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं. इन कंपनियों के पास पहले से ही अच्छा सप्लाई नेटवर्क है. भारत अगर चाहे तो ये कंपनियाँ चीन के वुहान की तरह भारत में मेकशिफ़्ट अस्पताल बनाने का काम शुरू कर सकती हैं.''

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भारत में स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक़ इस समय भारत में क़रीब 600 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं, 13 लोगों की मौत हो चुकी है और 42 लोग डिस्चार्ज किए जा चुके हैं.

लेकिन जानकार सबसे ज़्यादा सवाल इस पर उठा रहे हैं कि भारत अभी भी कम लोगों के टेस्ट कर रहा है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ भारत जहाँ एक सप्ताह में 5000 लोगों के टेस्ट कर रहा है, वहीं अमरीका एक सप्ताह में 26 हज़ार और ब्रिटेन एक सप्ताह में 16 हज़ार लोगों के टेस्ट कर रहा है.

यानी भारत की सबसे बड़ी समस्या हेल्थकेयर सिस्टम पर भारी दबाव की है, वो चाहे अस्पताल, वेंटिलेटर्स की कमी हो या फिर पर्याप्त संख्या में लोगों के टेस्ट न कर पाने की समस्या.

अब भारत ने प्राइवेट टेस्ट लैब्स को कोरोना वायरस की टेस्टिंग के लिए अनुमति दी है और जानकारों का मानना है कि इससे वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या में उछाल आ सकता है.

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चीन ने कैसे किया नियंत्रण

एक समय चीन के सबसे ज़्यादा प्रभावित वुहान में एक दिन में 13 हज़ार तक संक्रमण के मामले सामने आए थे.

लेकिन आज स्थिति ये है कि वुहान में पिछले दो दिनों से एक भी संक्रमण के मामले सामने नहीं आए हैं.

वुहान में लगाई गई पाबंदियों में ढील दी जा रही है और एक दिन पहले छोटे स्तर पर ट्रेन सेवा भी शुरू की गई. कई लोग वुहान से राजधानी बीजिंग भी पहुँचे.

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक़ अब भी जो मामले चीन में सामने आ रहे हैं, वे ज़्यादातर इंपोर्टेड मामले हैं.

कोरोना पर क़ाबू करने के लिए चीन के शीर्ष नेतृत्व की भी काफ़ी सराहना की जा रही है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सराहना विश्व स्वास्थ्य संगठन के निदेशक ने भी की और कहा कि बाक़ी दुनिया के देश इससे सीखें.

शी जिनपिंग ने समय रहते पूरे देश को इसके ख़तरे के प्रति न सिर्फ़ आगाह किया बल्कि संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल भी किया. मेकशिफ़्ट अस्पताल बने, टेस्टिंग फैसिलिटी बने, वुहान और हूबे की सीमाएँ सील की गईं.

वुहान में दो सप्ताह के अंदर जो दो मेकशिफ़्ट अस्पताल बनाए गए, वहाँ 2600 मरीज़ों के लिए व्यवस्था थी. शिन्हुआ के मुताबिक़ जिम और एक्जीबिशन सेंटर्स की जगह 16 अस्थायी अस्पताल बनाए गए, जिनमें 13 हज़ार बेड्स थे.

यही नहीं सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए पूरे संसाधन झोंक दिए. मरीज़ों की समय से भर्ती हो, इसके लिए सख़्त हिदायत थी.

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चीन की इसी प्रशासनिक सूझबूझ को देखते हुए लांसेट ने अपने संपादकीय में लिखा- चीन की सफलता उसके मज़बूत प्रशासिक व्यवस्था की वजह से है. किसी भी ख़तरे के समय प्रशासन पूरी तरह मोबिलाइज हो जाता है. साथ ही उसे जनता का समर्थन भी मिलता है.

लॉकडाउन और सीमाएँ सील होने के दौरान सरकार ने ये सुनिश्चित किया कि लोगों को सभी ज़रूरी सामान बिना किसी रुकावट के घर बैठे मिल सकें. जब लोगों को घर बैठे सामान मिलने लगे, तो लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा समर्थन किया.

चीन ने नए टेस्टिंग किट बनाए, दवाएँ विकसित कीं और वैक्सीन के लिए भी तैयारी शुरू की. अब चीन दुनिया के बाक़ी देशों के साथ मिलकर वैक्सीन पर तेज़ी से काम कर रहा है.

चीन ने तकनीक का भी बेहतर इस्तेमाल किया. छिड़काव के लिए रोबोट्स का इस्तेमाल किया गया, ड्रोन्स के माध्यम से तापमान मापे गए.

चीन ने संक्रमण के इस दौर में अन्य देशों की भी मदद की. चीन ने दक्षिण कोरिया को मास्क और प्रोटेक्टिव गाउंस भेजे. पाकिस्तान, ईरान, जापान और अफ़्रीकी यूनियन को टेस्टिंग किट भेजे.

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भारत के लिए सबक

चीन ने जिस तरह कोरोना वायरस के संक्रमण को क़ाबू करने का दावा किया है, भारत इससे सबक ले सकता है.

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जब चीन के विदेश मंत्री ने बात की, तो कहा कि वो चीन की कोशिशों की सराहना करते हैं.

लेकिन भारत ने अब भी मेक शिफ़्ट अस्पतालों को लेकर कोई ठोस फ़ैसला नहीं किया है.

भारत की सबसे बड़ी चुनौती ही स्वास्थ्य व्यवस्था और बड़ी आबादी है.

चीन ने मदद की पेशकश करके गेंद भारत के पाले में डाली तो है, लेकिन फ़ैसला तो भारत को करना है.

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