कोरोना वायरस, फ़ेक न्यूज़ और ग़रीब मुसलमानों की मुसीबत

  • कीर्ति दुबे
  • बीबीसी संवाददाता
कोरोना वायरस

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भारत में कोरोनावायरस के मामले

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स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

घटना 1- तीन मुसलमान मछुआरों को 10-15 लोग घेर लेते हैं. तीनों मछुआरे हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते हैं. स्थानीय भाषा में लोग चिल्लाते हैं- 'छूना मत इन्हें, ये लोग ही कोरोना फैला रहे हैं.'- कर्नाटक के बागलकोट की घटना

घटना 2- 'जावेद भाई आप अपनी दुकान उठा लो और यहां दुकान मत लगाओ. बड़ी दिक्क़त हो रही है आप लोगों से. इन्हीं लोगों से बीमारी फैल रही है. उठाओ...उठाओ दुकान उठाओ अपनी.'- उत्तराखंड के हल्द्वानी की घटना

ये बीते कुछ दिनों में देश के दो हिस्सों में हुई घटनाएं हैं, ऐसी कई और घटनाओं की ख़बरें और वीडियो सामने आए हैं.

कोराना संक्रमण और लॉकडाउन की वजह से देश भर में लोग परेशान हैं, ख़ास तौर पर ग़रीब मज़दूरों और छोटे दुकानदारों को बहुत दिक़्क़तों का सामना करना पड़ रहा है, पिछले दिनों पूर्वोत्तर भारत के लोगों को प्रताड़ित किए जाने की कुछ घटनाएँ सामने आई थीं.

तब्लीग़ी जमात के मरकज़ से बड़े पैमाने पर वायरस फैलने की ख़बरें आने के बाद से देश के अलग-अलग हिस्सों से ग़रीब मुसलमानों को निशाना बनाए जाने की ख़बरें आ रही हैं.

30 मार्च को दिल्ली के तब्लीग़ी जमात के धार्मिक आयोजन में शामिल लोगों में से 6 लोगों की कोविड-19 से मौत की ख़बर जैसे ही सामने आई, उसके बाद से फ़ेक न्यूज़ और अफ़वाहों का दौर चल पड़ा है.

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मरकज़ में हिस्सा लेने वाले 8,000 लोगों की वजह से निश्चित तौर पर वायरस का फैलाव हुआ है, पूरे देश भर में संक्रमण के मामलों में एक बड़ा हिस्सा जमात से सीधे जुड़ा हुआ बताया गया है.

दिक्क़त ये है कि अब देश के करोड़ों मुसलमानों और मरकज़ के जमातियों में कई बार लोग अंतर नहीं कर रहे हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कह चुका है कि कोरोना वायरस को किसी धर्म या नस्ल से नहीं जोड़ना चाहिए.WHO के इमरजेंसी प्रोग्राम डायरेक्टर माइक रेयन ने कहा है, '' कोविड-19 किसी की गलती नहीं है. हर संक्रमित शख़्स इसका पीड़ित है. ये बहुत ज़रूरी है कि हम इसे किसी नस्ल, घर्म, संप्रदाय से बिलकुल ना जोड़े. इससे कोई फ़ायदा नहीं होने वाला है. ''

भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से भी इस बात को बार बार दोहराया जा रहा है कि कोविड-19 के संक्रमण को किसी धर्म या क्षेत्र से ना जोड़ा जाए. इसके बावजूद ऐसी कई घटनाएं सामने आए जा रही हैं जिसमें लोगों की धार्मिक पहचान को कोरोना वायरस से जोड़ा जा रहा है.

31 मार्च से ही जगह-जगह मुसलमानों को टार्गेट किए जाने के वीडियो और मुसलमानों को दोषी बताने वाले फ़ेक वीडियो सामने आने लगे.

हल्द्वानी के जावेद

उत्तराखंड के हल्द्वानी से ऐसा ही एक वीडियो आया है. जिसमें कुछ लोग आकर उनसे उनका नाम पूछते हैं. जावेद नाम बताने पर लोग उन्हें दुकान उठाने को कहते हैं, साथ ही कहते हैं कि अब वह दुकान ना लगाएं.

बग़ल में बैठा दूसरा दुकानदार वीडियो में ही पूछता है क्या हमें भी दुकान नहीं लगानी. जिसके जवाब में लोग कहते हैं - नहीं, आप लगाइए.

इन लोगों को नहीं लगाना, इनके यहां से ही कोरोना आ रहा है ना. साथ ही वो कहते हैं कि अगर कोई मुसलमान ठेले वाला दिखे या कोई सामान लेता हुआ भी दिखे तो हमारा नंबर ले लो, हमें तुरंत बताना.

बीबीसी ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रहने वाले वीडियो में नज़र आ रहे जावेद से बात की. जावेद बताते हैं, "आईटीआई रोड पर रविवार की सुबह सात बजे थे, मैंने दुकान लगानी शुरू ही की थी कि कुछ लोग आ गए और मुझसे आधार कार्ड मांगा. मेरा आधार तो घर पर था तो उन लोगों ने मेरा नाम पूछा. नाम पता चलते ही बोले कि दुकान उठा लो और यहां दुकान मत लगाना".

जावेद का दावा है कि जब उनकी रेहड़ी हटवाई जा रही थी तो महिला पुलिसकर्मी चुपचाप ये देख रही थी. साथ ही, दुकान हटवाने वाले लोगों ने दूसरे दुकानदारों से कहा कि वे दुकान लगा सकते हैं.

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जब देश भर में मज़दूर पैदल अपने गांव जाने के लिए निकल पड़े थे तो जावेद ये सोचकर अपने गाँव नहीं गए कि फलों की बिक्री तो होती ही रहेगी.

मूलतः उत्तर प्रदेश के बदायूं के रहने वाले जावेद कहते हैं, "अब क्या करें, घर में बैठे हैं. 10-15 लोग थे, कुछ बोल नहीं सकते थे. अब नहीं लगाएंगे दुकान."

उनकी आवाज़ में गहरी मायूसी थी. जावेद फल बेचते थे और उनके भाई मंडी से फल लाने का काम करते थे. अब दोनों ही भाइयों के पास कोई काम नहीं है.

नैनीताल के एसएसपी सुनील मीणा ने हमें बताया कि फल वाले की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है, लेकिन हमें ये शिकायत ज़रूर मिली है कि कुछ लोगों ने लॉकडाउन का उल्लंघन किया है, उन पर आईपीसी की धारा 188 लगाकर कार्रवाई की गई है.

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जावेद अपने ठेले के साथ

दिल्ली में भी आधार कार्ड की मांग

फ़रवरी महीने में दंगे की आग झेल चुकी दिल्ली भी इससे अछूती नहीं है. उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के शास्त्री नगर से भी एक ऐसा ही वीडियो सामने आया है. शास्त्री नगर के बी- ब्लॉक इलाक़े में एक मीटिंग की गई और तय किया गया कि इलाक़े में किसी भी मुसलमान ठेले वालों को घुसने नहीं देंगे.

इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जहां ये लोग कॉलोनी में आए फल-सब्जियों की रेहड़ी वालों से आधार कार्ड दिखाकर अपनी पहचान बताने को कह रहे हैं. इस बैठक में शामिल हुए एक शख्स से बीबीसी ने संपर्क किया.

वीडियो के वायरल होने के कारण शख़्स ने हमसे ऑन-रिकॉर्ड तो बात नहीं की लेकिन ये ज़रूर बताया कि इस तरह की बैठक उनकी कॉलोनी में हुई थी.

कर्नाटक में गिड़गिड़ाते मुसलमान

राज्य में ऐसी ही हिंसा और किसी धर्म के लोगों के प्रति ज़ोर-ज़बरदस्ती के दो वीडियो बीते दो दिनों नें सामने आए हैं.

सोमवार को कर्नाटक के बागलकोट ज़िले के बिदारी गांव में मुसलमान मछुआरों को गांव वालों ने घेर लिया. ये मछुआरे कृष्णा नदी में मछली पकड़ने आए थे लेकिन इन्हें भीड़ ने घेर लिया और कहने लगे कि 'तुम लोग क्यों आए हो. तुम लोगों की वजह से ही कोरोना फैल रहा है.'

इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें गांव वालों के हाथ में डंडे हैं. ये मछुआरे हाथ जोड़कर रोते-गिड़गगिड़ाते नज़र आ रहे हैं.

बागलकोट के एसपी लोकेश बी जगालसर ने बीबीसी को बताया, "चार मछुआरे थे जो एक गांव में मछली पकड़ने गए थे, जिनमें दो हिंदू और दो मुसलमान थे. ये मछुआरे दूसरे गांव मछली पकड़ने गए थे लेकिन इन्हें गांववालों ने घेर लिया. उनके साथ जो हुआ वो ग़लत है. हमने एफ़आईआर रजिस्टर किया है और पाँच लोगों की गिरफ़्तारी की गई है".

सोमवार को ही बेंगलूरू के अमरूताली में भी हिंसा की घटना हुई. स्वराज अभियान से जुड़ीं ज़रीन ताज अपने बेटे तबरेज़ के साथ बस्तियों में राशन बांट रही थीं कि कुछ लोगों ने उन्हें ऐसा करने से रोका.

तबरेज़ ने बीबीसी को बताया कि "लगभग 20 लोगों ने हमसे कहा कि हिंदुओ को खाना मत बांटो, अपने लोगों (मुसलमानों को) को बांटो. हमने उनसे बहस नहीं की और पास की बस्ती में चले गए. इसके बाद भीड़ आई और हमें डंडों से मारने लगी". तबरेज़ के दाहिने हाथ में तीन टांके लगे हैं. सिर पर भी कुछ टांके लगे हैं.

23 साल के तबरेज़ कपड़ों के एक शोरूम में काम करते हैं और पिछले 14 दिनों से योगेंद्र यादव की संस्था स्वराज इंडिया से मिले राशन ग़रीबों में बांट रहे थे. इस मामले में पुलिस ने 6 अज्ञात लोगों पर एफ़आईआर की है.

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तबरेज़ से जुड़े मामले में एफआईआर की प्रति

यहां हमने उन घटनाओं की ही बात की है जो हम तक सोशल मीडिया के ज़रिए पहुंची. कोविड-19 एक महामारी है जो किसी भी धर्म, लिंग और नस्ल से परे है. हर वो शख़्स जो इससे संक्रमित है इसके संक्रमण को आगे पहुंचा सकता है.

ये बात सही है कि देश में तब्लीग़ी जमात के आयोजन के बाद कोविड-19 के संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़े.

स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव लव अग्रवाल ने बताया है कि भारत के कोविड-19 के 30 फ़ीसदी मामलों के तार तब्लीग़ी जमात से जुड़े हैं, लेकिन अब आम लोगों के ग़ुस्से का शिकार वो मुसलमान भी हो रहे हैं जिनका जमात से कोई ताल्लुक़ नहीं है.

भारत पहला ऐसा देश नहीं है जहां किसी धर्म से जुड़ी संस्था की ग़लती के कारण कोविड-19 का संक्रमण फैला हो.

दक्षिण कोरिया के डेगू शहर स्थित शिनचेओंजी चर्च के प्रमुख लीमैन ही के कारण वहां कोरोना के चार हज़ार मामले सामने आए.

यानी दक्षिण कोरिया के कुल मामले का 60 फ़ीसदी. लीमैन ही को दक्षिण कोरिया में कोरोना क्राइसिस का केंद्र बिंदु कहा गया. बाद में उन्होंने अपनी ग़लती की माफ़ी भी मांगी.

झूठ के ज़रिए फैलाई नफ़रत

भारत में कोरोना को धर्म से जोड़ने का ये सिलसिला यूं ही शुरू नहीं हुआ है. बड़े ही सुनियोजित तरीक़े से फ़ेक जानकारियाँ, वीडियो फैलाए गए, और आम लोगों तक ये धारणा पहुंचाई गई कि मुसलमान कोरोना से ना सिर्फ़ पीड़ित हैं बल्कि इसे जान-बूझकर फैला रहे हैं. ऐसे ही कई फ़ेक, और भ्रामक वीडियो सामने आए जो या तो झूठे थे, या उनका संदर्भ कुछ और था.

फ़ेक वीडियो - तब्लीग़ी जमात के लोगों ने पुलिस पर थूका

ऐसा ही एक वीडियो है जिसके ज़रिए दावा किया जा रहा है कि जमात में शामिल कोरोना संक्रमित लोगों ने पुलिस पर थूका ताकि उनमें भी संक्रमण फैल जाए. बीबीसी ने बीते दिनों इस वीडियो का फ़ैक्ट चेक भी किया था.

ये वीडियो मुंबई का था जिसमें अंडरट्रायल क़ैदी की मुंबई पुलिस से कोर्ट जाने के दौरान कहासुनी हो गई और उसने पुलिस पर थूक दिया लेकिन इस वीडियो को इस दावे के साथ फैलाया गया कि जमात के लोगों ने इस तरह पुलिस पर कोविड-19 का संक्रमण फैलाने के इरादे से थूका. उस विचाराधीन क़ैदी का जमात से कोई ताल्लुक़ नहीं था.

फ़ेक वीडियो- खाना पैक करते वक़्त थूकता मुसलमान

2 अप्रैल को ही सोनम महाजन ने एक वीडियो ट्वीट किया. इस 45 सेकेंड के वीडियो में एक मुसलमान आदमी खाना पैक करता है और उसमें मुंह से फूँक मारता है.

सोनम महाजन ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए उस घटना को सही ठहराया जिसमें एक व्यक्ति ने मुसलमान ज़ोमैटो डिलीवरी ब्वाय से पार्सल लेने के लिए मना किया था.

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बात सरहद पार

दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

बात सरहद पार

समाप्त

ऑल्ट न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक़ ये वीडियो अप्रैल, 2019 से इंडोनेशिया, सिंगापुर, यूएई में भी अलग-अलग दावों के साथ शेयर किया जा चुका है. हालंकि ये कहां का वीडियो है इसकी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है लेकिन ये वीडियो काफ़ी पुराना है, इसका कोरोना के फैलाव से कोई ताल्लुक़ नहीं है. इसे अब भारत में नए मक़सद के साथ शेयर किया जा रहा है.

फ़ैक्ट चेकर वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ के संस्थापक प्रतीक सिन्हा मानते हैं कि 30 मार्च के बाद से कम्युनल नेचर वाले फ़ेक वीडियो और मैसेज तेज़ी से सामने आए.

वो कहते हैं, "कई पुराने मैसेज वायरल किए जाते हैं, ये एक्सीडेंटल नहीं होते इन्हें खोजकर कोई तो लाता ही है. एक पूरा नेटवर्क है जो ऐसे मैसेज फैलाता है. आम आदमी को जब एक ही तरह के मैसेज मिलते हैं तो उसके लिए भी इन पर यक़ीन करना आसान हो जाता है. हम सब अपनी विचारधारा से मेल खाते वीडियो पर यक़ीन जल्दी कर लेते हैं".

दरअसल, इस तरह के वीडियो तब और भी सामने आने लगे जब उत्तर रेलवे के प्रवक्ता ने दावा किया कि तब्लीग़ी जमात के लोग तुग़लक़ाबाद क्वारंटीन सेंटर में स्वास्थ्यकर्मियों पर थूक रहे हैं.

हालांकि इस घटना का कोई वीडियो रेलवे अथॉरिटी की ओर से जारी नहीं किया गया लेकिन इस दावे के साथ कई पुराने वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों को परोसे जाने लगे.

इन फ़ेक वीडियो का सबसे ज़्यादा असर मुस्लिम समुदाय के उन लोगों पर पड़ रहा है जो निम्न आर्थिक वर्ग से आते हैं. ये वो लोग हैं जो तब्लीग़ी जमात की लापरवाही और इन फ़ेक जानकारियों की क़ीमत अपनी रोज़ी-रोटी खोकर चुका रहे हैं, और डर में जीने को मजबूर हैं.

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