भारत प्रशासित कश्मीर में एक अन्य पत्रकार के ख़िलाफ़ केस दर्ज

गौहर गिलानी

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पत्रकार और लेखक गौहर गिलानी

कोरोना वायरस से निपटने के लिए जारी लॉकडाउन के बीच भारत प्रशासित कश्मीर में एक युवा महिला पत्रकार के बाद अब पत्रकार और लेखक गौहर गिलानी के ख़िलाफ़ पुलिस ने मुक़दमा दर्ज कर लिया है.

पुलिस की ओर से जारी किए गए बयान में आरोप लगाया गया है कि गौहर गिलानी कश्मीर में चरमपंथी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली बातें करते हैं और सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट के जरिए वो ग़ैरकानूनी गतिविधियों में भी शामिल हैं जो कि देश की एकता के लिए ख़तरा है.

साइबर पुलिस का कहना है कि गौहर गिलानी के ख़िलाफ़ कई शिकायतें मिली थीं जिसके बाद उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है. पुलिस ने बताया कि श्रीनगर में साइबर पुलिस स्टेशन में उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज हुआ है.

गौहर गिलानी ने फ़ेसबुक पर अपने हालिया पोस्ट में लिखा है, ''उम्मीद है कि 'शुद्धीकरण' की प्रक्रिया या प्रवचन व्यक्तिगत, तुच्छ और धार्मिक नहीं बनेंगे. हर किसी को सभ्य तरीके से सभी तरह के विचारों का सम्मान करना चाहिए क्योंकि विविधता से भरी दुनिया में विचारों की एकरूपता नहीं हो सकती है. एक व्यक्ति महत्वपूर्ण नहीं है. महत्वपूर्ण है स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विचार रखने का अधिकार. प्रतिशोधी मत बनो, दयालु बनो. सज्जन.''

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महिला पत्रकार के ख़िलाफ़ UAPA के तहक मुक़दमा

इसके पहले पुलिस ने पत्रकार मोसर्रत ज़हरा के ख़िलाफ़ ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों को रोकने के यूएपीए क़ानून के तहत मुक़दमा दर्ज किया था.

मोसर्रत ज़हरा पिछले कई वर्षों से फ़्रीलांस फ़ोटो जर्नलिस्ट के तौर पर भारत प्रशासित कश्मीर में काम कर रही हैं. वो भारत और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के कई संस्थानों के लिए काम कर चुकी हैं.

वो ज़्यादातर हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों पर रिपोर्ट करती रहीं हैं. अपने चार साल के करियर में उन्होंने आम कश्मीरियों पर हिंसा के प्रभाव को दिखाने की कोशिश की है.

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मोसर्रत ज़हरा

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दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

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पाँच अगस्त, 2019 को भारत सरकार ने संविधान की धारा 370 के तहत कश्मीर को मिलने वाले विशेष राज्य के दर्जे को ख़त्म कर दिया और पूरे राज्य को लॉकडाउन कर दिया था.

मोसर्रत ज़हरा ने इस दौरान जो रिपोर्टें कीं उनको काफ़ी सराहा गया था.मोसर्रत ने कश्मीर सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर्स किया है.

पुलिस के अनुसार मोसर्रत ज़हरा ने फ़ेसबुक पर भारत विरोधी पोस्ट किया है और एक पोस्ट में धार्मिक व्यक्ति को चरमपंथियों के साथ तुलना की है.

पुलिस ने अपने बयान में कहा है कि उन्हें कई लोगों से ये शिकायत मिली है कि मोसर्रत ऐसी पोस्ट करती हैं जिससे कश्मीरी युवा इससे भड़क सकते हैं और वो चरमपंथी गतिविधियों की तरफ़ आकर्षित हो सकते हैं.

मोसर्रत ने बीबीसी से अपनी सफ़ाई में कहा कि उन्होंने कश्मीरी महिलाओं में तनाव से संबंधित एक रिपोर्ट के सिलसिले में गांदरबल ज़िले की एक महिला का इंटरव्यू किया था.

मोसर्रत के अनुसार उन महिला ने उन्हें बताया था कि 20 साल पहले उनके पति को एक कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मार दिया गया था.

मोसर्रत का कहना है कि उन्होंने इस रिपोर्ट से संबंधित कुछ तस्वीरें भी पोस्ट की थीं.

पुलिस ने मोसर्रत के ख़िलाफ़ मुक़दमे की पुष्टि करते हुए एक बयान जारी किया है. उस बयान में पुलिस ने जनता को चेतावनी दी है कि सामाजिक नेटवर्किंग की वेवसाइट पर 'देश विरोधी' पोस्ट करने से परहेज़ करें और ऐसा करने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी.

एडिटर्स गिल्ड ने जताई चिंता

जम्मू-कश्मीर में पत्रकारों के ख़िलाफ़ दर्ज हो रहे मामलों पर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने चिंता जताई है.

एडिटर्स गिल्ड की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि किसी भी चीज़ को मुख्यधारा मीडिया में छापने या सोशल मीडिया पर लिखने को लेकर कानूनी कार्रवाई करना कानून का इस्तेमाल है. और देश के दूसरे हिस्सों में भी पत्रकारों को दबाने की एक कोशिश है.

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बयान में कहा गया है, ''अगर सरकार को किसी की रिपोर्टिंग से कोई शिकायत है तो उससे निपटने के दूसरे भी सामान्य तरीके हैं. महज सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर किसी पर कार्रवाई करना और उस पर आतंकवाद निरोधक कानून के तहत केस दर्ज करना सही नहीं है.''

एडिटर्स गिल्ड ने जम्मू और कश्मीर प्रशासन से पत्रकारों के ख़िलाफ़ दर्ज किए गए मामले वापस लेने की अपील की है.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर लिखा कि बिना सवाल जवाब के जिस तरह कश्मीर में पत्रकारों और विचारकों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किए जा रहे हैं वो ग़लत हैं और उन्हें रोका जाना चाहिए.

पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती ने भी गौहर गिलानी और दूसरे पत्रकारों के ख़िलाफ़ दर्ज किए गए मामलों की आलोचना की. उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि महामारी के बीच में जिस तरह पत्रकारों के ख़िलाफ़ मामले दर्ज हो रहे हैं वो अनुचित है.

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