कोरोना: 'अस्पताल ने भर्ती कर लिया होता तो अमित ज़िंदा होता '

  • गुरप्रीत सैनी
  • बीबीसी संवाददाता
अमित कुमार

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अमित कुमार

दिल्ली के भारत नगर पुलिस स्टेशन में पोस्टेड 32 साल के कॉन्स्टेबल अमित कुमार आम दिनों की तरह ही सोमवार चार मई को ड्यूटी गए थे.

उस वक्त वो एक दम ठीक थे, लेकिन शाम को उनको हल्का बुख़ार हो गया. तब उनके साथी कॉन्स्टेबल ने उन्हें बुख़ार की दवा दे दी. जिसके बाद वो ठीक महसूस करने लगे. उन्होंने खाना भी खाया. उसके बाद एक फ़िल्म भी देखी. थोड़ा फ़ोन चलाया. इसके बाद आराम से सो गए.

रात को दो बजे उन्हें सांस लेने में तक़लीफ होने लगी. उनके साथियों ने उन्हें काढ़ा दिया और गरम पानी पिलाया. उस वक्त थोड़ा आराम मिला लेकिन इसके बाद अमित को पूरी रात नींद नहीं आई. सुबह फिर सांस लेने में दिक़्क़त होने लगी. सुबह पांच-छह बजे के आस-पास उनके साथियों ने गाड़ी निकाली और अमित कुमार को लेकर अस्पताल के लिए निकल पड़े.

अमित की पत्नी पूजा और तीन साल का बेटा फिलहाल हरियाणा के सोनीपत में हैं. अमित नौकरी के चलते दिल्ली में रह रहे थे.

अमित की पत्नी के भाई रवि ने बीबीसी हिंदी को बताया कि उनके साथियों का फ़ोन आया था. वो बता रहे थे कि सुबह से अमित को कई अस्पतालों में लेकर गए, लेकिन किसी ने भर्ती नहीं किया.

अमित के परिजनों का दावा है कि उनके साथी उन्हें सुबह से आठ-नौ अस्पतालों में लेकर गए, लेकिन उन्हें कहीं भर्ती नहीं किया गया.

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इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने अमित के एक साथी के हवाले से लिखा है, "अमित खड़ा भी नहीं हो पा रहा था. सुबह आठ बजे हम उसे दिल्ली पुलिस हैदरपुर कोविड टेस्टिंग सेंटर लेकर गए. लेकिन वहां सिर्फ़ टेस्ट हो सकता था. हमें बाबा साहेब आम्बेडकर हॉस्पिटल रेफ़र कर दिया गया. हम उसके साथ काफ़ी देर तक लाइन में लगे रहे और फिर भारत नगर के एसएचओ ने एक डॉक्टर से बात की. डॉक्टर ने कहा कि उनका यहां टेस्ट हो सकता है, लेकिन कोविड-19 होने की स्थिति में उन्हें यहां भर्ती नहीं किया जा सकता. हमने डॉक्टर से निवेदन किया. हमने वहां ढाई घंटे का वक्त बर्बाद किया."

बीबीसी हिंदी ने अम्बेडकर हॉस्पिटल के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, लेकिन आर्टिकल के पब्लिश होने तक किसी से हमारी बात नहीं हो सकी है.

अमित के परिजनों के मुताबिक़ अमित को दीप चंद बंधु अस्पताल ले जाया गया. उन्होंने बताया "जहां पहले उनका टेस्ट करने से इनकार किया गया लेकिन फिर काफ़ी मिन्नतें करने के बाद टेस्ट किया गया."

हालांकि इंडियन एक्सप्रेस अख़बार के अनुसार अस्पताल प्रशासन का कहना है कि टेस्ट करने के बाद उन्होंने अमित को वहां से राम मनोहर लोहिया अस्पताल रेफ़र कर दिया था.

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दिल्ली पुलिस

अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत

शाम को साढ़े छह बजे के बाद उनकी तबियत ज़्यादा बिगड़ी और आरएमएल अस्पताल ले जाते वक्त उनकी रास्ते में ही मौत हो गई.

अमित की पत्नी के भाई रवि सवाल उठाते हैं कि अस्पताल वालों ने अमित को एडमिट क्यों नहीं किया?

वो कहते हैं, "अगर सही समय पर अस्पताल में भर्ती कर लिया जाता तो अमित आज ज़िंदा होता. उसने सात बजे के आस-पास दम तोड़ा. उस वक्त वो अस्पताल पहुंचने वाला था. दिन में अमित से हमारी बात भी हुई थी, वो कह रहा था कि मैं ठीक हूं. कह रहा था कि मेरी चिंता मत करो."

पूरा दिन अमित के साथ घूमते रहे उनके एक साथी ने रवि को बताया कि अमित को कोई एडमिट नहीं कर रहा था.

रवि के मुताबिक़, "अमित के साथियों ने पुलिस के अफ़सरों को भी फोन किया लेकिन किसी ने वक्त पर जवाब नहीं दिया. अगर वो चाहते तो भर्ती करवा सकते थे. अपना घर छोड़कर दूसरों की भलाई के लिए वो रोड पर खड़ा था. लेकिन उसके लिए कोई नहीं है. ये सोचने वाली बात है. वो जनता की मदद कर रहा था. लेकिन उसकी मदद कौन करेगा? उसके बचने के इतने चांस थे, सांस की तकलीफ़ के बाद भी वो शाम तक ज़िंदा रहा. फिर भी उसको कोई इलाज नहीं मिला."

पांच मई मंगलवार को शाम में अमित की मौत हो गई. बुधवार दोपहर उनकी कोरोना टेस्ट रिपोर्ट आ गई, जिसमें उनके पॉज़िटिव होने की पुष्टि भी हो गई है.

रवि बताते हैं कि अमित के साथियों ने ये सारी बातें उन्हें अमित की मौत के बाद बताईं.

वो कहते हैं, "तब उसका फ़ोन आया था कि अमित की मौत हो गई है, आप लोग आ जाओ."

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पत्नी को दो दिन बाद बताया

अमित की पत्नी और तीन साल का बच्चा फिलहाल सोनीपत में ही हैं. दिल्ली पुलिस ने परिवार को फ़ोन कर दिल्ली आने के लिए कहा है, ताकि वो अमित के अंतिम संस्कार में शामिल हो सकें.

शुरू में अमित की मौत की बात उनकी पत्नी से छिपाई गई. उन्हें इस बारे में दो दिन बाद यानी बुधवार शाम को बताया गया.

रवि बताते हैं , "वो बार-बार पूछ रही थी कि अमित को क्या हुआ? कह रही थी कि डॉक्टर से बात कर लो. हमने उसे कह रखा था कि अमित वेंटिलेटर पर है. वो इसी आस में बैठी थी कि अमित अब तक ज़िंदा है."

23 मार्च से 10-12 दिन के लिए अमित सोनीपत में अपने घर भी रहकर आए थे. उनकी पत्नी के भाई के मुताबिक़, उस वक्त वो एकदम स्वस्थ्य थे. उसके बाद वो ड्यूटी पर ये कहकर लौट गए थे कि 17 मई के बाद घर वापस लौटेंगे.

अमित की पत्नी कॉन्ट्रैक्ट टीचर हैं. उनके भाई चाहते हैं कि उनकी बहन की नौकरी को पक्का कर दिया जाए, ताकि वो अपना और अपने तीन साल के बेटे का गुज़ारा कर सकें.

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अमित कुमार

दिल्ली पुलिस में कोरोना से पहली मौत

कोरोना वायरस के चलते जान गवांने वाले अमित कुमार दिल्ली पुलिस के पहले कर्मचारी हैं.

नॉर्थ वेस्ट दिल्ली की डीसीपी विजयंता आर्य ने बीबीसी हिंदी से कहा, "ये दुखद है कि हमारे एक साथी अब हमारे बीच नहीं हैं. ये सब इतनी जल्दी में हो गया कि हम भी कुछ समझ नहीं पाए. फ़िलहाल अमित के संपर्क में आए कुल 10 पुलिसकर्मियों को क्वारंटीन में भेज दिया गया है. उनका और उनके परिवार का टेस्ट भी कराया गया है."

अमित साल 2010 में पुलिस में भर्ती हुए थे. डीसीपी विजयंता आर्य बताती हैं कि अमित कुमार क्राइम डेटा कोलेटर थे. वो थाने का क्राइम डेटा सेंट्रल क्राइम ऑफ़िस में अपडेट करवाते थे.

दिल्ली के पुलिस कमिशनर एस एन श्रीवास्तव ने कॉन्स्टेबल अमित कुमार की मौत पर दुख जाते हुए ट्वीट किया है और उनके परिवार को सांत्वना दी है

पुलिस कमिश्नर ने बताया कि उन्होंने अमित के परिजनों से भी बात की है. साथ ही डीसीपी नॉर्थ वेस्ट विजयंता आर्या ने उनके भाई रशबीर राणा से मुलाकात की.

दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने भी ट्वीट कर कहा कि कोविड-19 के ख़िलाफ़ लड़ाई में अमित कुमार के बलिदान को याद रखा जाएगा.

वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अमित कुमार के परिवार को एक करोड़ रुपये सम्मान राशि देने की घोषणा की है.

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स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां

आंकड़े कब अपडेट किए गए 1 जून 2022, 2:54 pm IST

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