कोरोना: विदेश में फंसे भारतीयों को स्वदेश लाने की ये है सरकार की योजना

सउदी अरब

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पिछले 24 घंटों में भारत में कोविड-19 संक्रमण के 3,390 नए मामले सामने आए हैं और इनमें से 1,273 लोग इलाज के बाद ठीक भी हो चुके हैं.

ये आंकड़े केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने शुक्रवार शाम हुई प्रेस कान्फ्रेस में दी है.

इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में गृह मंत्रालय की अधिकारी पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बताया कि सरकार की कोशिश है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में जो मज़दूर, छात्रों और पर्यटकों फंसे हुए हैं उन्हें उनके घर पहुंचाया जाए. इसके लिए सरकार ने विशेष बसें और ट्रेनें चलाने की इजाज़त दी है.

विदेश से फंसे भारतीयों को लाने की क्या है याजना?

इसकी कड़ी में सरकार की दूसरे बड़ी प्राथमिकता है विदेशों में फंसे लोगों को चरणबद्ध तरीके से देश वापस लाना. इसके लिए यात्रा की व्यवस्था नॉन-शेड्यूल्ड कमर्शियल फ्लाइट्स और नौसेना के जहाज़ों के द्वारा की गई है.

7 मई से ये काम शुरु हो चुका है. इस कड़ी में नौसेना का एक जहाज़ मालदीव से 700 से ज़्यादा नागरिकों को वापस लाने का मिशन शुरू कर चुका है.

इसके लिए विदेशों में फंसे लोगों को वहां मौजूद भारतीय दूतावास में अपना पंजीकरण कराना होगा. इसमें गर्भवती महिलाओं, छात्रों, वीज़ा अवधि समाप्त हो चुके लोगों और मेडिकल इमर्जेंसी वाले मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी.

पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बताया कि यात्रा शुरु होने से पहले कोरोना के लिए यात्रियों की जांच की जाएगी और जिन यात्रियों में लक्षण नहीं होंगे केवल उन्हीं को यात्रा करने की इजाज़त दी जाएगी.

सभी यात्रियों को सरकार को ये लिखित में देना होगा कि भारत आने पर कम से कम 14 दिनों के लिए अपने खर्चे पर क्वारंटीन सेंटर पर अनिवार्य क्वारंटीन में रहना होगा. भारत पहुंचने पर सभी यात्रियों की जांच की जाएगी और उन्हें आरोग्य सेतु ऐप पर खुद को रजिस्टर करना होगा.

इस स्टेज पर यदि किसी व्यक्ति में कोरोना के लक्षण दिखाई देते हैं तो उन्हें अस्पताल ले जाया जाएगा और बाकी यात्रियों को क्वारंटीन सेंटर जाना होगा. 14 दिनों के बाद कोरोना के लिए इस यात्रियों की फिर से जांच होगी.

जो लोग किसी ज़रूरी कारण से विदेश जाना चाहते हैं उनके लिए भी व्यवस्था की गई है.

उन्होंने बताया कि जिन विदेशी नागरिक वीज़ा अवधि ख़त्म हो रही है वो इसके लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, इसके लिए उनसे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा.

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने प्रेस कान्फ्रेस में कहा कि देश में अब तक कोरोना के कुल 56,342 मामले सामने आए हैं.

इलाज के बाद अब तक कुल 16,539 लोग ठीक हो चुके हैं और देश में कोरोना के कुल 37,916 सक्रिय मामले हैं.

  • देश के 42 ज़िलों में पिछले 28 दिनों में कोरोना संक्रमण का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया.
  • 29 ज़िलों में पिछले 21 दिनों में कोरोना का कोई नया मामला सामने नहीं आया है.
  • 36 ज़िलों में पिछले 14 दिनों में संक्रमण का कोई नया मामला नहीं देखा गया है.
  • 46 ज़िलों में पिछले सात दिनों में कोरोना का कोई नया मामला नहीं आया है.
  • अब तक देश के 216 ज़िलों में कोविड-19 संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है.

लव अग्रवाल ने बताया कि कोरोना की मौजूदा रिकवरी रेट 29.36 फ़ीसदी है.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि भारतीय रेलवे ने 5,231 कोच विशेष 'कोविड केयर सेंटर' में बदल दिए हैं. इन सभी कोच को 215 स्टेशनों पर लगाया जाएगा और इनका इस्तेमाल कोरोना के 'माइल्ड और वेरी माइल्ड' मामलों के इलाज के लिए किया जाएगा.

इनमें से 85 स्टेशनों पर स्वास्थ्यकर्मी और ज़रूरी दवाएं भी रेलवे मुहैया कराएगा. बाकी स्टेशनों पर राज्य सरकारें डॉक्टर और दवाएं उपलब्ध कराएंगी.

इस योजना के लिए रेलवे ने 2,500 डॉक्टर और 35 हज़ार पैरा मेडिकल स्टाफ़ भी नियुक्त किए हैं.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि अभी रेड, ऑरेंज और ग्रीन ज़ोन्स की स्थिति की समीक्षा की जा रही है और आने वाले एक-दो दिनों में इस लिस्ट के बदलाव के बारे में जानकारी दे दी जाएगी.

एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया के उस बयान के बारे में पूछे जाने पर जिसमें जून में भारत में संक्रमण का 'पीक' आने की बात कही गई थी, लव अग्रवाल ने कहा कि अगर हम फ़िज़िकल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करें और हर तरह के एहतियात बरतें तो हो सकता है कि पीक को अवॉइड किया जा सके.

लव अग्रवाल ने ये भी कहा कि हमें अभी वायरस के साथ ही जीना पड़ेगा और अपनी आदतें बदलनी होंगी.

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स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां

आंकड़े कब अपडेट किए गए 5 जुलाई 2022, 1:29 pm IST

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