कोरोना पर पश्चिम बंगाल में हिंसा, ममता ने लगाया बीजेपी पर हिंसा भड़काने का आरोप

  • प्रभाकर मणि तिवारी
  • कोलकाता से बीबीसी हिंदी के लिए
ममता बनर्जी

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कोरोना संक्रमण पर उभरे विवाद की वजह से दो गुटों के बीच हुई हिंसा और आगजनी के बाद पश्चिम बंगाल के हुगली ज़िले के तेलिनीपाड़ा इलाक़े में धारा 144 लागू कर दी गई है.

इस हिंसा में कई लोग घायल हुए हैं. पुलिस ने अब तक इस मामले में 37 लोगों को गिरफ़्तार किया है. इस हिंसा और आगजनी के बाद इलाक़े में भारी तादाद में पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है. पुलिस ने हालांकि परिस्थिति नियंत्रण में होने का दावा किया है.

लेकिन इलाक़े के लोगों में भारी आतंक है. धारा 144 लागू होने और पुलिसवालों के तैनात होने के बावजूद मंगलवार दोपहर को इलाक़े में दोनों गुटों के बीच एक बार फिर हिंसा भड़क उठी.

यह विवाद कैसे शुरू हुआ, इसकी कई वजहें सामने आ रही हैं. लेकिन यह तय है कि कोरोना की वजह से ही लॉकडाउन के दौरान दो समुदाय के लोगों के बीच हिंसा भड़की.

सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले इलाक़े के वीडियो में कुछ घरों से धुआं उठता देखा जा रहा है. हालांकि पुलिस ने ऐसे वीडियो के असली होने की पुष्टि नहीं की है. इससे पहले मालदा ज़िले के हरिशचंद्रपुर इलाक़े में भी कोरोना के मुद्दे पर दो गुटों के बीच हिंसक झड़प हुई थी.

राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को जारी एक बयान में मालदा और तेलिनीपाड़ा की घटनाओं पर चिंता जताते हुए लोगों से सांप्रदायिक सद्भाव कायम रखने की अपील की है. उन्होंने पुलिस और प्रशासन से भी अमन-चैन बहाल रखने के लिए ज़रूरी कदम उठाने को कहा है.

पथराव और आगजनी की घटना

इससे पहले बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने यहां राजभवन में राज्यपाल से मुलाकात कर राज्य के विभिन्न हिस्सों में सांप्रदायिक संघर्ष की घटनाओं पर चिंता जताते हुए उनसे इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की.

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इसबीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी पर राज्य में हिंसा उकसाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि तेलिनीपाड़ा की घटना में दोषी लोगों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. दूसरी ओर, बीजेपी ने कहा है कि इस घटना से पता चलता है कि राज्य में क़ानून और व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह ढह चुकी है. इसी वजह से कोरोना संक्रमण का मामला भी सांप्रदायिक रूप ले रहा है.

आखिर इस विवाद की शुरुआत कैसे हुई? चंदननगर के पुलिस आयुक्त हुमायूं कबीर बताते हैं, "इलाक़े के कुछ लोगों को कोरोना कह कर पुकारने की वजह से रविवार को विवाद शुरू हुआ था. कहासुनी के बाद एक गुट ने दूसरे गुट के सार्वजनिक शौचालय तक जाने का रास्ता बंद कर दिया था. उसके बाद ही संघर्ष शुरू हो गया. इस दौरान दोनों गुटों ने एक-दूसरे पर पथराव किया और बम फेंके."

उन्होंने बताया कि मौके पर पहुंचे पुलिस के जवानों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया. इसके अलावा आंसू गैस के गोले छोड़े गए और रबर की गोलियों से फ़ायरिंग की गई.

कबीर के मुताबिक, "रविवार रात का विवाद ही मंगलवार को भी भड़क गया. इस दौरान भी पथराव औऱ आगजनी हुई. इस दौरान कुछ बम भी फेंके गए. अब भी हिंसा में शामिल बाक़ी लोगों की तलाश की जा रही है."

उधर, प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि ज़िले के भद्रेश्वर थाने के तहत तेलिनीपाड़ा में पांच लोगों के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद उनको क्वारंटीन सेंटर में भेज कर इलाक़े को सील कर दिया गया था. लेकिन स्थानीय लोगों ने यह कहते हुए इसका विरोध किया कि रास्ता बंद करने पर वह लोग बाहर कैसे निकलेंगे.

लेकिन एक स्थानीय पत्रकार ने दावा किया, "अल्पसंख्यक समुदाय के पांच लोगों के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद रविवार को दूसरे समुदाय के लोगों ने उस बस्ती से बाहर निकलने वाला एकमात्र रास्ता बंद कर दिया था. इसका उनलोगों ने विरोध किया. इस मुद्दे पर विवाद ने हिंसा का रूप ले लिया."

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इसके बाद सोमवार को इस मुद्दे पर राजनीति विवाद तेज़ होने लगा. बीजेपी सांसद लाकेट चटर्जी ने जब मौके पर जाने का प्रयास किया तो पुलिस ने धारा 144 लागू होने की दलील देते हुए उनको रोक दिया. लाकेट का आरोप है कि पुलिस आयुक्त हुमायूं कबीर ने भी उनसे मुलाकात नहीं की.

दो गुटों के बीच विवाद

लाकेट आरोप लगाती हैं, एक स्थानीय पार्षद के नेतृत्व में ही हमले किए गए औऱ दुकानें लूटी गईं. सोमवार शाम को गृह मंत्रालय की ओर से एक ट्वीट में कहा गया, "तेलिनीपाड़ा की घटना में पुलिस ने समुचित कार्रवाई की है. इस घटना को उकसाने या सोशल मीडिया पर फर्जी पोस्ट डाल कर विवाद भड़काने का प्रयास करने वालों के ख़िलाफ़ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी."

सोमवार को इलाक़े में तनाव बना रहा. लेकिन नए सिरे से कोई हिंसा नहीं हुई. उसके बाद मंगलवार दोपहर को दोनों गुटों के बीच हिंसा एक बार फिर भड़क उठी. दोपहर लगभग साढ़े बारह बजे से शुरू हुई हिंसा के दौरान दोनों ओर से बम फेंके गए और पथराव किया गया. कुछ घरों में आग भी लगा दी गई.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार शाम को अपनी प्रेस कांफ्रेंस में आरोप लगाया कि बीजेपी बंगाल में हिंसा भड़काने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा, "पार्टी यहां दो समुदायों के बीच खाई पैदा करने का प्रयास कर रही है. लेकिन पुलिस को हिंसा के मामलों में सख्ती से कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है. लॉकडाउन के दौरान तेलिनीपाड़ा की सांप्रदायिक हिंसा में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कड़ी कर्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख़्शा नहीं जाएगा."

तृणमूल कांग्रेस महासचिव पार्थ सचिव का कहना है, "यह दो गुटों के बीच स्थानीय झगड़ा है. लेकिन बीजेपी इसे सांप्रदायिक रूप देने का प्रयास कर रही है."

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बैरकपुर सीट से बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह

दूसरी ओर, प्रदेश बीजपी अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं, "तेलिनीपाड़ा की घटना इस बात का सबूत है कि राज्य में क़ानून और व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह ढह चुकी है. एक खास समुदाय में कोरोना संक्रमण की घटना ने सांप्रदायिक रूप ले लिया है. यह घटना तृणमूल कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति का नतीजा है."

उत्तर 24-परगना ज़िले में बैरकपुर के बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह कहते हैं, "इलाक़े में बीते तीन दिनों से इस मुद्दे पर तनाव और हिंसा जारी है. अजमेर से लौटे अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को क्वारंटीन सेंटर भेजने गई पुलिस के साथ कहासुनी हुई. उसके बाद संबंधित इलाक़े में बैरीकेड लगा दिया गया. लेकिन स्थानीय लोगों ने इसका विरोध करते हुए दूसरे समुदाय के इलाक़े में भी बैरीकेड लगाने की मांग की. इसी बात पर विवाद बढ़ा और हिंसा भड़क उठी. हिंसा के दौरान 40-42 दुकानें जला दी गईं और बम फेंके गए. कई दुकानों में तोड़-फोड़ भी की गई. लेकिन पुलिस मूक दर्शक बनी रही."

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है? लीड्स के कैटलिन से सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता? बाइसेस्टर से डेनिस मिशेल सबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
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    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है? सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं? मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है? फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है? स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं? कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है? हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए? मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए? लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा? बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए? मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है? लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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