पाकिस्तानी उच्चायोग के दो अफसरों को जासूसी के आरोप में भारत ने देश छोड़ने के लिए कहा - प्रेस रिव्यू

भारत-पाकिस्तान

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भारत ने पाकिस्तानी उच्चायोग के दो अफ़सरों को पर्सोना नॉन ग्राटा यानी अस्वीकृत व्यक्ति घोषित कर दिया है.

इसके बाद अब इन दोनों अधिकारियों को चौबीस घंटों के भीतर हर हाल में भारत छोड़ कर जाना होगा.

'हिंदुस्तान टाइम्स' अख़बार में छपी एक ख़बर के अनुसार विदेश मंत्रालय ने कहा है कि रविवार को भारतीय अधिकारियों ने जासूसी के आरोप में इन दोनों अधिकारियों को पकड़ा था.

अख़बार कहता है कि दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा है कि करोल बाग़ के नज़दीक रविवार सवेरे पाकिस्तानी उच्चायोग के तीन अधिकारियों को भारतीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारियां जुटाने के आरोपों में हिरासत में लिया गया था.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मामले में पाकिस्तान के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है. भारत का आरोप है कि पाकिस्तान उच्चायोग के ये दो अधिकारी भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के ख़िलाफ़ काम कर रहे थे.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर भारत के इस कदम की निंदा की है और कहा है कि पाक अधिकारियों पर ग़लत आरोप लगाए गए हैं. बयान में कहा गया है कि पाकिस्तानी उच्चायोग के बयान के अनुसार भारत का ये कदम दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्ते कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है.

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भारत-चीन सीमा पर चीन ने बनाई सड़क

भारत-चीन सीमा पर एक्चुअल लाइन ऑफ़ कंट्रोल के नज़दीक चीन ने एक पक्की सड़क बनाई है जिसके ज़रिए अब भारी वाहनों की आवाजाही हो सकेगी.

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अख़बार 'द इकोनॉमिक टाइम्स' के अनुसार ये पक्की सड़क भारत के गोगरा पोस्ट के नज़दीक है. सैटलाइट से मिली तस्वीरों के अनुसार इस जगह पर सोना जैसे प्राकृतिक संसाधन हैं. करीब चार किलोमीटर लंबी इस सड़क को महज़ तीन सप्ताह के भीतर बनाया गया है और ये सड़क आगे जा कर उन दूसरी सड़कों से मिलती है जो चीन ने बीते सालों में एक्चुअल लाइन ऑफ़ कंट्रोल के नज़दीक बनाए हैं.

अख़बार कहता है कि मई की शुरुआत से ही भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में तनाव जारी है. इस बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास चीन ने एक ऐसे पर्मानेंट रोड का निमाण कार्य किया है जिससे प्राकृतिक संसाधनों वाली पहाड़ियों तक उसकी पहुंच बढ़ गई है. सूत्रों के हवाले से अख़बार लिखता है कि इस इलाके में पहले ही एक कच्ची सड़क मौजूद थी लेकिन तीन सप्ताह के भीतर तेज़ी से काम करते हुए चीनी सेना ने यहां दो ब्रिज और एक पक्की सड़क बना ली है.

हालांकि ये सड़क वास्तविक नियंत्रण रेखा के नज़दीक है लेकिन इसका इस्तेमाल इन पहाड़ियां तक गाड़ियां और लोग पहुंचाने में किया जा सकता है. ये पहाड़ियां वास्तविक नियंत्रण रेखा के इस तरफ भारत में हैं. हाल में सैटलाइट से मिली तस्वीरों से ये पता चला था कि इसी सड़क पर 10 किलोमीटर पीछे चीन ने भारी हथियार और बख़्तरबंद गाड़ियां तैनात की हैं.

अख़बार कहता है कि भारत ने भी गोगरा पोस्ट पर सुरक्षा बढ़ा दी है लेकिन प्राकृतिक संसाधनों से भरी पहाड़ियों तक पहुंचने के लिए भारत की तरफ कोई पक्की सड़क नहीं है. सैटेलाइट इमेजरी एक्सपर्ट सेवानवृत्त कर्नल विनायक भट्ट ने अख़बार को बताया कि इन पहाड़ियों के नीचे सोना दबा हो सकता है. वो इस इलाक़े को 'गोल्ड माउंटेन' कहते हैं. गोगरा पोस्ट ने नज़दीक सड़क बनाने के अलावा चीन ने पेनगॉन्ग सो झी के नज़दीक बंकर भी बनाए हैं.

चीन हमेशा से इस इलाक़े पर अपना दावा करता रहा है हालांकि दोनों देशों की सेनाएं इस इलाक़े में पट्रोलिंग करती हैं. अख़बार के अनुसार बीते 26 दिनों से दोनों देशों के बीच तनाव जारी है और भारत और चीन के हज़ारों सैनिक गलवान और पेनगॉन्ग सो झील के इलाक़े में आमने सामने तैनात हैं.

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नेपाल के नए नक्शे को लेकर संसद में पेश हुआ अहम बिल

नेपाल के नए राजनीतिक नक्शे पर औपचारिक तौर पर मुहर लगाने के लिए रविवार को नेपाल की संसद में एक अहम संविधान संशोधन बिल पेश किया गया. देश की क़ानून, न्याय और संसदीय मामलों की मंत्री शिवमाया तुम्बाहान्गफेले ने बिल पेश किया.

देश के तराई वाले इलाक़ों से संबंध रखने वाली मधेसी पार्टियों ने फिलहाल इस बिल पर विरोध जताया है. मधेसियों का नेतृत्व कर रही समाजबादी पार्टी के नेता उपेन्द्र यादव ने कहा है कि इस नक्शे को कर उन्होंने अब तक कोई फ़ैसला नहीं किया है.

अख़बार 'द हिंदू' में छपी एक ख़बर के अनुसार ये देश का दूसरा संविधान संशोधन बिल है जो शेड्यूल 3 में 20 मई को जारी किए गए नेपाल के राजनीतिक नक्शे को नए नक्शे से बदलेगा. इस नए नक्शे में लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को नेपाल की सीमा का हिस्सा दिखाया गया है.

छह महीने पहले भारत ने अपना नया राजनीतिक नक़्शा जारी किया था जिसमें जम्मू और कश्मीर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख़ के रूप में दिखाया गया था. इस मैप में लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को भारत ने अपना हिस्सा बताया था.

इससे एक दिन पहले नेपाल की मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली सरकार के इस संविधान संशोधन प्रस्ताव पर अपनी सहमति दी थी. हालांकि औपचारिक तौर पर दो तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए इसे संसद में पेश करना ज़रूरी था. माना जा रहा है कि इस नक्शे पर बहस और वोटिंग होने की पूरी प्रक्रिया में एक सप्ताह तक का वक्त लग सकत है.

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देश की क़ानून, न्याय और संसदीय मामलों की मंत्री शिवमाया तुम्बाहान्गफेले

नेपाल के पूर्व विदेश मंत्री मधु रमन आचार्य ने अख़बार को बताया कि, "नए नक्शे पर सभी मुख्य पार्टियां सहमत हैं ऐसे में ये प्रस्ताव जल्द पारित हो जाएगा. सभी पार्टियां इस बात से सहम हैं कि लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख नेपाल का हिस्सा हैं और नक्शे में देश की सही सीमाओं का दिखाया जाना ज़रूरी है."

वहीं अख़बार का कहना है कि भारतीय जानकार मानते हैं कि इस बिल का असर दोनों देशों के रिश्तों पर पड़ सकता है.

नेपाल का कहना है कि महाकाली (शारदा) नदी का स्रोत दरअसल लिम्पियाधुरा ही है जो फ़िलहाल भारत के उत्तराखंड का हिस्सा है. भारत इससे इनकार करता रहा है. हाल में भारत ने लिपुलेख से होकर मानसरोवर जाने के रास्ते में एक सड़क का उद्घाटन किया था जिससे नेपाल नाराज़ है.

नक्शे पर

दुनिया भर में पुष्ट मामले

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स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां

आंकड़े कब अपडेट किए गए 1 जून 2022, 2:54 pm IST

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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता

पत्रकारों को नहीं कहा 'गिद्ध' - तुषार मेहता

सुप्रीम कोर्ट में कुछ लोगों को "वल्चर" कहने के बाद आलोचकों के निशाने पर आए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा है कि उन्हें दूर-दूर तक इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि उनके बयान को पत्रकारों से जोड़ कर देखा जाएगा.

'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' में छपी एक ख़बर के अनुसार रविवार को तुषार मेहता ने कहा कि उनका इशारा स्वयंसेवी संस्थाओं और एक्टिविस्ट 'स्पीच वॉरियर्स' की तरफ था जिन्होंने मज़दूरों की मदद करने की बजाय सिर्फ सरकार की आलोचना की.

अख़बार के साथ बातचीत में तुषार मेहता ने कहा कि उन पर नाराज़ होने की वजह ये थी उन्होंने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और कोरोना वॉरियर्स की कोशिशों को अनदेखा करते हुए अनुचित तरीके से आलोचना की.

तुषार मेहता ने कहा कि ज़मीनी स्थिति बिना समझे ये 'स्पीच वॉरियर्स' सुप्रीम कोर्ट में एक के बाद एक जनहित याचिका दायर करने लगे थे. और जब सरकार की स्टेट रिपोर्ट मिलने के बाद कोर्ट ने इस मामले में कुछ नहीं किया तो इइन लोगों ने कोर्ट की आलोचना शुरू कर दी.

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है? लीड्स के कैटलिन से सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता? बाइसेस्टर से डेनिस मिशेल सबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है? जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है? सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं? मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है? फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है? स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं? कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है? हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए? मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए? लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा? बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए? मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है? लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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