यूपी: एक साथ 25 स्कूलों में पढ़ाकर 1 करोड़ वेतन लेने का क्या है मामला

  • समीरात्मज मिश्र
  • बीबीसी हिंदी के लिए
अनामिका शुक्ला

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उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग में कथित तौर पर फ़र्जीवाड़ा करके 25 स्कूलों में एक साथ पढ़ाने वाली टीचर अनामिका शुक्ला को शनिवार को कासगंज में गिरफ़्तार कर लिया गया.

अनामिका शुक्ला को बेसिक शिक्षा विभाग ने नोटिस भेजा था लेकिन नोटिस का जवाब देने के बजाय वो इस्तीफ़ा देने गई थीं जहां उन्हें नाटकीय ढंग से गिरफ़्तार कर लिया गया.

पुलिस के मुताबिक़, बेसिक शिक्षा अधिकारी कासगंज की तहरीर पर मामला दर्ज करके शिक्षिका अनामिका शुक्ला को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है.

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि गिरफ़्तार अनामिका शुक्ला वही हैं जिन्होंने वास्तव में ये फ़र्ज़ीवाड़ा किया है या फिर फ़र्ज़ीवाड़ा करने वाली अनामिका शुक्ला कोई और हैं.

कासगंज की बेसिक शिक्षा अधिकारी अंजलि अग्रवाल ने बीबीसी को बताया, "इस मामले की जानकारी आने के बाद हमने अनामिका शुक्ला नाम की इस टीचर को नोटिस भेजा था. शनिवार को उन्होंने एक व्यक्ति के माध्यम से अपना इस्तीफ़ा भिजवाया. पूछने पर पता चला कि वो ख़ुद भी हमारे दफ़्तर के बाहर आई हुई हैं. इस बारे में पुलिस को सूचना दी गई और फिर पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया."

गिरफ़्तारी के बाद टीचर ने वहां मौजूद पत्रकारों से अपना नाम अनामिका सिंह बताया और बाद में पुलिस को कुछ और नाम बताया. हालांकि पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है.

अनामिका शुक्ला पर आरोप हैं कि उन्होंने फ़र्ज़ीवाड़ा करके इतनी जगहों पर एक साथ नौकरी करके एक साल में एक करोड़ रुपये से भी ज़्यादा तनख़्वाह ली है.

गिरफ़्तार की गईं अनामिका शुक्ला कासगंज ज़िले के कस्तूरबा विद्यालय फ़रीदपुर में विज्ञान की शिक्षिका के तौर पर क़रीब डेढ़ साल से तैनात हैं.

शुक्रवार को बेसिक शिक्षा अधिकारी अंजलि अग्रवाल ने उनके वेतन आहरण पर रोक लगाते हुए नोटिस जारी किया था. कस्तूरबा विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति कांट्रैक्ट के आधार पर होती है और हर महीने उन्हें तीस हज़ार रुपये वेतन मिलता है.

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यह मामला तब सामने आया जब बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों का डेटाबेस तैयार करना शुरू किया. इस दौरान विभाग को अनामिका शुक्ला का नाम 25 स्कूलों की लिस्ट में मिला.

इस जानकारी के बाद विभाग में हड़कंप मच गया और तुरंत इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए. अनामिका शुक्ला के नाम पर मौजूद दस्तावेज़ों पर अमेठी, आंबेडकरनगर, रायबरेली, प्रयागराज, अलीगढ़ समेत एक साथ 25 स्कूलों में टीचर नौकरी करती पाई गईं.

अनामिका शुक्ला को बीते 13 महीने में 25 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में क़रीब एक करोड़ रुपये के मानदेय का भुगतान किया गया है.

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह सारा पैसा एक ही बैंक खाते में गया है या फिर अलग-अलग खातों में भुगतान किया गया. फ़िलहाल इसकी जांच की जा रही है.

कासगंज की बीएसए अंजलि अग्रवाल बताती हैं, "तनख़्वाह तो ये इसी विद्यालय की ले रही थीं. अन्य जगहों पर इसी नाम से काम कर रही टीचर की तनख़्वाह इनके खाते में आई है या नहीं, ये जानने की कोशिश हो रही है. यह भी जांच का विषय है कि जिस अनामिका शुक्ला के दस्तावेज़ों पर 25 जगहों पर लोग नौकरी कर रहे हैं और तनख़्वाह ले रहे हैं, वो यही हैं या फिर कोई और. हमें ऑनलाइन वेरिफ़िकेशन के दौरान जो डॉक्यूमेंट्स मिले हैं उसमें और इनके आधार कार्ड में एक ही नाम है और पिता का भी नाम वही है. डॉक्यूमेंट्स में जो फ़ोटो लगी है वह बहुत धुंधली है."

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कासगंज की बीएसए अंजलि अग्रवाल

गिरफ़्तारी के बाद अनामिका शुक्ला ने पत्रकारों को बताया कि उन्हें नौकरी दिलाने में एक व्यक्ति ने मदद की थी जिसे उन्होंने एक लाख रुपये भी दिए थे.

कासगंज में स्थानीय पत्रकार अशोक शर्मा बताते हैं कि यह बात भी समझ से परे है कि यदि यह वही अनामिका शुक्ला नहीं हैं जिनका नाम इस कथित फ़र्ज़ीवाड़े में आ रहा है, तो इन्हें नोटिस का जवाब देने की बजाय इस्तीफ़ा देने की क्या ज़रूरत थी?

हालांकि बेसिक शिक्षा अधिकारी को वॉट्सऐप पर ही किसी अनामिका शुक्ला का इस्तीफ़ा शुक्रवार को रायबरेली में भी काफ़ी चर्चा बटोर रहा था लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि किसी भी स्रोत से नहीं हो सकी है.

क़यास यह भी लगाए जा रहे हैं कि यह बेसिक शिक्षा विभाग के ही कुछ लोगों की मिलीभगत से भी हो सकता है क्योंकि कोई एक टीचर अकेले दम पर इतना बड़ा फ़र्जीवाड़ा नहीं कर सकता है.

बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने मामले के संज्ञान में आने के बाद मुक़दमा दर्ज करने और दोषी पाए जाने पर सख़्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे. अब अनामिका शुक्ला की गिरफ़्तारी और उनसे पूछताछ के बाद और भी बातें सामने आएंगी.

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    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

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  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है? हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए? मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए? लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा? बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए? मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है? लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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