भारत-चीन सीमा विवादः क्या लद्दाख में घुसी चीनी सेना - राहुल के सवाल पर क्या बोली सरकार?

राहुल गांधी

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"रक्षा मंत्री अगर हाथ के निशान पर टिप्पणी कर चुके हों तो क्या वो बता सकते हैं कि क्या चीनी सेना लद्दाख में भारतीय सीमा में घुस चुकी है?"

ये ताज़ातरीन सवाल कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से मंगलवार की सुबह पूछा है.

इससे पहले सोमवार को दोनों नेताओं में ट्विटर पर 'शायराना जंग' हुई थी.

दरअसल राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह के भाषण के एक हिस्से पर तंज़ किया था. सात जून को बिहार के बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करने के दौरान उन्होंने कहा था, "भारत की रक्षा नीति को वैश्विक स्वीकृति मिली है. पूरा विश्व इस बात को मानता है कि अमरीका और इसराइल के बाद सिर्फ़ भारत ही ऐसा देश जो अपनी सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम है."

राहुल गांधी ने शाह के इस बयान को रीट्वीट करते हुए लिखा था:

सब को मालूम है 'सीमा' की हक़ीक़त लेकिन,

दिल के ख़ुश रखने को, 'शाह-यद' ये ख़्याल अच्छा है.

राहुल गांधी के इस ट्वीट के बाद रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने जवाबी ट्वीट किया:

'हाथ' में दर्द हो तो दवा कीजै,

'हाथ' ही जब दर्द हो तो क्या कीजै.

इसके बाद राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया, "कांग्रेस के कई नेता सवाल पूछ रहे हैं कि भारत-चीन सीमा पर क्या हो रहा है? मैं देश की जनता को आश्वस्त करना चाहूँगा कि संसद में इस बारे में विस्तार से जानकारी दूँगा."

एक अन्य ट्वीट में उन्होने कहा, "सीमा को लेकर मिलिट्री और डिप्लोमैटिक स्तर पर चीन के साथ भारत की बातचीत जारी है. छह जून को मिलिट्री के स्तर पर वार्ता हुई है. हम किसी भी देश के मान, सम्मान एवं स्वाभिमान को न चोट पहुँचाते हैं और न ही हम चोट बर्दाश्त करेंगे."

हालांकि रक्षामंत्री ने ये नहीं बताया कि वो संसद में इस बारे में कब जवाब देंगे.

इस पूरे मसले पर भारत में सरकार और विपक्ष के बीच ज़ुबानी जंग बढ़ती जा रही है. विपक्ष सरकार पर तथ्य छुपाने का आरोप लगा रहा है और सरकार कह रही है वो संसद में जवाब देगी.

इधर, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा है कि दोनों देश इस बात पर सहमत हुए हैं कि आपसी मतभेदों को विवाद बढ़ने की वजह न बनने दिया जाए.

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चीन और भारत के बीच मौजूदा सीमा विवाद में अब तक के घटनाक्रमों पर एक नज़र डालते हैं:

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मई महीने में भारत-चीन सीमा पर अलग-अलग दोनों देशों के सैनिकों के बीच संघर्ष की ख़बरें आईं. पहले उत्तरी सिक्किम के नाकू ला सेक्टर में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प हुई. उसके बाद ख़बर आई कि लद्दाख़ में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर दोनों देशों के सैनिक पाँच मई से ही आमने-सामने हैं.

भारत और चीन के बीच पैंगॉन्ग झील और गलवान नदी इलाक़े में सीमा का कोई निर्धारण नहीं है. बेहद ठंडे इलाक़े में ये झील लद्दाख क्षेत्र में 4,350 मीटर की ऊंचाई पर है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, इस क्षेत्र में दोनों देशों के जवान डेरा डाले हुए हैं और दोनों एक दूसरे पर क्षेत्र में घुसपैठ का आरोप लगा रहे हैं. भारत और चीन बेहद लंबी सीमा साझा करते हैं और दोनों ही पक्ष सीमा के कई क्षेत्रों पर अपना-अपना दावा करते रहे हैं.

ख़बरों के मुताबिक़, दोनों देशों के बीच वर्तमान टकराव पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी और पैंगॉन्ग झील में हुई है जिसने स्थानीय लोगों के भविष्य को लेकर चिंता में डाल दिया है.

इस बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर दोनों देश अपने सैनिकों की मौजूदगी बढ़ा रहे हैं. अक्साई चीन में स्थिति गालवन घाटी को लेकर दोनों देशों के बीच इस तनाव की शुरुआत हुई थी. भारत का कहना है कि गालवन घाटी के किनारे चीनी सेना के कुछ टेंट देखे गए हैं. इसके बाद भारत ने भी वहाँ फ़ौज की तैनाती बढ़ी दी है. वहीं, चीन का आरोप है कि भारत गालवन घाटी के पास रक्षा संबंधी ग़ैर-क़ानूनी निर्माण कर रहा है.

पिछले दिनों सोशल मीडिया में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कथित हिंसा से जुड़ी कुछ तस्वीरें और वीडियो शेयर हुए. हालांकि भारतीय सेना ने इन्हें प्रामाणिक नहीं माना था.

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सरकार क्या कह रही है?

भारत की ओर से सबसे पहले गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि नरेंद्र मोदी सरकार भारत की सीमाओं को लेकर कोई समझौता नहीं करेगी.

एक टीवी चैनल को एक जून को दिए एक इंटरव्यू में शाह ने कहा था, "एलएसी पर तनातनी को कोई सार्वभौम राष्ट्र हल्के में नहीं ले सकता. कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर हमारी बातचीत जारी है. लेकिन मैं एक बात स्पष्ट कर दूं कि नरेंद्र मोदी सरकार हमारी सीमाओं को लेकर कोई समझौता नहीं करेगी और हम इसके लिए अडिग खड़े रहेंगे."

हालांकि ये पूछे जाने पर कि क्या चीनी सैनिक भारतीय सीमा में घुस आए हैं, शाह ने कोई जवाब नहीं दिया.

इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दो जून को एक इंटरव्यू में कहा कि 'अच्छी ख़ासी संख्या में' चीन के सैनिक सीमा पर मौजूद हैं. हालांकि बाद में उन्होंने इससे इनकार किया था.

इस सबके बीच छह जून को भारत और चीन में लेफ़्टिनेंट जनरल स्तर पर बातचीत हुई. सैन्य स्तर की वार्ता के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि दोनों देशों ने एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हुए विवादों के निबटारे पर ज़ोर दिया है.

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विपक्ष क्या कह रहा है?

भारत-चीन विवाद के मुद्दे पर विपक्षी पार्टियां सत्ताधारी बीजेपी से लगातार सवाल कर रही हैं और सरकार पर असली स्थिति छिपाने का आरोप लगा रही हैं.

राहुल गांधी समेत कांग्रेस के कई नेता केंद्र सरकार से पूछ चुके हैं कि लद्दाख में क्या हो रहा है.

एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदउद्दीन ओवैसी ने कहा है कि केंद्र सरकार को देश को बताना चाहिए कि चीन के साथ क्या बातचीत हो रही है. ओवैसी ने कहा, "सरकार शर्मिंदा क्यों महसूस कर रही है? वो हमें बताए कि क्या चीनी सेना लद्दाख में भारतीय सीमा में घुस आई है."

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चीन ने क्या कहा है?

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा है कि सीमा विवाद को सुलझाने के लिए राजनयिक और सैन्‍य स्‍तर पर बातचीत को बल दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि दोनों देश आपसी मतभेदों को विवाद बढ़ने का कारण नहीं बनने देंगे.

उन्होंने कहा, "विवादित सीमा क्षेत्रों में अभी स्थिति पूरी तरह से नियंत्रित और स्थिर है. भारत और चीन के बीच बातचीत के ज़रिए ऐसे सीमा विवाद को हल करने की क्षमता और इच्छाशक्ति दोनों हैं."

चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि चीन और भारत ने आपसी बातचीत से डोकलाम विवाद जैसे हालात पैदा होने से बचा लिया लेकिन ये विवाद इतनी जल्दी ख़त्म नहीं होगा.

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