कोरोना वायरस: महिलाओं को दशकों पीछे कैसे धकेल रही है ये महामारी?

  • अनंत प्रकाश
  • बीबीसी संवाददाता
महिलाएं

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इंदिरा गांधी को पसंद करने वाली 19 वर्षीय मौली को जब उनकी पहली नौकरी मिली तो उनके लिए ये किसी जादुई एहसास से कम नहीं था.

अपनी रोल मॉडल इंदिरा की तरह वे समाज में खुलकर अपने विचार रख रही थीं.

मौली की मानें तो उस नौकरी ने उन्हें ये एहसास कराया कि वो कोई रबड़ की गुड़िया नहीं हैं, बल्कि एक जीती-जागती इंसान थीं.

इस नौकरी ने मौली को एक ख़ास दुनिया दी जिसमें वह बीते तीस सालों से जी रही थीं.

लेकिन कोरोना वायरस के चलते उनकी ये दुनिया कुछ महीनों में ही उजड़ गई.

उन्हें उस नौकरी से हाथ धोना पड़ा जो "उनकी शख़्सियत का हस्ताक्षर" थी.

इस महामारी में मौली जैसे करोड़ों लोगों की नौकरियों चली गई हैं.

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वो लोग जिन्हें लॉकडाउन ने रातोंरात बेरोज़गार बना दिया

हर स्तर पर बेरोज़गारी

कोरोना वायरस की वजह से लगाए गए लॉकडाउन के चलते भारत में संगठित क्षेत्रों और असंगठित क्षेत्रों की नौकरियों में भारी कमी आई है.

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग द इंडियन इकोनॉमी का हालिया सर्वे बताता है कि भारत में कम से कम 12 से 13 करोड़ लोगों की नौकरियां मई महीने के शुरुआत में ही जा चुकी हैं.

नौकरियां जाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है. क्योंकि लॉकडाउन ख़त्म होने के बाद भी वायरस के तेज़ प्रसार की वजह से व्यवसायिक संस्थानों में काम शुरू होता नहीं दिख रहा है.

ऐसे में कोरोना वायरस दुनिया को किस हाल में छोड़ेगा, ये फिलहाल बताना मुश्किल है.

लेकिन इस संकट का नकारात्मक असर भारत के कामगार तबके की लैंगिक समानता पर पड़ना शुरू हो चुका है.

कई शोधार्थी बता चुके हैं कि काम करने वाली महिलाओं की संख्या में भारी कमी आ सकती है.

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संयुक्त राष्ट्र ने भी अपनी हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि ये महामारी महिलाओं के समाज में बराबरी हासिल करने के दशकों पुराने संघर्ष पर पानी फेर सकती है.

रिपोर्ट कहती है कि इस महामारी के दौरान महिलाओं के अनपेड वर्क यानी बिना पैसे वाले काम में बेपनाह बढ़ोतरी हुई है.

रिपोर्ट बताती हैं, "कई देशों में सबसे ज़्यादा कटौती विशेषत: सेवा प्रधान क्षेत्रों जैसे रिटेल, हॉस्पिटेलिटी, पर्यटन आदि से जुड़ी नौकरियों में देखी गई है. इन क्षेत्रों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व ज़्यादा है."

"लेकिन विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में स्थिति इससे भी ख़राब है. वहां सत्तर फीसदी महिलाएं असंगठित क्षेत्रों में काम करती हैं जहां उनके पास नौकरियां बचाए रखने के विकल्प बेहद कम हैं."

महिलाओं के लिए आगे की राह मुश्किल?

भारत में गाँवों से आने वाली महिलाएं दिल्ली, मुंबई, लुधियाना और बंगलुरु जैसे शहरों में प्रतिदिन या मासिक तनख़्वाहों पर काम करती हैं.

अक्सर इन महिलाओं और नौकरी प्रदाता के बीच किसी तरह का क़ानूनी क़रार या पंजीकरण नहीं होता है.

ये महिलाएं उत्पादों की पैकेजिंग और कपड़ो की सिलाई - बुनाई जैसे काम करती हैं.

इसके साथ ही महिलाओं का एक बड़ा वर्ग स्कूलों से लेकर अस्पतालों और होटलों में सफाई कर्मचारियों, नर्सों, वॉर्ड गर्ल आदि के रूप में भी काम करता है.

ये वो वर्ग है जिसकी बचत क्षमता बेहद कम होती है.

ऐसे में लॉकडाउन लगने के बाद कुछ दिन तक इस वर्ग की महिलाएं शहरों में गुज़ारा करती रहीं.

लेकिन आख़िरकार उन्हें अपने गाँव की ओर रुख करना पड़ा.

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बात सरहद पार

दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

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इस वर्ग की नौकरियां जाने का परिणाम अब तक शहरों से गाँवों की ओर होते पलायन में दिख रहा है.

लेकिन इसी बीच धीमे धीमे उन नौकरियों को ख़त्म किए जाने की ख़बरें भी आ गईं जो कि संगठित क्षेत्रों के तहत आती हैं.

इनमें आईटी सेक्टर में, स्टार्टअप, मीडिया, एयरलाइंस, पर्यटन और एक्सपोर्ट इंडस्ट्री शामिल है.

ये वो क्षेत्र हैं जहां महिलाओं का प्रतिनिधित्व पुरुषों की अपेक्षा ज़्यादा है.

इस संकट का असर भी महिलाओं पर ज़्यादा पड़ता हुआ दिख रहा है.

हाल ही में किए गए एक सर्वे में सामने आया है कि कोविड लॉकडाउन के दौरान भारी संख्या में महिलाओं की नौकरियां गई हैं.

मौली मानती हैं कि इस संकट के चलते उन महिलाओं का करियर संकट में पड़ सकता है जो कि अपने जीवन में एक ख़ास मोड़ पर हैं.

अपना उदाहरण देते हुए मौली कहती हैं, "मैं इस समय जीवन के एक ऐसे मोड़ पर हूँ जहां से वापसी मुश्किल नज़र आती है. मैंने अपने तीस साल लंबे करियर में कई उतार चढ़ाव देखे हैं. सामाजिक दबाव से लेकर वर्क प्लेस पर असुरक्षित माहौल भी झेला है लेकिन शायद इस त्रासदी से उबरना मुमकिन नहीं होगा."

अलग उम्र अलग समस्याएं

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भारत में महिलाओं को काम करने के लिए तमाम सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

ऐसी ही चुनौतियों से दो चार हो चुकीं मौली बताती हैं, "वो अविवाहित महिलाएं जो छोटे शहरों में काम करती हैं और उनकी उम्र 22 से 25 साल के बीच है, उन पर घरवालों की ओर से शादी करने का दबाव बनाया जा सकता है, वहीं शादी शुदा महिलाएं परिवार को आगे बढ़ाने जैसी माँगों का सामना कर सकती हैं. कई महिलाओं के लिए आगामी कुछ महीनों के बाद नौकरी में वापसी करना बेहद मुश्किल हो सकता है."

ऐसी ही उम्र में एक बार पहले नौकरी छोड़ने को मजबूर हो चुकीं मौली कहती हैं, "चाहें कोविड 19 हो या कोई दंगा...संकट चाहें जिस स्वरूप में आए, वह महिलाओं के पैरों में पड़ी बेड़ियों को कसता चला जाता है."

"मुझे याद है कि जब 1992 के हिंदू-मुस्लिम दंगे हुए तो मैं पूरे जोशो-ख़रोश के साथ उन्हें कवर कर रही थी. मैंने अपनी आँखों के सामने गोलियां चलते हुए देखी हैं. लेकिन मैं अपना काम करने में सक्षम थी. इसके बावजूद सुरक्षा की दुहाई देकर मुझे रिपोर्टिंग नहीं करने दी गई. यही नहीं, आख़िरकार मुझे नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया. वो पहला मौका था जब मैंने नौकरी छोड़ी. इसके बाद मुझे दोबारा नौकरी हासिल करने के लिए 16 साल तक इंतज़ार करना पड़ा. और आज दूसरा मौका है जब एक बार फिर मुझे नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया गया है."

"लेकिन इन दोनों ही मौकों में एक चीज़ समान है कि उस समय भी पुरुषों को नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया गया था और आज भी महिलाओं की तरह पुरुषों को नौकरी छोड़ने के लिए बाध्य नहीं किया गया."

"ऐसे में मैं ये सवाल पूछना चाहती हूँ कि क्या इस समय जिन पुरुषों की नौकरियां जा रही हैं, उन्हें भी नई नौकरी हासिल करने के लिए महिलाओं जितना कठिन संघर्ष करना पड़ेगा. क्या उन्हें भी माँ बनने, बच्चे पालने और बड़े-बूढ़ों की मदद के नाम पर अपने करियर से समझौता करने के लिए मजबूर किया जाएगा."

मौली की नाराज़गी की झलक अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की उस रिपोर्ट में मिलती है जो कि ये बताती है कि भारत में महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा 9.6 गुना ज़्यादा काम करती हैं. लेकिन इस काम के बदले में उन्हें किसी तरह का मानदेय या श्रेय नहीं मिलता है.

नौकरी जाने के बाद घर परिवार से जुड़ी ज़िम्मेदारियां महिलाओं के लिए नई नौकरियां तलाश करने की संभावनाएं कम कर देती हैं.

उम्मीद की किरण

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लैंगिक समानता की पक्षधर और राजनीति शास्त्र की वैज्ञानिक स्वर्णा राजगोपालन मानती हैं कि आने वाले दिन महिलाओं के लिए काफ़ी मुश्किल हो सकते हैं.

न्यू यॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट में स्वर्णा कहती हैं, "महिलाओं को नौकरियों की संख्या में कमी होने की वजह से नौकरियां हासिल करने में दिक्कतें हो सकती हैं. कम से कम कुछ समय के लिए ऐसा ज़रूर हो सकता है. मैं इस बात को लेकर बेहद चिंतित हूँ. हम अभी भी पुरुषों को हमारे परिवारों का मुख्य कमाने वाले के रूप में देखते हैं. ऐसे में अगर हमें लोगों को नौकरियों से निकालने से जुड़े फैसले लेने पड़ें तो महिलाओं को अपनी नौकरियों से हाथ धोने पड़ेंगे. इससे फर्क नहीं पड़ता कि उन्हें नौकरियों की कितनी ज़रूरत है या वे कितनी मेहनत से काम करती हैं."

लेकिन कहीं कहीं पर उम्मीद अभी भी बाकि है.

दशकों से महिलाओं को उनकी पारिवारिक संपत्ति में अधिकार दिलाने में महिलाओं की मदद कर रहीं संस्था मक़ाम से जुड़ीं सोमा केपी वर्तमान समस्या को लेकर चिंतित नज़र आती हैं.

लेकिन वे ये भी मानती हैं कि जो लड़कियां एक बार इतने लंबे संघर्ष के बाद सामाजिक बेड़ियों से आज़ाद हो चुकी हैं, वे इतनी आसानी से वापस आसानी से सामाजिक बेड़ियों की शिकार नहीं होंगी.

सोमा कहती हैं, "हमें लगातार रिपोर्ट्स मिल रही हैं कि लॉकडाउन के दौरान महिलाओं ने डोमेस्टिक वॉयलेंस के साथ - साथ पुलिस की ओर से भी वो काम करने के लिए प्रताड़ना झेली है जिसके बदले में उन्हें कुछ नहीं मिलता. लॉकडाउन के दौरान वे आधी रात को खेत जाकर चारा लेकर आती थीं ताकि गाय-भैंस दूध दे सकें. लेकिन ये ऐसा काम है जिसके बदले में उन्हें कोई शुक्रिया तक नहीं कहता. मगर वे लगातार करती रहीं."

"मगर अब ये सरकार और व्यवसायिक घरानों पर निर्भर करेगा कि वे कोरोना वायरस के बाद की दुनिया में महिलाओं को किस तरह समावेशित करने के प्रयास करते हैं."

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है? लीड्स के कैटलिन से सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता? बाइसेस्टर से डेनिस मिशेल सबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है? जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है? सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं? मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है? फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है? स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं? कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है? हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए? मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए? लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा? बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए? मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है? लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

End of मैं और मेरा परिवार

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