कोरोना संकट: घरों में काम करने वाली महिलाएं कब लौटेंगी अपने काम पर?

  • गुरप्रीत सैनी
  • बीबीसी संवाददाता
मेड ने पूछा, क्या मालिक हमें दिखाएंगे कोविड रिपोर्ट?

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देश लॉकडाउन से बाहर आ रहा है, लेकिन हाउसिंग सोसाइटी के दरवाज़े घरों में झाड़ू-पोंछा, बर्तन धोने वाली मेड के लिए अब भी बंद ही हैं. इससे दूसरों के घरों में काम करने वाली हज़ारों महिलाओं के सामने रोज़ी-रोटी का संकट बढ़ता जा रहा है.

कई हाउसिंग सोसाइटी ने शर्त रखी है कि वो काम पर लौटना चाहती हैं तो कोविड-19 निगेटिव सर्टिफिकेट दिखाएं. घरेलू कामगारों की कई यूनियन अब मेड रखने वाले लोगों से भी ऐसी ही मांग कर रही हैं.

कामगार संगठन इस तरह की सोच को ग़लत मानते हैं कि सिर्फ़ ग़रीब ही कोरोना वायरस फैला सकते हैं.

राष्ट्रीय घरेलू कामगार संगठन की राष्ट्रीय संयोजक क्रिस्ट्री मेरी बताती हैं कि कुछ सोसाइटी में टेस्ट रिपोर्ट लाने के लिए बोला जा रहा है. उसके बाद भी तभी काम की अनुमति देंगे जब मेड उनके साथ उनके घर में ही रहे. आने-जाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं.

"24 घंटे किसी के घर में रहना मुश्किल है, क्योंकि उनके भी परिवार हैं. एक से ज़्यादा घरों में काम करने वाली मेड को भी मना कर रहे हैं. 60 साल से ज़्यादा उम्र के घरेलू कामगारों को तो बिल्कुल इजाज़त नहीं दे रहे हैं."

संगठनों का कहना है कि कोरोना कैरियर तो कोई भी हो सकता है. मेड थर्मल स्क्रीनिंग, लगातार हाथ धोने, दूरी बनाए रखने जैसे सुरक्षा उपायों के लिए तैयार हैं. लेकिन ज़िम्मेदारी तो दोनों पक्षों की होनी चाहिए, सिर्फ़ मेड की नहीं.

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असमंजस में घरेलू मेड

40 वर्षीय आनंदी मुंबई के अंधेरी स्थिति एक सोसाइटी में काम करती थीं. आठ जून को जब अनलॉक हुआ तो उन्हें उम्मीद जगी कि शायद उन्हें भी काम पर बुला लिया जाएगा.

बात करने के लिए गईं तो वॉचमैन ने बाहर ही रोक दिया. आनंदी ने सोसाइटी के सेकेट्री से फोन पर बात की. सेकेट्री ने साफ़ कहा कि "अगर तुम्हारी वजह से मैडम लोग को कोरोना हो गया तो हम इसकी ज़िम्मेदारी नहीं लेंगे." उनके कहने का मतलब साफ़ था, कि कुछ हुआ तो इसकी ज़िम्मेदारी आनंदी के सर आएगी.

आनंदी जिस घर में काम करती हैं, वो भी चाहते हैं कि वो काम पर लौट आएं. लेकिन आनंदी से कहा गया है कि उन्हें अपनी फोटो और आईडी सोसाइटी वालों के पास जमा करानी होगी. अब आनंदी असमंजस में हैं कि वो क्या करें.

आनंदी घर में अकेली कमाने वाली हैं. बताती हैं कि दो बच्चे हैं, पति कुछ देता नहीं. 65 साल से ज़्यादा उम्र की सास हैं, वो काम करती थीं. लेकिन अब उम्र की वजह से उन्हें बुलाया नहीं जा रहा.

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क्या कहते हैं हाउसिंग सोसाइटी वाले

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बात सरहद पार

दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

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आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक़ भारत के घरों में काम करने वाले हेल्परों की संख्या 40 लाख से ज़्यादा है. अनाधिकारिक तौर पर ये संख्या पांच करोड़ के आसपास बताई जाती है. घरों में काम करने वाले लोगों में दो तिहाई महिलाएं हैं.

घरेलू मेड और इन लोगों को काम देने वाले परिवार एक दूसरे पर निर्भर हैं. आर्थिक रूप से बेहद कमज़ोर लोगों के लिए ये आजीविका का एक ज़रिया है जबकि मध्यम वर्ग थोड़े पैसे ख़र्च करके आराम और सुविधा के साथ घर परिवार चलाता है.

कुछ लोग चाहते भी हैं कि उनकी मेड अब काम पर लौटें. पूर्वी दिल्ली के नवनीति अपार्टमेंट में रहने वाले अनूप ने अपनी मेड अर्शी को कुछ दिन पहले काम पर बुला भी लिया था. इसके लिए सोसाइटी प्रबंधन ने अनूप से लिखित में मांगा था कि अर्शी मास्क लगाकर आएगी, कहीं बैठेगी नहीं, वगैहरा-वगैहरा. लेकिन आठ दिन बाद ही प्रस्ताव पास कर फिर से सोसाइटी में मेड के आने पर रोक लगा दी गई.

बीबीसी ने नवनीति अपार्टमेंट के मैनेजर विष्णु शर्मा से संपर्क किया. उन्होंने कहा कि सोसाइटी में एक सर्वे कराया गया था, जिसमें 80 प्रतिशत लोगों ने कहा घरेलू हेल्पर पर फ़िलहाल रोक रहे. वहीं सिर्फ 10% लोगों ने ही उनके आने का समर्थन किया.

विष्णु शर्मा ने कहा कि ज़्यादातर घरेलू हेल्पर सोसाइटी के सामने वाले इलाक़े - मंडावली और अल्ला कॉलोनी से आते हैं. "वहां कोरोना के बहुत ज़्यादा मामले आए हैं. इसलिए हमने रोक लगा रखी है. हालात सुधरेंगे तो फिर बुला लेंगे." वो बताते हैं हालांकि जो घरेलू हेल्पर 24 घंटे घरों में ही रहते हैं, उनपर मनाही नहीं है.

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"मेड से कोरोना फैला तो करेंगे एफ़आईआर"

दिल्ली के न्यू राजिंदर नगर के ए, बी, सी, डी ब्लॉक आरडब्ल्यूए के उपाध्यक्ष अशोक मलहोत्रा सीधे आरोप लगाते हैं और कहते हैं कि "दिल्ली में जो कोरोना फैल रहा है, वो सब इन्हीं से फैल रहा है. मुंबई में भी झोपड़-पट्टी वालों में फैला है, पॉश इलाक़ों में कहां फैला है."

वो कहते हैं, "ओल्ड राजिंदर नगर के 53 और 54 ब्लॉक में मेड से लगभग 60-70 लोगों को कोरोना हो गया. न्यू रजिंदर नगर में भी मेड से 15-20 केस हो गए हैं. अभी मेड, ड्राइवर बुलाना असुरक्षित है. इनकी एंट्री नहीं होनी चाहिए."

हालांकि मलहोत्रा कहते हैं कि उनकी सोसाइटी में मेड ना बुलाने को लेकर किसी पर दबाव नहीं है. "जो बुलाना चाहे बुला सकता है, लेकिन अगर मेड से सोसाइटी में कोरोना फैला तो एफ़आईआर कर दी जाएगी."

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उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद में ज़िला मेजिस्ट्रेट ने मई में ही मेड, ड्राइवर समेत घरेलू कामगारों को काम पर आने की अनुमति दे दी थी. प्रशासन ने कहा था कि अगर मेड चाहती है और उनसे काम कराने वाले परिवार भी चाहते हैं तो मेड काम के लिए आ सकती है और आरडब्ल्यूए सिर्फ़ उन्हें सलाह दे सकता है, रोक नहीं सकता.

इसके बावजूद ग़ाज़ियाबाद की अधिकांश रिहाइशी सोसायटी के आरडब्ल्यूए में मेड को आने नहीं दे रहे हैं.

तमाम आरडब्ल्यूए और हाउसिंग सोसाइटी प्रबंधन का कहना है कि मेड उनके यहां कोरोना ले आएंगी, "क्योंकि वो जिन बस्तियों से आती हैं, वहां कोरोना होने की आशंका ज़्यादा है. साफ़-सफ़ाई कम है और सोशल डिस्टेंसिंग नहीं है."

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"हमें भी तो उनसे कोरोना हो सकता है - मेड"

मुंबई के चार बंगला इलाक़े से आने वाली नीता कहती हैं कि जिन घरों में वो काम करने जाती हैं, कोरोना तो उन लोगों से नीता को भी हो सकता है.

वो कहती हैं, बाहर तो वो लोग भी जाते हैं. हमें भी डर है कि हमें उनसे कोरोना हो जाएगा और ये भी सही है कि हमारी वजह से उनको भी हो सकता है. ये तो किसी को किसी से भी हो सकता है, फिर हमारे साथ ही भेदभाव क्यों?

नीता बताती हैं, "बहुत लोगों से मैं सुन रही हूं, वो काम करने आएंगे तो सबसे पहले बाथरूम जाएं. वहीं सबसे पहले नहाएं और अपने साफ़ कपड़े वहीं रखे. जिन्हें नहाकर बदलें. फिर गलव्स, मास्क लगाकर सेफ्टी से काम-काज शुरू करें."

वो कहती हैं कि कई घरों में हम सालों से काम कर रहे हैं. वो ये कहते हुए भावुक हो जाती हैं कि क्या उन्हें नहीं पता, हम साफ-सुथरे हैं, रोज़ नहाकर उनके घर जाते हैं और जाते ही सबसे पहले साबुन से हाथ धोते हैं.

घरेलू कामगारों के लिए काम करने वाले संगठन इस तरह की बातों को भेदभावपूर्ण मानते हैं.

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राष्ट्रीय घरेलू कामगार संगठन की राष्ट्रीय संयोजक क्रिस्ट्री मेरी कहती हैं कि कई मेड को उन लोगों से भी कोरोना हुआ है, जहां वो काम करने जाती हैं. कुछ घरेलू कामगारों की ऐसे जान भी गई है. फिर भी वो काम पर जाने को तैयार हैं. वो हर तरह के सुरक्षा उपाय करने को तैयार हैं, फिर भी हाउसिंग सोसाइटी के दरवाज़ें उनके लिए खोले नहीं जा रहे.

क्रिस्टी मेरी बताती हैं कि शहरी इलाक़ों में 30 प्रतिशत घरेलू कामगारों के काम छिनने का ख़तरा है.

वो बताती हैं कि काम पर ना लौट पाने की वजह से घरेलू कामगार मुश्किल आर्थिक स्थितियों में हैं. उनके पास किराया देने के पैसे नहीं है, घर में राशन नहीं है, बच्चों की फीस भरने के लिए पैसे नहीं है.

पश्चिमी मुंबई के जोगेश्वरी इलाक़े में रहने वाली अमीना कहती हैं कि वो तीन घरों में काम करती थीं. उनका काम रुक गया. दो महीने से पगार नहीं मिली. सिर्फ़ एक घर से पगार मिली. उसी से जैसे-तैसे घर चला रही हैं. घर में तीन बच्चे हैं और पति का तीन साल पहले इंतकाल हो गया था.

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वो बताती हैं कि उनके साथ की कई महिलाओं को तो कहीं से भी पगार नहीं मिली. उनकी एक सहेली अंधेरी की ही एक सोसाइटी में काम करती थी. काम बंद हुआ. पगार रुकी. बस्ती में बंटने वाला राशन भी नहीं मिला. जिसके बाद उनकी सहेली ने अपने बच्चों के साथ फांसी लगा ली.

हालांकि कई मेड को उम्मीद है कि उन्हें जल्दी ही काम पर बुलाया जाएगा. ग़ाज़ियाबाद की एक सोसायटी में काम करने वाली कमलेश कहती हैं कि 10-15 दिन और देखेंगे, "नहीं तो अपने घर गांव वापस लौटने का सोचेंगे. कबतक ऐसे चलता रहेगा."

सवाल और जवाब

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    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

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    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

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    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
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    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

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    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है? स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं? कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है? हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए? मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए? लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

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  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा? बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए? मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है? लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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