संदिग्ध कोरोना मरीज़ की सड़क किनारे मदद की गुहार लगाते मौत

  • दीप्ति बथिनि
  • बीबीसी तेलुगू
संदिग्ध कोरोना मरीज़ की सड़क किनारे मौत

"कृपया मेरी मदद करें. मुझे अस्पताल ले चलें. मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं."

ये आख़िरी शब्द 60 वर्षीय श्रीनिवास बाबू के हैं.

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रह है जिसमें श्रीनिवास सड़क किनारे गिरे हुए हैं और मदद की गुहार लगा रहे हैं. एक औरत उनसे कई सवाल पूछते नज़र आ रही है.

तेलंगाना के मेडक ज़िले में यह घटना बुधवार को हुई जो हैदराबाद से 70 किलोमीटर दूर है.

स्थानीय लोगों द्वारा सूचित करने के बाद मौक़े पर पहुंची पुलिस ने कहा, "हमने 108 पर कॉल करके एंबुलेंस को बुलाया. एंबुलेंस ने आने में एक घंटे का समय लिया. इस जगह पर पहुंचने के बाद एंबुलेंस स्टाफ़ ने कहा कि उनके पास पीपीई किट नहीं है और मरीज़ को कोविड-19 के लक्षण हैं इसलिए दूसरी एंबुलेंस बुलाई जाए. जब तक दूसरी एंबुलेंस आई तब तक बहुत देर हो चुकी थी."

जांच में पता चला कि घटनास्थल पर पहुंची एंबुलेंस में दो पीपीई किट थीं लेकिन मरीज़ को कोविड होने के डर के कारण स्टाफ़ में डर था और वहां मरीज़ के लिए पीपीई किट भी नहीं थी.

इमेज स्रोत, UGC VIDEO

'देरी के कारण जान गई'

मेडक के मेडिकल एंड हेल्थ ऑफ़िसर डॉक्टर वेंकटेश्वर राव ने बीबीसी न्यूज़ तेलुगू से कहा कि उन्होंने श्रीनिवास बाबू की पत्नी से बात की है और वो हैदराबाद में ईस्ट मेरेडपल्ली के रहने वाले हैं.

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
पॉडकास्ट
बात सरहद पार

दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

बात सरहद पार

समाप्त

डॉक्टर वेंकटेश्वर राव ने कहा, "ऐसा लगता है कि श्रीनिवास सरकारी बस से हैदराबाद वापस लौट रहे थे जब उन्होंने बेचैनी की शिकायत की. उन्होंने ख़ुद को नज़दीकी अस्पताल छोड़ने के लिए कहा. चेगुंटा में बस ने उनको प्राथमिक चिकित्सालय के पास उतार दिया. स्थानीय लोगों ने पुलिस को बताया तो पुलिस ने एंबुलेंस को बुलाया. उससे पहले प्राथमिक चिकित्सालय में नर्स ने उन्हें इंजेक्शन और दवाइयां दी थीं. एंबुलेंस को उन्हें ज़िला अस्पताल छोड़ना था लेकिन अस्पताल छोड़ने में देरी के कारण उनकी जान चली गई."

तेलंगाना में जीवीके ईएमआरआई के साथ मिलकर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत 108 एंबुलेंस सेवा चलाई जाती है.

डॉक्टर वेंकटेश्वर राव कहते हैं, "सिर्फ़ मेडक ज़िले में आठ 108 एंबुलेंस हैं. हमने दो एंबुलेंस कोविड-19 के लिए रखी हैं. बाकी की छह रेगुलर इमरजेंसी के लिए हैं. यह जीवीके ईएमआरआई की ज़िम्मेदार है कि वो 108 के स्टाफ़ को पीपीई किट मुहैया कराए. इसके अलावा हमने उन्हें 100 किट दी हैं."

"108 की ड्यूटी है कि वो प्राथमिक उपचार मुहैया कराए और क़ीमती वक़्त ख़राब न करते हुए मरीज़ को अस्पताल ले जाए. मुझे नहीं मालूम की एंबुलेंस के पास पीपीई किट क्यों नहीं थी. मरीज़ को ले जाने से मना करने वाले 108 के ड्राइवर और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन को मैंने बर्ख़ास्त करने के निर्देश दिए हैं."

इमेज कैप्शन,

श्रीनिवास बाबू की पत्नी

'कल्याणी सबकुछ ख़त्म हो गया'

बीबीसी न्यूज़ तेलुगू ने एंबुलेंस के ड्राइवर और टेक्नीशियन से बात की तो उनका कहना था कि उनके पास दो पीपीई किट थीं.

उन्होंने कहा, "हम घटनास्थल पर 30 मिनट में पहुंच गए थे. जब हम पहुंचे तो वहां पुलिस, प्राथमिक चिकित्सालय की नर्स और दूसरा स्टाफ़ था. हमने नर्स से पूछा तो उन्होंने कहा कि मरीज़ कोविड संदिग्ध लग रहा है. कोई भी उसके पास नहीं जा रहा था. उनके पास मास्क और ग्लव्स थे. हम भी डरे हुए थे क्योंकि हमने अभी तक एक भी कोविड मामला नहीं देखा था. हमारे पास दो पीपीई थी. अगर हम उन्हें ले जाते तो हमारे पास एंबुलेंस सेनिटाइज़ करने के लिए सेनिटाइज़र भी नहीं था. इसलिए हमने अपने वरिष्ठ अफ़सरों से बात की और उन्हें कोविड वाली एंबुलेंस भेजने के लिए कहा और हम चले गए."

श्रीनिवास बाबू के अंतिम संस्कार के बाद हैदराबाद में उनका परिवार सदमे से बाहर आने की कोशिश कर रहा है. उनके पीछे उनकी पत्नी एक बेटी और एक बेटा रह गए हैं. 26 वर्षीय श्वेता मानसिक रूप से कमज़ोर है.

उनकी पत्नी कल्याणी दोपहर को आए फ़ोन कॉल को याद करते हुए कहती हैं, "कल्याणी सबकुछ ख़त्म हो गया है. मुझे लगता है कि मेरे पास सिर्फ़ पांच मिनट बचे हैं. एंबुलेंस नहीं आएगी. तुम मुझसे बहुत दूर हो. मेरे पिता और बच्चों का ध्यान रखना. अब सबकुछ ख़त्म हो गया है."

यह कहते हुए कल्याणी रो देती हैं और सवाल करती हैं, "मेरी बेटी बिना अपने पिता के नहीं सोती है. यह ऐसी अवस्था में है जहां इसको पता नहीं है कि उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं. अब मैं अकेले इसका कैसे ख्याल रखूंगी?"

श्रीनिवास बाबू के बेटे भानु चंद कहते हैं, "वीडियो देखने के बाद मुझे किसे दोष देना चाहिए? ऐसा लगता है कि अब किसी में कोई नैतिक मूल्य नहीं बचा है. जब महामारी के बीच एक एंबुलेंस बुलाई जाती है तो उसके पास पीपीई नहीं होता. क्या यह मज़ाक़ है. सभी 'तैयारियां' आख़िर कहां गईं?"

इमेज कैप्शन,

श्रीनिवास बाबू की बेटी और पत्नी

हमने जीवीके ईएमआरआई के सीओओ पी. ब्रह्मानंद से बात की, जिनके अंतर्गत 108 एंबुलेंस आती हैं.

उन्होंने कहा, "राज्य में 351 एंबुलेंस हैं जिनमें से 92 को कोविड-19 के ख़ास सेवा में लगाया हुआ है. इनमें से 30 ग्रेटर हैदराबाद और बाकी 62 अन्य ज़िलों में हैं."

"इन एंबुलेसों में 10 पीपीई और सेनिटाइज़र दिए गए हैं. बाकी की एंबुलेंस रेग्युलर इमरजेंसी के लिए हैं जिनमें चार पीपीई हैं."

उन्होंने कहा, "हमें नहीं पता कि स्टाफ़ ने पीपीई किट क्यों नहीं इस्तेमाल की? सांस से संबंधित सभी दिक़्क़तें कोविड हों ये ज़रूरी नहीं. कोविड मरीज़ समझकर मरीज़ को शिफ़्ट नहीं करना ग़लती है. हमने अपने स्टाफ़ को पीपीई के इस्तेमाल और उसे डिस्पोज़ करने को लेकर ट्रेनिंग दी है. हमने ड्राइवर और टेक्नीशियन के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है और उनका हैदराबाद ट्रांसफ़र कर दिया है."

हालांकि, राज्य का कहना है कि उसके पास पर्याप्त पीपीई किट हैं. हाईकोर्ट में सार्वजनिक स्वास्थ्य के निदेशक ने रिपोर्ट फ़ाइल की थी जिसमें सूचित किया गया था कि 2 जून तक उनके पास 7 लाख पीपीई किट थीं.

हालांकि, कोर्ट ने कहा था कि कितना स्टॉक है यह जानना 'प्रासंगिक' नहीं है.

हालांकि, कोविड-19 के टेस्ट के लिए श्रीनिवास से कोई सैंपल नहीं लिया गया था. अधिकारियों का कहना है कि वो मृत लोगों के कोरोना टेस्ट नहीं कर रहे हैं.

हालांकि तेलंगाना हाईकोर्ट ने मृत लोगों के कोविड-19 टेस्ट करने का निर्देश दिया है.

राज्य सरकार का कहना है कि इस प्रकार का हाईकोर्ट का आदेश लागू करवा पाना कठिन है.

राज्य सरकार का कहना है कि रोज़ाना राज्य में विभिन्न कारणों से 900 से 1000 लोग मरते हैं, यह संभव नहीं है कि सभी का टेस्ट किया जा सके.

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख़ किया है.

श्रीनिवास की मौत कोविड-19 के कारण हुई या किसी और सांस की बीमारी की वजह से यह पता नहीं चल पाया है.

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है? लीड्स के कैटलिन से सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता? बाइसेस्टर से डेनिस मिशेल सबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है? जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है? सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं? मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

End of कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है? फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है? स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं? कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
End of मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है? हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए? मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए? लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

End of अपने आप को और दूसरों को बचाना

मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा? बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए? मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है? लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

End of मैं और मेरा परिवार

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)