कोरोना अपडेट: पश्चिम बंगाल में आरोप-प्रत्यारोप के बीच फैलता संक्रमण

  • प्रभाकर मणि तिवारी
  • बीबीसी हिंदी के लिए, कोलकाता से
ममता बनर्जी

इमेज स्रोत, PTI

पश्चिम बंगाल में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है.

ममता बनर्जी सरकार के दावों के बावजूद कोरोना के मामले में राजधानी कोलकाता लगभग रोज़ाना नए रिकॉर्ड बना रहा है.

चिराग़ तले अंधेरा की कहावत को चरितार्थ करते हुए महानगर में मरीज़ों की लगातार बढ़ती तादाद ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है. फ़िज़िकल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं होने की शिकायतें भी बढ़ रही हैं.

अब स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी चेतावनी दी है कि कोलकाता दिल्ली की तरह एक ऐसे कोरोना बम पर बैठा है, जिसमें कभी भी विस्फोट हो सकता है.

इस बीच, कोलकाता में कोरोना संक्रमण से मरे लोगों के शवों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मुद्दे पर बढ़े विवाद के बाद सरकार ने कहा है कि अब सिर्फ़ उन मरीज़ों की मौत के बाद ही कोरोना की जाँच की जाएगी जो इसके लक्षण के साथ अस्पतालों में भर्ती हुए थे.

सोमवार शाम को ही अस्पतालों को यह निर्देश दे दिया गया है. पहले तमाम मरीज़ों की मौत के बाद उनकी कोरोना जाँच की जाती थी.

पश्चिम बंगाल में कोरोना संक्रमितों का आँकड़ा 11 हज़ार के पार (11,494) पहुँच गया है. मरने वालों की तादाद भी 485 तक पहुंच गई है और इसमें लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है.

इमेज स्रोत, Getty Images

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
पॉडकास्ट
बात सरहद पार

दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

बात सरहद पार

समाप्त

संक्रमण पर क़ाबू पाने में लाचार सरकार

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहली जून से लॉकडाउन में तमाम रियायतें दी थीं. उसके बाद ही ख़ासकर कोलकाता में संक्रमितों की तादाद तेज़ी से बढ़ रही है. बीते दो सप्ताह से रोज़ाना औसतन 400 मरीज़ सामने आ रहे हैं.

सोमवार शाम को स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आँकड़ों के मुताबिक़, 24 घंटों के दौरान 407 नए मरीज़ सामने आए हैं.

राज्य में कुल संक्रमितों में से एक-तिहाई से अधिक अकेले कोलकाता में ही हैं. संक्रमितों के मुक़ाबले यहाँ मृतकों की तादाद भले कम है लेकिन संक्रमण के मामले बढ़ रहे है.

तमाम सरकारी और ग़ैर-सरकारी दफ़्तर खुलने के बावजूद परिवहन के साधनों की कमी के चलते फ़िज़िकल डिस्टेंसिंग की सरेआम धज्जियां उड़ रही हैं.

कोलकाता में काम करने वाले ज़्यादातर लोग उपनगरों से आते हैं लेकिन कामकाजी लोगों की लाइफ़लाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनें और मेट्रो सेवाएँ बंद हने की वजह से उनको भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है.

बसों में उमड़ती भीड़ की वजह से हज़ारों लोगों ने दफ़्तर आने-जाने के लिए साइकिल का सहारा लिया है. लोग 40-50 किलोमीटर तक साइकिल चला कर दफ़्तर पहुँच रहे हैं.

बावजूद इसके मरीज़ों की तादाद दिन दूनी रात चौगुनी गति से बढ़ रही है. इसने राज्य सरकार को भी भारी चिंता में डाल दिया है.

संक्रमण का पता लगा कर उस पर क़ाबू पाने के लिए कोलकाता नगर निगम ने महानगर की बहुमंज़िली इमारतों में रैंडम टेस्टिंग शुरू की है लेकिन हालात में सुधार नहीं नज़र आ रहा है. पूरे राज्य के साथ कोलकाता में भी कंटेनमेंट ज़ोन की तादाद तेज़ी से बढ़ी है.

इमेज स्रोत, Getty Images

मुख्यमंत्री की अपील बेअसर

अब जितने नए मामले सामने आ रहे हैं उनमें से एक तिहाई कोलकाता के ही होते हैं. बीते दो दिनों के दौरान कोलकाता में 434 नए मरीज़ सामने आए हैं. बीते 24 घंटे के दौरान राज्य में जिन 10 लोगों की मौत हुई उनमें से छह कोलकाता के ही थे.

महानगर में 24 घंटे के दौरान पॉज़िटिविटी दर यानी जाँच के मुक़ाबले पॉज़िटिव पाए जाने वालों की दर 11.28 प्रतिशत रही है जो राज्य के औसत (3.32 प्रतिशत) से तीन गुना से भी अधिक है.

कोलकाता नगर निगम के प्रशासकीय बोर्ड के प्रमुख और राज्य के शहरी विकास मंत्री फ़रहाद हकीम बताते हैं, "शुरुआती दौर में उत्तर कोलकाता से ज़्यादा मामले सामने आ रहे थे लेकिन अब पॉश समझे जाने वाले दक्षिण कोलकाता में भी संक्रमितों की तादाद तेज़ी से बढ़ रही है. यह चिंता का विषय है."

प्रशासन की दलील है कि आबादी का घनत्व ज़्यादा होने की वजह से ही महानगर से संक्रमण के अधिक मामले सामने आ रहे हैं.

संक्रमण में आई तेज़ी के बाद अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी लोगों से बिना ख़ास ज़रूरत के घरों से नहीं निकलने और फ़िज़िकल डिस्टेंसिंग के नियमों की सख़्ती से पालन करने की अपील की है. हालाँकि उनकी यह अपील अब तक बेअसर ही साबित हुई है.

इमेज स्रोत, Getty Images

बेधड़क घूमते लोग, बढ़ते कंटेनमेंट ज़ोन

कोलकाता के प्रमुख बाज़ारों और शापिंग मॉल्स में उमड़ने वाली भीड़ से साफ़ है कि आम लोगों में शायद कोरोना का आतंक ही ख़त्म हो गया है. वहीं, नगर विकास मंत्री का कहना है कि बाज़ारों से ही संक्रमण फैल रहा है इसलिए लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए.

प्रशासन की ओर से महानगर के कई इलाक़ों में लाउडस्पीकरों के ज़रिए जागरुकता अभियान भी चलाया जा रहा है. लेकिन आँकड़ों से स्पष्ट है कि इस अभियान का कोई असर नहीं हो रहा है.

पहले पूरे राज्य में 844 कंटेनमेंट ज़ोन थे जो बीते 10 दिनों में बढ़ कर 1806 तक पहुँच गए हैं. इसी तरह कोलकाता में कंटेनमेंट ज़ोन्स की तादाद लगभग तीन गुना बढ़ कर 351 से 1009 हो गई है.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कहती हैं, "हम जागरुकता से ही संक्रमण पर अंकुश लगा सकते हैं. लोगों को पहले से ज़्यादा ऐहतियात बरतते हुए भीड़-भाड़ से बचना होगा."

मुख्यमंत्री की दलील है कि यहाँ संक्रमितों की तादाद के मुक़ाबले स्वस्थ होने वाले लोगों की तादाद पहली बार बढ़ी है. इससे उम्मीद की नई किरण नज़र आई है.

15 जून की शाम तक चौबीस घंटे के दौरान 407 नए मरीज़ सामने आए हैं. स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि राज्य में संक्रमितों के स्वस्थ होने की दर 47.70 प्रतिशत है. लेकिन राज्य के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कोलकाता एक ऐसे कोरोना बम पर बैठा है जो कभी भी फट सकता है.

इमेज स्रोत, Hindustan Times via Getty Images

बिखर सकता है स्वास्थ्य तंत्र

ऐसे में दूसरे महानगरों की तरह यहाँ भी स्वास्थ्य का आधारभूत ढांचा भरभरा सकता है और यह महानगर दिल्ली को भी पीछे छोड़ सकता है. वैसे पहले भी राज्य में स्वास्थ्य का आधारभूत ढांचा ज़्यादा मज़बूत नहीं रहा है.

हर साल भारी तादाद में इलाज के लिए लोग दक्षिण भारतीय शहरों का रुख़ करते रहे हैं. लेकिन कोरोना और लॉकडाउन की वजह से अब ऐसे लोग बाहर नहीं जा रहे हैं.

एक निजी अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टर सुरेश रामासुब्बन कहते हैं, "पूरे महानगर में ऑक्सीजन की सुविधा वाले बेड की तादाद महज़ कुछ हज़ार हैं. अगर संक्रमितों की तादाद इसी दर से बढ़ती रही तो एक सप्ताह बाद हमारे पास कोई बेड ख़ाली नहीं होगा."

एक अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर. श्रावणी पाल कहती हैं, "महानगर के निजी अस्पतालों में भी कोविड-19 के मरीज़ों की तादाद तेज़ी से बढ़ रही है. यह एक अभूतपूर्व स्थिति है. डर की वजह से ऐसे अस्पतालों के कर्मचारी भी काम नहीं करना चाहते. अभी तो उनको समझा-बुझा कर काम कराया जा रहा है. लेकिन ऐसा आख़िर कब तक चलेगा? बाहरी राज्यों की नर्सों के सामूहिक इस्तीफे़ ने परिस्थिति को और जटिल बना दिया है."

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है? लीड्स के कैटलिन से सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता? बाइसेस्टर से डेनिस मिशेल सबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है? जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है? सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं? मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

End of कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है? फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है? स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं? कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
End of मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है? हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए? मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए? लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

End of अपने आप को और दूसरों को बचाना

मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा? बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए? मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है? लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

End of मैं और मेरा परिवार

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)