भारत-चीन सीमा पर तनाव: गलवान घाटी में मारे गए भारतीय कर्नल और जवान कौन हैं?

गणेश हांसदा

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गणेश हांसदा

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में (15/16 जून की रात) चीन और भारत की सेना के आमने-सामने के संघर्ष में भारतीय सेना के एक अधिकारी समेत 20 सैनिकों की मौत हो गई.

भारत और चीन की विवादित सीमा पर 45 साल बाद पहली बार किसी की जान गई है.

मारे जाने वालों में सेना के एक कर्नल हैं और 19 जवान हैं.

संघर्ष में मारे गए जवानों में से एक झारखंड पूर्वी सिंहभूम ज़िले के बहरागोड़ा प्रखंड के बांसदा निवासी गणेश हांसदा भी थे.

मंगलवार देर रात सेना के अधिकारियों ने उनके परिवार को फ़ोन कर यह दुखद ख़बर दी.

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी ने उनकी मौत पर दुख ज़ाहिर किया.

मारे गए जवानों में बिहार के सहरसा ज़िले के सत्तरकतैया ब्लॉक के आरण गांव के कुंदन कुमार भी हैं. उनके पिता किसान हैं.

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कुंदन कुमार

कुंदन कुमार की पत्नी बेबी देवी को सेना की तरफ से फ़ोन पर इस घटना की सूचना मिली.

कुंदन कुमार के दो बेटे हैं हैं. बड़ा बेटा रोशन छह साल का है और छोटा बेटा राणा चार साल का.

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गणेश राम कुंजाम

सेना संघर्ष में मारे गए जवानों में छत्तीसगढ़ के कांकेर के आदिवासी समुदाय से आने वाले गणेश राम कुंजाम भी हैं.

वे साल 2011 में सेना में भर्ती हुए थे. क़रीब एक महीने पहले ही उनकी नियुक्ति भारत-चीन सीमा पर हुई थी. बाक़ी कई परिवारों की तरह कुंजाम के परिवार को भी फ़ोन पर यह दुखद ख़बर मिली.

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कर्नल संतोष बाबू

भारत और चीनी सेनाओं के बीच झड़प में जिन भारतीय सैनिकों की मौत हुई है, उनमें से एक कर्नल थे. वे तेलंगाना के सूर्यापेट ज़िले के रहने वाले थे.

कर्नल संतोष बाबू चीनी सीमा पर पिछले डेढ़ साल से तैनात थे.

कर्नल संतोष बाबू 16-बिहार रेजिमेंट में थे. उनकी पत्नी और दो बेटे हैं.

कर्नल संतोष की मां मंजुला ने बताया कि उन्हें भारतीय सेना ने सोमवार दोपहर को यह सूचना दी थी जबकि कर्नल की पत्नी दिल्ली में रहती हैं.

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कुंदन ओझा

कौन हैं जवान

मारे गए जवानों में से एक जवान झारखंड के साहिबगंज ज़िले के डिहारी गांव के रहने वाले कुंदन ओझा हैं.

वो बिहार रेजिमेंट में थे. उनके मारे जाने की ख़बर सेना ने उनके परिजनों को फ़ोन कॉल करके दी.

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने जवान कुंदन ओझा की मौत पर दुख जताते हुए ट्वीट किया है.

तमिलनाडु के जवान पलनी (40 वर्षीय) भी इस संघर्ष में मारे गए हैं.

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जवान पलनी

उनके भाई ने बीबीसी तमिल को इसकी पुष्टि की. पलनी बीते 22 सालों से भारतीय सेना में थे.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई.के. पलनीसामी ने ट्वीट करके राज्य के जवान की मौत पर दुख जताया है और उनके गांव की जानकारी दी है.

पलनी के भाई भी सेना में

पलनी के भाई इतायाक्कनी भी सेना में हैं और राजस्थान में तैनात हैं. उन्होंने बीबीसी तमिल सेवा के साईराम से बात की और कहा कि वो अपने घर के लिए रवाना हो रहे हैं.

उन्होंने कहा, "बीती रात सेना के कर्मचारियों ने मुझे फ़ोन करके बताया कि लद्दाख में झड़प के दौरान मेरे भाई की मौत हो गई है. उनके अंतिम संस्कार के लिए मैं राजस्थान से अपने घर जा रहा हूं."

इतायाक्कनी ने बताया कि उनके भाई से आख़िरी बार उनकी बात 10 दिन पहले हुई थी.

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गलवान घाटी, जहां भारत और चीन के सैनिकों की हुई हिंसक झड़प

उन्होंने कहा, "उन्होंने मुझे बताया था कि वो शहर से लद्दाख सीमा की ओर जा रहे हैं जहां पर नेटवर्क की समस्या होगी. तो उन्होंने मुझे कहा कि अगली फ़ोन कॉल में वक़्त लगेगा."

इतायाक्कनी ने कहा कि उनके सेना में भर्ती होने की वजह उनके भाई ही थे.

उन्होंने कहा, "यह मेरे परिवार के लिए बहुत बड़ा नुक़सान है. मैं कल्पना नहीं कर सकता हूं कि मेरी भाभी और दो बच्चे इस समय किन परिस्थितियों से गुज़र रहे होंगे."

वहीं, चीनी पक्ष की ओर से किसी के मारे जाने या घायल होने के बारे में चीनी सरकार या सेना ने अभी तक कोई जानकारी नहीं दी है.

'शहादत का मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए'

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सिपाही राजेश ओरांग

वहीं, पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले के सिपाही राजेश ओरांग इस झड़प में मारे गए हैं.

कोलकाता से स्थानीय पत्रकार प्रभाकर मणि तिवारी बताते हैं कि मंगलवार को राजेश ओरांग के परिवार को फ़ोन आया कि उनका बेटा देश के लिए 'शहीद' हो गया है. यह सुनते ही पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले के मोहम्मदबाज़ार बेलगड़िया गांव के सुभाष ओरांग के घर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा.

राजेश ओरांग के पिता सुभाष कहते हैं, "जवानों की शहादत का बदला लेने के बाद मैं पुत्रशोक से कुछ हद तक उबर सकूंगा."

गांव के बाक़ी लोगों की तरह सुभाष की आजीविका भी खेती से ही चलती है. लेकिन उनके पुत्र राजेश का सपना कुछ और ही था. वो नहीं चाहते थे कि पिता की तरह खेती से ही जीवन-यापन करें.

राजेश साल 2015 में सेना में शामिल हुए थे और तब से ही वो लगातार जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में तैनात थे.

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राजेश का परिवार

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समाप्त

बीते सप्ताह राजेश ने अपने चचेरे भाई अभिजीत को फ़ोन पर कहा था कि वो अग्रिम मोर्चे पर जा रहे हैं. मेरे माता-पिता का ख़याल रखना.

अभिजीत बताते हैं, "राजेश ने कहा था कि मैं ऊपर जा रहा हूं. वो पहाड़ के ऊपर जाने की बात कर रहा था. लेकिन तब किसे पता था कि वह सीधे स्वर्ग जाने की बात कर रहा है. वह मेरा भाई ही नहीं, गहरा दोस्त भी था."

राजेश अपने परिवार ही नहीं, पूरे गांव में सेना में शामिल होने वाले पहले युवक थे.

राजेश के पिता सुभाष कहते हैं, "बेटे की मौत का ग़म तो है. लेकिन इस बात पर गर्व है कि वो देश की हिफ़ाज़त के लिए शहीद हुआ है. अब सरकार को इस शहादत का मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए. इसी से शहीदों के परिजनों को शांति मिलेगी और मैं पुत्रशोक से कुछ हद तक उबर सकूंगा."

लद्दाख में पश्चिम बंगाल के ही विपुल राय के एक शख़्स की मौत हुई है. वो अलीपुरदुआर ज़िले के थे.

उनके माता-पिता और भाई भाटीबाड़ी गांव में रहते हैं. लेकिन राय अपनी पत्नी और पुत्री के साथ दिल्ली में रहते थे. अभी पिछले महीने ही उनकी पोस्टिंग लद्दाख में हुई थी.

शोक की इस घड़ी में पूरा गांव कल से ही राजेश के घर जुटा है. अब इलाक़े के तमाम लोगों को अपने इस वीर सपूत की घर वापसी का बेसब्री से इंतज़ार है. राजेश का पार्थिव शरीर बुधवार देर शाम तक गांव में पहुंचने की उम्मीद है.

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