विजयवाड़ा कोविड अस्पताल में आग लगी, 11 की मौत

  • बीबीसी तेलुगू टीम
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विजयवाड़ा

आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में एक कोविड केयर सेंटर बनाए गए होटल में आग लगने से 11 लोगों की मौत हो गई है और 20 लोग जख़्मी हो गए हैं.

एक निजी अस्पताल रमेश हॉस्पिटल ने बिस्तर की कमी होने की वजह स्वर्ण पैलेस नाम के इस होटल को लीज़ पर लिया हुआ था.

पुलिस के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें सुबह ही कॉल आई थी. उनका कहना है कि इस दुर्घटना के वक्त 43 मरीज़ और स्टाफ़ घटनास्थल पर मौजूद थे. उन्हें इस बात की आशंका है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है.

राज्य सरकार ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं. जख़्मी मरीज़ों को इलाज के लिए अलग-अलग कई अस्पतालों में भेजा गया है.

पिछले 24 घंटों में राज्य में 10,008 कोरोना पॉजिटिव के मामले सामने आए हैं. अब राज्य भर में कोरोना के मरीज़ों की कुल संख्या दो लाख से ज़्यादा हो चुकी है.

बीबीसी तेलुगू सेवा ने ज़िला अग्निशमन अधिकारी एम श्रीनिवास से करीब 11 बजे बात की थी. उन्होंने बताया कि होटल में आग बुझाने को लेकर लगाए गए उपकरण काम नहीं कर रहे थे.

उन्होंने बताया, "आग सबसे पहले होटल के रिसेप्शन पर लगी. इलेक्ट्रिक फ़ेल होने की वजह से आग लगनी शुरू हुई. सीढ़ियों के बगल में ही रिसेप्शन था. इससे धुँआ ऊपर की ओर गया. यह इमारत ग्राउंड के अलावा पांच मंजिल तक है. अब तक 11 लोगों की मौत हुई हैं और 18 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है."

वो आगे बताते हैं, "ज़्यादातर मौतें धुँए की वजह से दम घुटने के कारण हुई. फ़ायर सिस्टम वहाँ लगा हुआ था लेकिन वो काम नहीं कर रहा था. उसे स्वचालित मोड में होना चाहिए था लेकिन वो साइलेंट मोड में था. "

"इमरजेंसी अलार्म और उपकरण तुरंत काम नहीं किए. अगर ये स्वचालित मोड में होता तो तुरंत हल्के तापमान के बढ़ने के साथ ही काम करता. ऐसा लगता है कि किसी को यह पता भी नहीं था कि कैसे उसका इस्तेमाल करना है. सैनिटाइजर और लकड़ी के फर्श होने की वजह से आग और तेजी से भड़की."

बीबीसी तेलुगू सेवा ने फ़ायर सेफ्टी के डायरेक्टर जनरल एहसान रज़ा से क़रीब एक बजे बात की. उन्होंने बताया कि अस्पताल ने होटल के परिसर में अस्पताल शुरू करने से पहले फ़ायर डिपार्टमेंट से क्लियरेंस नहीं ले रखा था.

प्रबंधन के ख़िलाफ़ गै़र- इरादतन हत्या का मामला

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आंध्र प्रदेश: कोविड केयर सेंटर बनाए गए होटल में भीषण आग

उन्होंने बताया, "होटल के पास फ़ायर डिपार्टमेंट का एनओसी नहीं था. होटल लीज पर एक अस्पताल को दिया गया था. उन्हें विभाग से नो ऑब्जेक्शन लेना ज़रूरी था क्योंकि परिसर अब किसी दूसरे के अधिग्रहण में था. वो भी नहीं लिया गया. सिर्फ़ एक ही रास्ता निकलने का दिख रहा था और वो आग से होकर गुजरता था. कोई दूसरा रास्ता लोगों के पास बचने का दिख ही नहीं रहा था."

स्वर्ण पैलेस होटल और रमेश हॉस्पिटल के मैनेजमेंट के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है. विजयवाड़ा के तहसीलदार ने शिकायत दर्ज कराई है. वहीं इस घटना को मुख्य तौर पर देख रहे हैं.

अपनी शिकायत में उन्होंने कहा है, "ऐसा लगता है कि होटल और हॉस्पिटल का प्रबंधन बिजली संबंधी कमियों से वाक़िफ था. चूंकि इसे रिपेयर करवाने का खर्च ज़्यादा था, इसलिए इसे रिपेयर नहीं करवाया गया."

प्रबंधन के ख़िलाफ़ गै़र-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है. राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए 50 लाख के मुआवजे़ की घोषणा की है. मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल पर पहुँच कर मामले का जायज़ा लिया है.

बीबीसी तेलुगू सेवा ने अस्पताल और होटल प्रबंधन के लोगों से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनसे कोई जवाब नहीं मिला है.

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