भगवान राम पर असम के प्रोफ़ेसर ने की टिप्पणी, एबीवीपी के छात्र ने करवाई एफ़आईआर

  • दिलीप कुमार शर्मा
  • गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
Prof. Sen

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असम विश्वविद्यालय के अंग्रेज़ी विभाग के एक सहायक प्रोफ़ेसर अनिन्द्य सेन के ख़िलाफ़ सिलचर सदर थाने में एक मामला दर्ज किया गया है.

प्रोफ़ेसर सेन पर यह मामला कथित तौर पर भगवान राम के ख़िलाफ़ अपमानजनक टिप्पणी करने तथा धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए किया गया है.

दरअसल, 5 अगस्त को प्रोफ़ेसर सेन ने अपने फ़ेसबुक पर 'भगवान राम के उनकी पत्नी सीता को त्यागने' के संदर्भ में एक पोस्ट लिखी थी.

उन्होंने अपनी चार लाइन की फ़ेसबुक पोस्ट में पहली पंक्ति में लिखा था कि 'यह सब नाटक एक आदमी के लिए है जिसने अपनी पत्नी को छोड़ दिया था.'

प्रोफ़ेसर ने पोस्ट की अंतिम लाइन में भगवान राम का नाम लिखा था. उनकी इस फ़ेसबुक पोस्ट पर कई लोगों ने आपत्तिजनक मैसेज भी भेजे थे.

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एफ़आईआर की कॉपी में कहा गया है कि प्रोफ़ेसर सेन ने सोशल मीडिया पर भगवान रामचंद्र के ख़िलाफ़ अपमानसूचक टिप्पणी कर हिन्दू धर्म के लोगों की भावनाओं को आहत किया है.

इसके साथ ही एफ़आईआर में प्रोफ़ेसर सेन पर सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री जैसे 'संवैधानिक पदों की अवमानना' का आरोप भी लगाया है.

पुलिस ने प्रोफ़ेसर सेन के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा-295ए, 294 और 501 के तहत एक मामला दर्ज कर लिया है.

प्रोफ़ेसर सेन के ख़िलाफ़ एफआरआई दर्ज करवाने वाले रोहित चंदा का कहना है कि 5 अगस्त को जब पूरा देश शांतिपूर्ण ढंग से राम मंदिर का भूमि-पूजन समारोह मना रहा था, उस दिन प्रोफ़ेसर ने सांप्रदायिक अशांति को भड़काने और धार्मिक दंगे के लिए समाज को उकसाने के इरादे से सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली थी.

सिलचर के गुरु चरण कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई कर रहे 18 साल के रोहित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सिलचर यूनिट के एजिटेशन इंचार्ज हैं.

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उन्होंने इस घटना पर बीबीसी से कहा, "प्रोफ़ेसर सेन काफ़ी समय से इस तरह की पोस्ट लिखते आ रहे थे. सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले एक प्रोफ़ेसर का ऐसा करना ठीक नहीं है. उन्होंने सरकार के ख़िलाफ़ भी टिप्पणियां की है. हो सकता है उन्हें शासन करने वाली पार्टी अच्छी नहीं लगती हो, लेकिन किसी धर्म के बारे में अपमानसूचक बातें करना या फिर उसे नीचा दिखाना कैसे सही हो सकता है. प्रोफ़ेसर सेन ने श्री राम के जीवन को अपमानित संदर्भ में लिखा और हिन्दू धर्म को मानने वालों की भावनाओं को आहत किया."

एक जानकारी साझा करते हुए रोहित ने बताया कि बजरंग दल के कार्यकर्ता स्नेहांग्शु चक्रवर्ती ने भी प्रोफे़सर सेन के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करवाई है.

कछार ज़िले के पुलिस अधीक्षक भंवर लाल मीणा ने प्रोफ़ेसर सेन के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज होने की पुष्टी करते हुए कहा, "प्रोफ़ेसर सेन की फ़ेसबुक पर डाली गई एक पोस्ट से जुड़ा मामला है जिसमें धार्मिक भावनाओं को आहत करने की शिकायत मिली है. हम मामले की जाँच कर रहें हैं."

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इस मामले में प्रोफ़ेसर सेन पर जो धाराएं लगाई गई है उनमें धारा-295ए संज्ञेय तथा ग़ैर-ज़मानती और ग़ैर-कंपाउंडेबल अपराध के लिए है जिसमें गिरफ़्तार व्यक्ति को गिरफ़्तारी के तुरंत बाद ज़मानत पर रिहा करने का अधिकार नहीं होता है.

इस मामले में ज़मानत देने या देने से इनकार करना न्यायालय के विवेक पर निर्भर करता है.

ऐसे में प्रोफ़ेसर सेन इस ग़ैर-ज़मानती धारा को लेकर फ़िलहाल क़ानूनी सलाह ले रहे हैं.

अपने ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर पर बात करते हुए प्रोफ़ेसर सेन ने बीबीसी से कहा, "रामायण महाकाव्य के कई अलग-अलग संस्करण में राम के अपनी पत्नी को त्यागने की बात का उल्लेख है. राम के बारे में विभिन्न बिंदुओं पर जो आलोचना है, वो बहुत पुरानी है. मैंने कुछ नया नहीं लिखा. मेरा इरादा कभी भी किसी हिन्दू भगवान या देवी का अपमान करने या किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का नहीं रहा."

उनका कहना है कि 'इस मामले को इतना बड़ा बनाया गया क्योंकि एक ग्रुप है जो मेरे पीछे पड़ा हुआ है और उन्हीं लोगों ने ग़ैर-ज़मानती धारा-295ए के तहत यह एफ़आईआर कराई है.'

प्रोफ़ेसर सेन के ख़िलाफ़ यह मामला 8 अगस्त को दर्ज किया गया था, लेकिन अब तक पुलिस ने उनसे संपर्क नहीं किया है.

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