जोधपुरः 11 पाकिस्तानी हिन्दुओं की मौत बनी गुत्थी

  • नारायण बारेठ
  • बीबीसी हिंदी के लिए
जोधपुर

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राजस्थान में जोधपुर पुलिस एक ही परिवार के उन 11 पाकिस्तानी हिन्दुओं की मौत की गुत्थी सुलझाने का प्रयास कर रही है जो रविवार को खेत में मृत पाए गए थे. मौके के हालात से पुलिस को लग रहा है कि यह ख़ुदकुशी का मामला हो सकता है.

घटना के शिकार आदिवासी भील समुदाय के थे. वे पांच साल पहले ही शरण की गुहार लेकर भारत आए थे. इन पाकिस्तानी हिन्दुओं के संगठन ने किसी निष्पक्ष एजेंसी से जाँच की मांग की है. इस वाक़ये के लिए विपक्षी बीजेपी ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है.

जोधपुर में सोमवार को पोस्टमॉर्टम के बाद एक साथ 11 लोगों की मय्यतें उठीं तो माहौल गमज़दा हो गया. वहां बड़ी तादाद में पाकिस्तान से आए हिन्दू मौजूद थे.

हादसे के शिकार 75 वर्षीय बुद्धाराम भील परिवार के साथ जोधपुर के देचू थाना क्षेत्र में एक खेत किराए पर लेकर कृषि कार्य करते थे. अब इस परिवार में केवल राम जीवित बचे हैं. पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है. वो घटना के वक्त खेत में बने घर से दूर सोए हुए थे.

केवल राम के मुताबिक 'घर में लोग रोज़मर्रा का काम निबटा कर सो गए और वो खेत की जानवरों से रखवाली करने दूर चला गया. अगले दिन उसे घर पहुंचने पर घटना का पता चला.

पुलिस को मौके से कीटनाशक, इंजेक्शन की सिरिंज, इंजेक्शन लगाने के लिए काम में ली जाने वाली रुई मिली है. पुलिस को लगता है यह ख़ुदकुशी का मामला है क्योंकि परिवार की एक महिला प्रशिक्षित नर्स का काम करती थी.

परिवार में चल रहा था विवाद

मौके का जायजा लेकर लौटे जोधपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक राहुल बारहट ने बीबीसी से कहा 'प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला लगता है. वहां इंजेक्शन लगाने वाली सामग्री मिली है. मृत सभी लोगों के शरीर पर इंजेक्शन लगाने के निशान भी दिखाई दिए हैं.'

पुलिस अधीक्षक बारहट कहते हैं, "हम सभी पहलुओं को ध्यान में रख कर जाँच कर रहे हैं. पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और विधि विज्ञान विशेषज्ञों की राय का इंतज़ार कर रही है.

पुलिस के अनुसार परिवार में घरेलू विवाद चल रहा था. यह विवाद पुलिस तक भी पहुंचा और पिछले कई माह से दोनों पक्ष एक दूसरे के ख़िलाफ़ शिकायत लेकर पुलिस थाने तक पहुंचते रहे हैं.

"परिवार के जीवित बचे केवल राम और उसके भाई रवि की अपने ससुराल पक्ष से नहीं बन रही थी. केवल राम की पत्नी धांधली देवी और रवि की पत्नी तारीफ़ा मौसेरी बहनें हैं और वे भी पाकिस्तान से हैं. इस हादसे में केवल राम के दो बेटे और एक बेटी की भी जान चली गई."

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परिवार में 37 साल के केवल राम ही जीवित बचे हैं

पुलिस के मुताबिक जोधपुर की मंडोर थाना पुलिस में दोनों पक्ष एक दूसरे के ख़िलाफ़ शिकायत करते रहे हैं और पुलिस ने दोनों पक्षों को शांति बनाए रखने के लिए पाबंद किया था.

चार पन्नों का सुसाइड नोट!

पुलिस को मौके से ख़ुदकुशी का नोट मिला है. चार पन्नों के इस नोट में पारिवारिक विवाद का ज़िक्र है. साथ ही पुलिस की कार्यशैली पर भी प्रश्न खड़ा किया गया है.

पुलिस के अनुसार इसमें ससुराल पक्ष से धमकियां मिलने और पुलिस पर भी आरोप लगाया गया है.

पुलिस अधीक्षक राहुल बारहट कहते हैं, "पुलिस इस नोट की सत्यता की जांच कर रही है. इस नोट में पाकिस्तान से भारत आने के हालात का भी उल्लेख है. आम तौर पर पाकिस्तान से आए हिन्दू उर्दू में लिखते हैं. मगर इस नोट की इबारत हिंदी में है. समझा जाता है कि परिवार के बच्चे हिंदी पढ़ लिख लेते थे. पुलिस नोट में लिखी इबारत की जाँच कर रही है."

सीबीआई जांच की मांग

पाकिस्तान से आए हिन्दुओं के लिए आवाज़ उठाते रहे सीमान्त लोक संगठन ने घटना की सीबीआई जैसी निष्पक्ष एजेंसी से जाँच की मांग की है.

संगठन के अध्यक्ष हिन्दू सिंह सोढ़ा ने बीबीसी से कहा, "पाकिस्तान विस्थापित पुलिस के विरुद्ध शिकायत करते रहे हैं. लिहाजा बेहतर होगा किसी निष्पक्ष संस्था से जाँच करवाई जाए."

सोढ़ा कहते हैं, "पाकिस्तान से आए हिन्दुओं में या तो दलित हैं या आदिवासी भील समुदाय के लोग हैं. क़दम क़दम पर उनका शोषण होता है और व्यवस्था उनकी शिकायतों पर गौर नहीं करती है. हम पहले भी कह चुके हैं सरकारी एजेंसियों के लोग वसूली भी करते हैं. इस तरह वसूली करते हुए सरकारी कर्मचारी पकड़े भी जा चुके है."

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वे कहते हैं, "पाकिस्तानी हिन्दू इस उप महाद्वीप के सबसे अधिक प्रताड़ित और प्रभावित लोग हैं."

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पाकिस्तान के सूबा सिंध से कोई पांच साल पहले भारत आए बुद्धाराम भील के परिवार ने पहले जोधपुर में सीमान्त लोक संघटन के शिविर में वक़्त गुज़ारा और फिर खेती की ज़मीन किराए पर लेकर कृषि कार्य करने लगे.

गोविन्द भील खुद कभी पाकिस्तान में रहते थे. मौके से लौट कर वे कहते हैं इस घटना ने भील समुदाय को झकझोर कर रख दिया. हमें यक़ीन नहीं है कि यह परिवार ख़ुदकुशी कर सकता है.

भील कहते हैं ये परिवार पढ़ा लिखा था. परिवार की एक बेटी सिंध में सरकारी नौकरी करती थी. वो नर्स थी और यहाँ प्राइवेट नौकरी करती थी.

वे पूछते हैं ऐसा पढ़ा लिखा परिवार भला क्यों अपनी जान देगा? गोविन्द कहते हैं बुद्धाराम के परिवार ने एक गांव में भीयाराम का खेत किराए पर लिया था.

पाकिस्तान छोड़ कर भारत आए भील समुदाय के प्रेम चंद भील ने बीबीसी से कहा, "यह समझ से परे है कि गर्मी के बावजूद सब लोग एक कमरे में सोए और बाहर चारपाइयाँ खाली पड़ी थीं. रक्षा बंधन तक सब ठीक था. पर अब यह घटना हो गई."

वे कहते हैं ऐसी घटना यह भी बताती है कि पाकिस्तान से आए हिन्दू कैसा मुश्किल जीवन जीने को अभिशप्त हैं. वे कहते हैं वे सिंध में सांगड में रहते थे. उन्हें भारत आने पर नागरिकता मिल गई. मगर उनकी पत्नी और बच्चों को अब तक भारत की नागरिकता नहीं दी गई है.

प्रेम चंद भील कहते हैं बुद्धाराम के परिवार में जीवित बचा केवल राम पूरी तरह टूट गया है. हम लोग ढाढ़स बंधा रहे हैं.

घटना की जांच की मांग

बाड़मेर के उस पार पाकिस्तान के मीरपुर ख़ास से भारत आए लीलाधर मेघवाल कहते हैं, "इस घटना से पाकिस्तानी हिन्दू बहुत दुखी हुए हैं. हम सब लोग मौके पर पहुंचे और एक मात्र बचे परिजन को सांत्वना दी."

डॉ. दलजी राय भील पाकिस्तान में होमियोपैथी के डॉक्टर थे. वे कहते हैं वहां भी हमें आदिवासी भील समाज के लिए भील सुझाग इत्तेहाद बना कर लड़ाई लड़नी पड़ती थी, यहाँ भी अपनी हालत सुधारने के लिए स्वर मुखरित करने पड़ रहे हैं.

इस घटना को लेकर सियासत भी होने लगी है. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सरकार पर तंज कसा है. राजे ने ट्वीट कर कहा, "यह दिल दहलाने वाली घटना है. यह सब सरकार के लापता होने का नतीजा है. इसकी उच्च स्तरीय जाँच होनी चाहिए."

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी घटना की जांच की मांग की है.

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उधर राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह ने कहा है एक ही परिवार के 11 लोगों की इस तरह मौत होना दुखद है. कारणों की जाँच की जा रही है. सरकार पूरी तरह सवंदेनशील है. प्रभावित परिवार को मदद के लिए वे मुख्य मंत्री अशोक गहलोत से बात करेंगे.

पाकिस्तान में अपनी जड़ों से उखड़े बुद्धाराम परिजनों के साथ खेत को हरा भरा कर भारत में अपना भविष्य सवारने में लगे रहते थे. जोधपुर ज़िले के उस खेत में कच्चा बना आशियाना उदास है, खेत में मातम पसरा है.

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