फ़ेसबुक ने कब-कब नेताओं के विवादित पोस्ट हटाए

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भारत में सोशल मीडिया कंपनी फ़ेसबुक एक बार फिर विवादों में घिर गई है. उस पर देश की सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं की हेट-स्पीच के मामले में नियमों को ताक पर रखने के आरोप लग रहे हैं.

पूरा विवाद एक प्रमुख अमरीकी अख़बार वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट 'फ़ेसबुक हेट-स्पीच रूल्स कोलाइड विद इंडियन पॉलिटिक्स' से शुरू हुआ है.

रिपोर्ट में तेलंगाना के एक बीजेपी नेता की पोस्ट का हवाला भी दिया गया है, जिसे इतना गंभीर बताया गया है कि कायदे से उस नेता को कंपनी के दुनियाभर के प्लेटफॉर्म्स से स्थायी तौर पर बैन कर देना चाहिए था, लेकिन उन पर ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई.

हालांकि विवाद बढ़ने के बाद फ़ेसबुक ने अब उनके पोस्ट को हटा दिया है. लेकिन फ़ेसबुक के नेताओं के विवादित पोस्ट को लेकर रवैये पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. हालांकि ऐसा नहीं है कि फ़ेसबुक ने कभी इस तरह के पोस्ट पर कार्रवाई नहीं की.

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डोनल्ड ट्रंप के आधिकारिक अकाउंट पर कार्रवाई

फ़ेसबुक ने इसी महीने पांच तारीख को अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के आधिकारिक अकाउंट पर कार्रवाई की थी. वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक़, ये कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि इस अकाउंट से कथित तौर पर कोरोना वायरस को लेकर ग़लत जानकारी फैलाई गई थी.

फ़ेसबुक ने ट्रंप के आधिकारिक अकाउंट से वो वीडियो पोस्ट हटा दिया था, जिसमें फॉक्स न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में वो कह रहे थे कि बच्चे कोविड-19 से "क़रीब-क़रीब इम्यून" होते हैं.

हालांकि आलोचकों का कहना है कि फ़ेसबुक ने ट्रंप का कोरोना से जुड़ा पोस्ट तो हटाया, लेकिन वो विवादित पोस्ट नहीं हटाया था जिसमें ट्रंप कथित तौर पर "हिंसा का महिमामंडन" कर रहे थे. ट्रंप के इन ट्वीट्स पर ट्विटर ने कार्रवाई की थी, लेकिन फे़सबुक ने नहीं की थी.

दरअसल मई के आख़िर में ट्रंप ने ट्वीट किया था कि "जब लूट शुरू होगी तो शूटिंग भी शुरू होगी." ट्विटर ने ट्रंप के इस ट्वीट पर वॉर्निंग जारी की थी.

ट्विटर का कहना था कि ये हिंसा का महिमामंडन करता है जबकि फे़सबुक की राय में ये पोस्ट कंपनी की पॉलिसी का उल्लंघन नहीं करता था.

फ़ेसबुक के संस्थापक मार्क ज़करबर्ग के ये कहने के बाद कि ट्रंप के पोस्ट से हिंसा भड़काने को लेकर कंपनी की नीति का उल्लंघन नहीं हुआ है, इस पोस्ट को यूं ही छोड़ दिया गया.

हालांकि मार्क ज़करबर्ग ने कहा था कि "राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बारे में जिस तरह से अपनी बात कही, मैं इस बात से पूरी तरह से असहमत हूं लेकिन मैं ये मानता हूं कि लोगों की नज़र में ये बात रहनी चाहिए क्योंकि आख़िरकार सत्ता में बैठे लोगों की जिम्मेदारी तभी तय की जा सकती है जबकि उनकी कही बातों पर सार्वजनिक तौर पर बहस हो."

लेकिन मार्क ज़करबर्ग के इन पोस्ट पर कार्रवाई ना करने के फै़सले का ख़ुद फ़ेसबुक के कर्मचारियों ने कड़ा विरोध किया था. फे़सबुक के दफ़्तर में कर्मचारियों ने "वर्चुअल बहिष्कार" भी किया, कुछ स्टाफ़ ने ये मैसेज छोड़ा कि वे विरोध कर रहे हैं और इसलिए काम बंद कर रहे हैं.

इसके बाद ख़बरें आई थी कि ज़करबर्ग ने अपने कर्मचारियों से वीडियो कॉल के ज़रिए बात की जिसमें अपने फै़सले का बचाव भी किया.

इस कॉल का ऑडियो लीक होने की ख़बरें आई थीं जिसमें कथित तौर पर उन्हें भारत के एक मामले का ज़िक्र करते सुना गया था. इस ऑडियो टेप में भारत के एक नेता ने क़ानून अपने हाथ में लेना की धमकी दी थी. ज़करबर्ग ने इसे कथित तौर पर हिंसा भड़काने की "स्पष्ट मिसाल" बताया था.

हालांकि उन्होंने उस नेता का नाम नहीं लिया था, लेकिन अटकलें लगाई कईं कि ज़करबर्ग बीजेपी नेता कपिल मिश्रा की बात कर रहे थे. जिन्होंने फरवरी में एक भीड़ को संबोधित करते हुए दिल्ली पुलिस को अल्टीमेटम दे डाला था.

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कपिल मिश्रा की पोस्ट को हटाया था

कपिल मिश्रा ने फ़ेसबुक पर भी पोस्ट कर लोगों से इकट्ठा होने और जाफ़राबाद में "दूसरी शाहीन बाग़ प्रोटेस्ट होने से रोकने" की अपील की थी. इस पोस्ट को फ़ेसबुक ने हटा दिया था.

आरोप लगाए जाते हैं कि कपिल मिश्रा के भाषण के बाद ही दिल्ली में हिंसा भड़क गई थी जिसमें 53 लोगों की जान गई और 200 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे.

नेताओं के विवादित फ़ेसबुक पोस्ट कार्रवाई के ये कुछ बड़े मामले हैं जो सुर्खियों में आए.

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फिर हुआ फ़ेसबुक का बहिष्कार

हालांकि कुछ वक़्त पहले फ़ेसबुक के ख़िलाफ़ 'स्टॉप हेट फ़ॉर प्रॉफ़िट' अभियान भी चलाया गया था. इस मुहिम का दावा था कि फ़ेसबुक अपने प्लेटफ़ॉर्म पर नफ़रत से भरी और नस्लवादी सामग्री (कॉन्टेंट) हटाने की पर्याप्त कोशिश नहीं करता.

'स्टॉप हेट फ़ॉर प्रॉफ़िट' मुहिम ने कई बड़ी कंपनियों को फ़ेसबुक और कुछ अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स से अपने विज्ञापन हटाने के लिए राज़ी कर लिया था.

कोका-कोला, यूनिलीवर और स्टारबक्स, फ़ोर्ड, एडिडास और एचपी जैसी नामी कंपनियां ने फ़ेसबुक से अपने विज्ञापन हटाने की बात कही थी.

समाचार वेबसाइट 'एक्सियस' के अनुसार माइक्रोसॉफ़्ट ने भी फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर मई में ही विज्ञापन देना बंद कर दिया था. बीबीसी ने इस ख़बर की पुष्टि भी थी कि माइक्रोसॉफ़्ट ने अज्ञात 'अनुचित सामग्री' की वजह से फ़ेसबुक पर विज्ञापन देने बंद किए हैं.

विज्ञापन फ़ेसबुक के रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा है इसलिए कहा गया कि इससे फ़ेसबुक को बड़ा नुकसान होगा.

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ट्विटर ने बबिता फोगाट का अकाउंट सस्पेंड किया था

इस साल जून के अंत में ज़करबर्ग पर दबाव बढ़ा था और उन्होंने कहा था कि फ़ेसबुक हेट स्पीट को सेंसर करेगी, जिनमें नेताओं के पोस्ट भी शामिल होंगे.

फ़ेसबुक ने घोषणा की थी कि जो पोस्ट उसकी हेटफुल कंडक्ट पॉलिसी का उल्लंघन करेंगे, वो उसे हटा देगी और कम समस्या वाली पोस्ट पर "लेबल" लगाएगी.

यह जानना भी ज़रूरी है कि फ़ेसबुक ने पोस्ट और कंटेंट को लेकर एक कम्युनिटी स्टैंडर्ड भी बनाया हुआ है जिसे आप इस लिंक पर देख सकते हैं. इसके मुताबिक़ फ़ेसबुक दावा करता है कि लोगों को धमकाने वाली भाषा के इस्तेमाल से लोगों में डर, अलगाव या चुप रहने की भावना आ सकती है और फ़ेसबुक पर इस तरह की बातें करने की परमिशन नहीं है.

फ़ेसबुक अपनी इस गाइडलाइन में यह भी कहता है कि कुछ मामलों में कम्युनिटी स्टैंडर्ड के ख़िलाफ़ जाने वाले कंटेंट उपयोग करने की परमिशन दे देते हैं बर्शते वह सार्वजनिक हित का मामला हो और ऐसे फ़ैसलों से पहले अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का भी ध्यान रखा जाता है.

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क्या ट्विटर ने की अधिक कड़ाई?

सोशल मीडिया पर नज़र रखने वाले कुछ लोगों का मानना है कि कुछ मामलों ने ट्विटर ने फ़ेसबुक से ज़्यादा कड़ाई का रुख अपनाया है. राजनीतिक बयानों को लेकर ट्विटर हस्तियों के विरुद्ध कार्रवाई करता रहा है.

ट्विटर ने राष्ट्रपति ट्रंप के कई ट्वीट्स को ग़लत जानकारी देने वाला बताया और यहां तक कि ट्विटर ने उनके बेटे डोनल्ड ट्रंप जूनियर को ट्विटर के कोरोना वायरस मिस इंफॉर्मेशन रूल्स तोड़ने के लिए 12 घंटे तक ट्वीट करने से ब्लॉक कर दिया था.

अप्रैल में बीजेपी नेता और अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ी बबीता फोगाट ने कुछ मुसलमान विरोधी ट्वीट किए थे. उन्होंने लिखा था कि मुसलमान भारत के लिए वायरस से भी बड़ी समस्या हैं.

इसके बाद कुछ लोगों ने उनके अकाउंट को रिपोर्ट किया, जिसके बाद उनका अकाउंट बंद हो गया था. फिर विवादित ट्वीट डिलीट करने के बाद उनका अकाउंट दोबारा खुल सका.

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