कफ़ील ख़ान बोले- गोरखपुर में बच्चों की मौत उजागर करने की सज़ा मिल रही है

  • समीरात्मज मिश्र
  • बीबीसी हिंदी के लिए
कफ़ील ख़ान

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कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के मामले में पिछले आठ महीने से जेल में बंद डॉक्टर कफ़ील ख़ान ने रिहाई के बाद कहा है कि उन्हें जेल भेजने के पीछे सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान भाषण देना नहीं बल्कि गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में साठ से ज़्यादा बच्चों की मौत के मामले को उजागर करना है.

बीबीसी के साथ बातचीत में कफ़ील ख़ान ने कहा कि जेल में मुझे जानबूझकर टॉर्चर किया गया और कई-कई दिनों तक भूखा रखा गया.

कफ़ील ख़ान का कहना था, "बीआरडी मेडिकल कॉलेज में तीन साल पहले ऑक्सीजन की कमी से हुई बच्चों की मौत के बाद मैं तीन बार जेल जा चुका हूं लेकिन इस बार की जेल यात्रा काफ़ी भयावह थी."

डॉक्टर कफ़ील ने कहा, "मथुरा जेल में मुझे कई दिन तक खाना नहीं दिया जाता था. खाना दिया भी जाता था तो रोटियां दूर से ही फेंक दी जाती थीं और जेल के भीतर मुझे शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना भी दी गई."

"पचास क़ैदियों की क्षमता वाले बैरक में 150 क़ैदियों के साथ मुझे भी रखा गया था. कोर्ट से ज़मानत मिलने के बावजूद मुझे तीन दिन तक रिहा नहीं किया गया और फिर मेरे ख़िलाफ़ एनएसए लगा दिया."

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कफ़ील ख़ान ने सुनाई जेल के भीतर की दास्तां

कफ़ील ख़ान कहते हैं कि जेल अधिकारियों के इस रवैये के बावजूद जेल के क़ैदी उनके साथ बहुत अच्छा बर्ताव करते थे.

वो कहते हैं, "बीआरडी मेडिकल कॉलेज की घटना के कारण वहां सभी लोग मुझे जानते थे. सुबह राधे-राधे से होती थी और सभी लोग साथ में रामायण और महाभारत सीरियल देखते थे. लॉकडाउन के बाद घर-परिवार वाले भी मिलने नहीं आ सकते थे इसलिए उन्हीं के बीच जीवन कटता था."

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तीन साल पहले गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में साठ से भी ज़्यादा बच्चों की ऑक्सीजन की कमी से हुई मौत के बाद चर्चा में आए कफ़ील ख़ान को पिछले साल दिसंबर में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में एसटीएफ़ ने मुंबई से गिरफ़्तार किया था.

इस मामले में उन्हें ज़मानत मिल गई थी लेकिन इसी दौरान राज्य सरकार ने उनके ख़िलाफ़ राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून यानी एनएसए की धारा लगा दी.

राज्य सरकार कफ़ील ख़ान के ख़िलाफ़ एनएसए को अब तक दो बार बढ़ा चुकी है. मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कफ़ील ख़ान को ज़मानत देते हुए तत्काल रिहा करने का आदेश दिया और उनके ख़िलाफ़ एनएसए लगाने को अवैध क़रार दिया.

डॉक्टर कफ़ील का कहना है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में दिए गए भाषण में ऐसा कुछ भी नहीं था जिसकी वजह से इतनी सज़ा दी जाती और हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में ख़ुद यह कहा है, लेकिन जेल भेजे जाने की असली वजह बीआरडी मेडिकल कॉलेज की घटना से जुड़ी है.

कफ़ील कहते हैं, "बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों के मरने की घटना से एक दिन पहले यानी नौ अगस्त को मुख्यमंत्री योगी जी गोरखपुर आए थे. वहां बच्चों के आईसीयू वॉर्ड को उन्होंने देखा तो बहुत ख़ुश हुए और मेरी पीठ भी थपथपाई. उस वॉर्ड को बनाने में मैंने बहुत मेहनत की थी. इस मामले में उन्हें गुमराह किया गया है. मेरे बारे में शायद यह ग़लतफ़हमी फैलाई गई कि यह किसी दूसरे राजनीतिक दल से जुड़ा है."

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डॉक्टर कफ़ील का कहना है, "गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज मामले में मुझे दूसरी जांच में 23 जनवरी को क्लीन चिट मिली थी. इसके बाद सरकार ने परेशान होकर मुझ पर इस तरह से कार्रवाई की जैसे मैं कोई आतंकवादी हूं. मैं तो यह जानना चाहता हूं कि क्या बच्चों की जान बचाना कोई ग़ुनाह है? सरकार को ऐसा क्यों लग रहा था कि कोरोना संकट के दौरान भी मैं देश और समाज के लिए ख़तरा बन जाऊंगा. आख़िरकार हाईकोर्ट ने उनकी सारी कार्रवाई को ग़ैरक़ानूनी बता दिया."

कफ़ील ख़ान के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के तहत उनकी रिहाई की अपील की थी और एनएसए को चनौती दी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले की सुनवाई के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में ही अपील की जानी चाहिए.

इसके बाद यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में आया लेकिन तकनीकी कारणों से मामले की सुनवाई होने में कफ़ील ख़ान को बारह 'तारीखों' का इंतज़ार करना पड़ा.

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डॉक्टर कफ़ील ख़ान अब तक जेल से बाहर क्यों नहीं आ पाए

इलाहाबाद हाईकोर्ट में कफ़ील की याचिका पर सुनवाई होने में भले ही इतनी देर लग गई लेकिन कफ़ील ख़ान कोर्ट का शुक्रिया अदा करते हैं कि उन्होंने न्याय किया और सरकार के पक्षपातपूर्ण रवैये को सार्वजनिक कर दिया.

बीबीसी ने कफ़ील से जब बात की तो वो जयपुर थे. इस सवाल पर कि गोरखपुर जाने की बजाय जयपुर क्यों गए, डॉक्टर कफ़ील कहते हैं, "हाईकोर्ट के इतने कड़े आदेश के बावजूद मुझे रात को ग्यारह बजे मथुरा जेल से रिहा किया. यूपी में मेरी जान को ख़तरा है इसीलिए हम लोग जयपुर आए. इतनी रात में गोरखपुर जा भी नहीं सकते थे क्योंकि मथुरा से काफ़ी दूर है. अभी जयपुर में ही हम लोग रुके हुए हैं."

अपनी आगे की योजना पर कफ़ील ख़ान कहते हैं कि मैं डॉक्टर हूं और इस पेशे के ज़रिए लोगों की सेवा करना चाहता हूं.

वो कहते हैं, "सरकार से मेरी मांग है कि जिस मामले में मुझे क्लीन चिट दी जा चुकी है तो अब मुझे नौकरी भी वापस दी जाए और मैं दोबारा बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों का इलाज कर सकूं. फ़िलहाल यूपी समेत देश के कई इलाक़े बाढ़ प्रभावित हैं. मैं वहां जाकर लोगों की मदद करना चाहता हूं, क्योंकि बाढ़ के दौरान और उसके बाद भी इन इलाकों में बीमारियां ज़्यादा फैलती हैं."

कफ़ील ख़ान ने बताया कि जयपुर में गुरुवार शाम को वो एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस भी करने वाले हैं.

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