'चीन के पास अब दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना, दर्जनों देशों में सैन्य अड्डे बनाने का इरादा' - प्रेस रिव्यू

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एक अमरीकी रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के पास अब दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है जिसके लिए वो पाकिस्तान, श्रीलंका, थाईलैंड, सिंगापुर, इंडोनेशिया और म्यांमार समेत दर्जनों देशों में अपने सैन्य अड्डे बनाने की कोशिश कर रहा है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार ने इस रिपोर्ट को जगह दी है. अख़बार ने इस रिपोर्ट के हवाले से लिखा है कि चीन के पास अब दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है जिसके लिए चीन आक्रामक ढंग से नए सैन्य अड्डे तलाश रहा है, ताकि अपनी सामरिक स्थिति और पहुँच को मज़बूत किया जा सके.

रिपोर्ट के अनुसार, चीन चाहता है कि इंडो-पैसिफ़िक क्षेत्र में उसके ये नए अड्डे विकसित हों. साथ ही चीन की मंशा है कि परमाणु हथियारों की संख्या भी आने वाले दशक में दोगुनी कर ली जाये.

अख़बार के अनुसार, चीन के सैन्य विस्तार का आंकलन करती पेंटागन की यह रिपोर्ट मंगलवार को अमरीकी संसद में पेश की गई. हालांकि चीन ने इस रिपोर्ट को पूर्वाग्रह से भरपूर बताते हुए ख़ारिज कर दिया है.

अख़बार ने लिखा है कि भारत द्वारा पेंटागन की इस रिपोर्ट को गंभीरता से लिये जाने की ज़रूरत है क्योंकि चीनी नौसेना की पहुँच भारत के समुद्री क्षेत्र में बढ़ रही है.

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पिछले साल भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल कर्मबीर सिंह ने कहा था कि भारत को तमाम बाधाओं के बावजूद चीनी सेना के बढ़ते विस्तार का जवाब देने की ज़रूरत है.

उन्होंने हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी.

नौसेना प्रमुख ने कहा था कि ''पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) नेवी पर बहुत से संसाधन लगाये गए हैं जिसके पीछे उनके वैश्विक शक्ति बनने के इरादे साफ़ नज़र आते हैं. हमें इस पर सावधानीपूर्वक नज़र रखने की ज़रूरत है कि कैसे हम अपने बजट और बाधाओं के साथ जवाब दे सकते हैं.''

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'सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों में वकीलों का भय'

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बात सरहद पार

दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

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सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दुष्यंत दवे ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर यह कहा है कि 'देश का सर्वोच्च न्यायालय एक ऐसे स्तर पर आ गया है, जहाँ न्यायाधीश वकील-समुदाय से डरते हैं.'

उन्होंने लिखा, 'यह याद रखा जाये कि न्यायाधीश आते-जाते हैं, लेकिन हम वकील स्थिर रहते हैं. हम वकील ही इस महान संस्था की असल ताक़त हैं क्योंकि हम स्थायी हैं.'

द टेलीग्राफ़ अख़बार ने दवे की इस टिप्पणी को प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

अख़बार ने लिखा है कि दवे ने बुधवार को यह चिट्ठी मुख्य न्यायाधीश को जस्टिस अरुण मिश्रा के 'फ़ेयरवेल' में ना बोलने दिये जाने से नाराज़ होकर लिखी.

अख़बार के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के तौर पर दुष्यंत दवे जस्टिस अरुण मिश्रा के कार्यकाल के अंतिम दिन 'अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे' थे, लेकिन दवे के मुताबिक़, 'बाकी लोगों को बोलने दिया गया, जबकि उन्हें बोलने का मौक़ा नहीं मिला.'

कोर्ट की बनी हुई रस्म के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन जो कि सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की प्रतिनिधि संस्था है, रिटायर होने वाले जज के लिए फ़ेयरवेल कार्यक्रम आयोजित करती है और इस मौक़े पर एसोसिएशन के अध्यक्ष कुछ शब्द कहते हैं. लेकिन कोरोना महामारी के कारण जस्टिस अरुण मिश्रा का फ़ेयरवेल कार्यक्रम नहीं हो पाया, बल्कि अंतिम दिन सुनवाई के बाद, वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिये ही लोगों ने अपने संदेश दिये.

अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, दवे को बोलने का मौक़ा नहीं मिला, जिससे नराज़ होकर उन्होंने यह भी कहा कि दिसंबर में, जब तक उनका कार्यकाल ख़त्म नहीं हो जाता, वो बतौर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष किसी भी ऐसे कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेंगे क्योंकि ऐसी घटना से वकीलों की प्रतिष्ठा को धक्का लगता है.

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गुजरात का मुंद्रा पोर्ट

गुजरात में भारत के सबसे व्यस्त मुंद्रा बंदरगाह पर एक टर्मिनल का आंशिक स्वामित्व एक चीनी कंपनी को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव अब भारतीय विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की नज़र में आ गया है.

द हिन्दू अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि अडानी समूह के फ़्रांसीसी पार्टनर सीएमए टर्मिनल्स और चीन की सरकारी कंपनी सीएमजी के बीच एक समझौते के बाद इस प्रस्ताव को तैयार किया गया था.

हालांकि अडानी समूह ने यह स्पष्ट किया है कि इस मामले में उसने अपनी ओर से कोई आवेदन दायर नहीं किया.

इस साल 21 मई को फ़्रांसीसी कंपनी सीएमए टर्मिनल्स जो अडानी समूह की पार्टनर कंपनी है और मुंद्रा बंदरगाह पर टर्मिनल-4 के विकास, संचालन और रखरखाव में लगी हुई है, उसने एक आवेदन दाख़िल कर यह इच्छा ज़ाहिर की कि वो सीएमए-सीजीएम समूह को अपनी 50% हिस्सेदारी देना चाहते हैं, जिसका प्रभावी रूप से असर यह होगा कि एक चीनी कंपनी अडानी-सीएमए मुंद्रा टर्मिनल में अप्रत्यक्ष रूप से 24.9% की हिस्सेदारी ले लेगी.

एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से अख़बार ने लिखा है कि 'अब तक यह डील फ़ाइनल नहीं हुई है.'

उन्होंने बताया कि फ़्रांसीसी कंपनी ने यह आवेदन विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय, आरबीआई और डीपीआईआईटी को भेजा है.

अख़बार के अनुसार, दोनों ही मंत्रालयों ने फ़िलहाल इस बारे में टिप्पणी करने से इनकार किया है.

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सहारा समूह प्रमुख सुब्रत रॉय - फ़ाइल फ़ोटो

सहारा समूह

द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने सहारा मामले में हाथ लगे कुछ दस्तावेज़ों के आधार पर लिखा है कि साल 2012 से 2014 के बीच, जब सहारा समूह की दो फ़र्मों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी ठहराया गया और सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय को गिरफ़्तार किया गया, तब सहारा समूह ने तीन सहकारी समितियों को चालू किया और क़रीब चार करोड़ निवेशकों से 86,673 करोड़ रुपये की जमा राशि एकत्र की.

इन समितियों और इनमें जमा राशि को अब सरकार द्वारा लाल झंडी दिखाई गई है, साथ ही 'अत्यधिक संदिग्ध' अनियमितताओं के इस मामले की जाँच की बात कही है, जिसने सहारा की इन समितियों में पैसा जमा करने वालों के सामने भी एक गंभीर जोखिम खड़ा कर दिया है.

अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, विनियामकों ने कहा है कि कम से कम 62,643 करोड़ रुपये की धनराशि को महाराष्ट्र के लोनावला की अंबे वैली परियोजना में लगाया गया. यह वही परियोजना है जिसे साल 2017 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कुर्क किया गया था और फिर सहारा के जमाकर्ताओं का पैसा चुकाने के लिए इस संपत्ति को नीलाम करने की कई असफल कोशिशों के बाद 2019 में इसे छोड़ दिया गया था.

हालांकि, अख़बार से बातचीत में सहारा समूह के एक प्रवक्ता ने कहा है कि जो भी निवेश हुआ, वो नियमों के अनुसार हुआ. समूह ने निवेशकों के पैसे का नियमों के अनुसार ही इस्तेमाल किया. इसके लिए सहारा समूह किसी भी जाँच के लिए तैयार है.

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तिब्बती मूल के भारतीय अफ़सर की मौत

डेक्कन हेराल्ड अख़बार ने तिब्बती मूल के भारतीय फ़ौजी अफ़सर न्याइमा तेनज़िन की मौत की ख़बर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

अख़बार ने एक तस्वीर प्रकाशित की है जिसमें दिखता है कि तेनज़िन के पार्थिव शरीर को तिरंगे और तिब्बती झंडे में लपेटा गया है.

51 वर्षीय न्याइमा तेनज़िन ने उस समय भारतीय सीमा की रक्षा करते हुए अपने प्राण दिये, जब 30 अगस्त को पीपल्स लिबरेशन आर्मी (चीनी सेना) के जवानों ने पूर्वी लद्दाख के चुशुल क्षेत्र में कथित घुसपैठ की थी.

अख़बार ने लिखा है कि न्याइमा तेनज़िन का तिरंगे झंडे और तिब्बती झंडे में एक साथ लपेटे जाना, चीन के लिए कोई अच्छा संदेश नहीं रहा होगा.

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न्याइमा तेनज़िन भारतीय फ़ौज की स्पेशल फ़्रंटियर फ़ोर्स में कंपनी लीडर के पद पर थे.

अख़बार ने लिखा है कि स्पेशल फ़्रंटियर फ़ोर्स को 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान तैयार किया गया था जिसमें तिब्बत के गुरिल्ला सैनिकों और युवा शरणार्थियों को शामिल किया गया था. हालांकि, इसे हमेशा ही काफ़ी गोपनीय रखा गया.

अख़बार के अनुसार, तेनज़िन ने क़रीब 33 वर्ष स्पेशल फ़्रंटियर फ़ोर्स में काम किया, लेकिन उनकी मौत को कोई आधिकारिक पहचान नहीं मिल पाई.

दिल्ली स्थित रक्षा मंत्रालय ने चीन के साथ सीमा पर हुए टकराव को लेकर जो बयान जारी किया, उसमें कहीं भी स्पेशल फ़्रंटियर फ़ोर्स की भूमिका या उसके मारे गये सैनिकों का ज़िक्र नहीं था.

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