दिल्ली में 86 साल की महिला के साथ रेप, आखिर क्यों बढ़ते ही जा रहे हैं ऐसे मामले

  • गीता पांडे
  • बीबीसी संवाददाता
दिल्ली, रेप

हर साल भारत में हज़ारों-लाखों बलात्कार के मामले दर्ज होते हैं लेकिन इनमें से कुछ ऐसे हैं जो समाज को हिला कर रख देते हैं.

राजधानी दिल्ली में ऐसा ही एक केस सामने आया जिसमें एक व्यक्ति ने 86 साल की बुज़ुर्ग महिला का बलात्कार किया.

ये व्यक्ति फ़िलहाल पुलिस की गिरफ़्त में है.

पीड़िता की आपबीती

दिल्ली महिला आयोग की प्रमुख स्वाति मालिवाल ने बताया कि महिला शाम को अपने घर के बाहर दूधवाले का इंतज़ार कर रही थी जब ये शख़्स उनके पास गया.

स्वाति मालिवाल ने बताया, "इस शख़्स ने उनसे कहा कि जो रोज़ दूध देने आता है वो नहीं आएगा और कहा कि एक दूसरी जगह ले चलता हूं जहां से दूध मिल सकता है."

स्वाति ने बताया कि महिला उस पर भरोसा कर साथ चली गई. वो उन्हें एक पास के खेत में ले गया और बलात्कार किया. वो रोती रही और छोड़ देने के लिए भीख मांगती रही लेकिन उस व्यक्ति ने एक न सुनी. जब उन्होंने खुद को छुड़ाने की कोशिश की तो उन्हें मारा भी.

जब वहां से गुज़र रहे कुछ लोगों ने उनकी आवाज़ें सुनीं तो उन्हें बचाया गया. उन लोगों ने अभियुक्त को पुलिस के हवाले कर दिया.

स्वाति मालिवाल मंगलवार को पीड़िता के घर गईं. उन्होंने बताया कि जो देखा वो दिल तोड़ देने वाला था.

"उनके हाथ पूरी तरह झुर्रियों से भरे हैं. आपको सदमा लगेगा जब आप उनकी कहानी सुनेंगे. उनके चेहरे और शरीर पर निशान पड़े हैं और उन्होंने मुझे बताया कि उन्हें ख़ून भी आया. वे काफ़ी डरी और घबराई हुई हैं."

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फ़ांसी की मांग

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स्वाति मालिवाल ने अभियुक्त के लिए फ़ांसी की मांग की है.

"मैं दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एलजी को चिट्ठी लिख रही हूं कि इस मामले पर फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो और छह महीने के अंदर अभियुक्त को फ़ांसी मिले."

बलात्कार और यौन शोषण को लेकर भारत में दिसंबर 2012 से काफ़ी बात हो रही है, जब एक 23 साल की फ़िज़ियोथैरेपी की छात्रा का दिल्ली में चलती बस में बलात्कार हुआ था. उन्हें इतनी चोटें आईं थी कि कुछ दिन बाद ही उनकी मौत हो गई. इसी साल मार्च में दोषियों को फ़ांसी दी गई है.

लेकिन यौन अपराधों पर नए मज़बूत क़ानून बनने के बावजूद भी केस बढ़ते ही जा रहे हैं.

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक़ 2018 में 33,977 मामले पुलिस ने दर्ज किए. यानी हर 15 मिनट में एक बलात्कार हो रहा था. हालांकि एनजीओ और महिला सुरक्षा के लिए काम करने वाली संस्थाएं कहती हैं असल संख्या इससे कहीं ज़्यादा है क्योंकि ज़्यादातर केस तो रिपोर्ट ही नहीं किए जाते.

सभी रेप केस ख़बरों में भी जगह नहीं बना पाते, सिर्फ़ वही केस ख़बर बनते हैं जो जघन्य हों या हैरान करने वाले हों.

बीते कुछ दिनों की घटनाएं

जब देश कोरोनावायरस से जूझ रहा है, तब पिछले दिनों ख़बर आई कि एक एंबुलेंस ड्राइवर ने एक कोविड मरीज़ को ले जाते हुए उसका बलात्कार किया.

पिछले महीने यूपी में एक 13 साल की लड़की का शव गन्ने के खेत में मिला जिसका बलात्कार हुआ था. उसके पिता ने आरोप लगाया कि बेटी की आंखें निकाल ली गईं थीं और ज़बान काटी गई थी.

वहीं, जुलाई में एक छह साल की लड़की को अगवा कर बलात्कार किया गया और दोषियों ने उसकी आंखों को गंभीर चोट पहुंचाई ताकि वो उन्हें पहचान न सके.

एक महीने की बच्ची से लेकर बूढ़ी महिला भी रेप की शिकार!

'पीपल्स अगेंस्ट रेप इन इंडिया' एनजीओ की महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना कहती हैं कि किसी भी उम्र की महिलाएं सुरक्षित नहीं है.

"मैंने एक महीने भर की पीड़िता भी देखी है और 60 साल से ज़्यादा की भी."

दिसंबर 2012 में दिल्ली में हुए के जघन्य बलात्कार की दुनिया भर में चर्चा हुई थी, भारत में नया क़ानून बना. जघन्य बलात्कार पर फ़ांसी का प्रावधान भी हुआ और फास्ट ट्रैक अदालतों का वादा भी.

लेकिन एनजीओ से जुड़े कार्यकर्ता बताते हैं कि ज़मीन पर ज़्यादा कुछ नहीं बदला है.

योगिता भयाना कहती हैं, "हालात इसलिए नहीं बदले क्योंकि सरकार की प्राथमिकता में महिलाओं और छोटी बच्चियों की सुरक्षा होनी चाहिए लेकिन वो कहीं भी नहीं है."

"भारत में बाहरी सुरक्षा की बात तो होती है लेकिन मैं पूछना चाहती हूं कि आंतरिक सुरक्षा का क्या?"

योगिता बताती हैं कि उन्होंने पिछले कुछ सालों में 100 से भी ज़्यादा ख़त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे हैं कि वे बलात्कार पीड़ितों को न्याय दिलवाएं लेकिन उन्हें कभी कोई जवाब नहीं मिला.

वे पूछती हैं कि पीएम मोदी इस पर बात क्यों नहीं करते.

विपक्ष में रहते हुए नरेंद्र मोदी ने अपनी कई चुनावी रैलियों में दिल्ली को 'रेप कैपिटल' कहा था.

फिर 2014 में सत्ता में आने के बाद उन्होंने अपने पहले स्वतंत्रता दिवस के भाषण में बढ़ते बलात्कारों पर बात भी की थी और लोगों से बेटों की सही परवरिश पर भी सलाह दी थी.

उन्होंने कहा था, "जब हम इन बलात्कारों की ख़बर सुनते हैं तो हमारा सिर शर्म से झुक जाता है."

"हर घर में अभिभावक अपनी बेटियों से पूछते हैं कि वे कहां जा रही हैं, कब लौटेंगी और उन्हें पहुंचने पर जानकारी देने के लिए कहते हैं."

"लेकिन क्या आपने कभी बेटे से भी पूछा है कि वो कहां जा रहा है, उसके दोस्त कौन हैं? आख़िर जो लड़का बलात्कार कर रहा है वो किसी का तो बेटा है."

भारत, जहां का समाज पितृसत्तात्मक समाज है, वहां उनकी ये बात काफ़ी महत्वपूर्ण थी.

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लेकिन उसके बाद से यौन हिंसा के केस बढ़ते रहे जिनमें कई प्रभावशाली लोग भी शामिल थे. लेकिन नरेंद्र मोदी ने सिर्फ़ एक बार 2018 में ट्वीट किया कि भारत की बेटियों को इंसाफ़ मिलेगा. उन दिनों उनकी पार्टी के कुछ सदस्यों पर बलात्कार के आरोप सुर्खियों में थे.

योगिता कहती हैं कि कोई जादू की छड़ी नहीं है जो इस समस्या को एकदम से ख़त्म कर देगी.

उनके मुताबिक़ बहुत कुछ बदलने की ज़रूरत है जैसे पुलिस और न्यायिक बदलाव, पुलिस और वकीलों को जेंडर के मुद्दों पर ज़्यादा संवेदनशील किया जाना और बेहतर फोरेंसिक जांच.

वे कहती हैं कि 'इन सबसे ज़्यादा जेंडर को लेकर जागरूकता होनी चाहिए और हम सबको लोगों की मानसिकता बदलने का काम करना होगा ताकि भविष्य में ऐसे अपराध हों ही नहीं.'

साथ ही वो कहती हैं कि यही सबसे मुश्किल काम है.

उनका कहना है, "ऐसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा कि केंद्र या दिल्ली सरकार यौन हिंसा को लेकर गंभीर है."

"मैं 8 साल से लोगों के बीच काम कर रही हूं. मुझे तो कोई नहीं मिला जो इस मुद्दे को लेकर गंभीर हो."

योगिता कहती हैं कि हर जगह हर मुद्दे पर होर्डिंग लगे हैं जैसे सरकार की उपलब्धियों के, कोविड-19 के, ड्रग्स से बचने के.

"लेकिन क्या शहर में ऐसा कोई होर्डिंग देखा है जो बलात्कार और यौन हिंसा को लेकर हो?"

"हमने मोदी जी के नारे वाले होर्डिंग तो देखे हैं कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, हमें इसे बदल देना चाहिए- 'बेटा पढ़ाओ बेटी बचाओ.'

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