भारत-चीन सीमा विवाद: आला अधिकारी ने कहा, चीन ने लक्ष्मण रेखा पार की तो भारत करेगा कार्रवाई- प्रेस रिव्यू

भारत-चीन सीमा

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भारत सरकार के एक आला अधिकारी ने बुधवार को कहा है कि पूर्वी लद्दाख में अगर चीन ने लक्ष्मण रेखा पार की भारत इसके जवाब में 'ज़रूरी कार्रवाई' करेगा.

अख़बार 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' में छपी एक ख़बर के अनुसार अधिकारी ने ये भी कहा है कि चीनी सेना के निर्माण कार्य से निपटने के लिए और ऊंचाई पर जाने की कोशिश से उन्हें रोकने के लिए भारत ने लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल के पास फॉर्वर्ड पोज़िशन पर सेना की तैनाती बढ़ा दी है.

अख़बार लिखता है कि गुरुवार को मॉस्को में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी की एक अहम बैठक होने वाली है उससे पहले सोमवार को पूर्वी लद्दाख के चुशुल सेक्टर के मखपुरी टॉप के नज़दीक चीनी सैनिकों की तरफ से गोलियां चलाई गई हैं. 45 साल में ये पहली बार है जब एलएसी पर गोलियां चलाई गई हैं.

इससे पहले अगस्त 29 और 30 को चुशुल इलाक़े के पेंगॉन्ग सो के नज़दीक चीनी सैनिक टुकड़ियों और सेना के टैंकों का मार्च निकाला गया था. माना जा रहा है कि भारतीय सेना को डराने के उद्देश्य इस शक्तिप्रदर्शन का आयोजन किया गया था.

आला अधिकारी के हवाले से अख़बार लिखता है कि सीमा पर जो हो रहा है उसे केवल क्रिया-प्रतिक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

उनका कहना है "मौजूदा तनाव के लिए निर्देश चीनी के आला राजनीतिक-सैनिक अधिकारियों की तरफ से आ रहे हैं न कि स्थानीय स्तर के कमांडरों से. ऐसे में ये तनाव कोई भी मोड़ अख्तियार कर सकता है. लेकिन अगल चीन युद्ध शुरू करना चाहता है तो उसे इसकी बड़ी कीमत चुकानी होगी."

आला अधिकारी ने ये भी कहा है कि चीनी सेना सीमा पर कहीं और ऊंचाई वाले इलाक़ों पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर सकती है और इससे निपटने के लिए भारतीय कमांडरों को 'पूरी आज़ादी' दी गई है ताकि वो स्थिति के अनुसार निर्णय ले सकें.

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रफ़ाल के भारत आने की पूरी कहानी

रफ़ाल लड़ाकू विमान बनेंगे सेना का हिस्सा

फ्रांस से खरीदे गए रफ़ाल लड़ाकू विमान गुरुवार को औपचारिक तौर पर भारतीय सेना का हिस्सा बन जाएंगे.

अंग्रेज़ी अख़बार 'इंडियन एक्सप्रेस' में छपी एक ख़बर के अनुसार इन विमानों को सेना के सत्रहवीं स्क्वाड्रन में शामिल किया जाएगा जिसे गोल्डन एरोज़ भी कहा जाता है. इसी साल जुलाई को पांच रफ़ाल लड़ाकू विमानों का पहला दस्ता भारत पहुंचा था.

इसके लिए वायुसेना के अंबाला स्टेशन पर ख़ास समारोह का आयोजन किया गया है जिसमें भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांसीसी रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली शामिल होंगे.

ये पांच विमान साल 2016 में भारत और फ्रांस के बीच 36 रफ़ाल लड़ाकू विमान के लिए हुए 59,000 करोड़ रुपये के करार का हिस्सा हैं.

अख़बार के अनुसार इस फाइटर जेट का अगला दस्ता इस साल अक्तूबर तक भारत आएगा और आख़िरी दस्ता साल 2021 के आख़िर तक मिलेगा.

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दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

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68 साल में पहली बार नहीं मिलेगा नहीं मिलेगा ईपीएफ़ओ का पूरा ब्याज

कोरोना महामारी के दौर में मोदी सरकार इस साल के दिसंबर तक कर्मचारी भविष्य निधि का पूरा ब्याज नहीं देगी.

अख़बार 'द टेलीग्राफ़' में छपी एक ख़बर के अनुसार साल 1952 में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफ़ओ के बनने बाद ये पहली बार है जब सरकार एक बार में खाताधारकों को पूरा ब्याज नहीं देगी.

अख़बार के अनुसार ईपीएफ़ओ बोर्ड के सदस्यों की बुधवार को हुई एक बैठक में ये फ़ैसला लिया गया है साल 2019-20 के लिए सरकार खाताधारकों को 8.5 फीसदी के अनुसार से जो ब्याज दिया जाएगा को वो दो बार में दिया जाएगा.

निवेश पर 8.15 फीसदी का ब्याज अभी दिया जाएगा. इसके बाद दिसंबर में एक बार फिर बोर्ड के सदस्यों की बैठक होगी जिसमें खाताधारकों को बचा 0.35 फीसदी ब्याज देने के संबंध में फ़ैसला लिया जाएगा. केंद्रीय श्रम मंत्रालय के तहत आने वाले भविष्य कर्मचारी निधि में क़रीब छह करोड़ खाताधारक हैं.

इससे पहले ईपीएफ़ओ ने पिछले वित्त वर्ष में 8.5 फीसदी ब्याज के भुगतान पर घाटे की भरपाई के लिए एक्सचेंज ट्रेडेड फंड से अपने कुछ निवेश से पैसा निकालने के बारे में विचार किया था. लेकिन कोरोना महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन के चलते मार्केट की बिगड़ी स्थिति को देखते हुए इस योजना को टाल दिया गया था.

अख़बार के अनुसार संगठन ने एक बयान में कहा है कि, "कोरोना महामारी के कारण पैदा हुई परिस्थिति के मद्देनज़र केंद्रीय बोर्ड ने इस साल सरकार को 8.50 फीसदी की दर से ब्याज देने की सलाह दी है. इसमें 8.15 फीसदी ब्याज डेट इनकम से आएगा और बाक़ी का 0.35 फीसदी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में किए निवेश से पैसा निकालने के बाद जो आएगा उससे दिया जाएगा."

हालांकि इसकी अर्थ ये भी है कि यदि साल के आख़िर तक एक्सचेंज ट्रेडेड फंड की बाज़ार स्थिति नहीं सुधरी तो निवेश का पैसा निकालने को लेकर बोर्ड फिर से विचार करेगा. अख़बार का कहना है कि संगठन ने एक लाख करोड़ रुपये का निवेश एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में किया है जो फिलहाल नेगेटिव ग्रोथ दर्शा रहा है.

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भारत में रुका ऑक्सफ़र्ड के वैक्सीन का ट्रायल

भारत में दवाओं और वैक्सीन को मंज़ूरी देने वाली सरकारी एजेंसी ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीजीसीआई) ने ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी की कोरोना वैक्सीन का ट्रायल कर रही सीरम इंस्टीट्यूट को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि पूरे विश्व में जब एस्ट्राज़ेनेका ने इस वैक्सीन के टार्यल रोके हैं तो भारत में इन्हें क्यों नहीं रोका जाना चाहिए.

इकोनोमिक्स टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार ऑक्सफ़र्ड की वैक्सीन को बड़े पैमाने पर बना रही एस्ट्राज़ेनेका के साथ हुए करार के तहत पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट भारत में इस वैक्सीन के ट्रायल कर रही है. इसके लिए डीजीसीए से दूसरे और तीसरे चरण के ट्रायल के लिए इंस्टीट्यूट के अनुमति मिली है.

डीजीसीआई ने पूछा है कि जब अमरीका, ब्रिटेन, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका में ट्रायल रोक दिए गए हैं तो भारत में इसे क्यों नहीं रोका गया.

अख़बार के अनुसार सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने बुधवार को कहा है कि संस्था डीजीसीए के आदेशों का पालन करेगी और सुरक्षा चिंताओं के मद्देनज़र क्लिनिकल ट्रायल रोक देगी.

इससे पहले ब्रितानी कंपनी एस्ट्राज़ेनेका ने वैक्सीन का ट्रायल ये कहते हुए रोक दिया था कि ह्यूमन ट्रायल के दौरान एक वॉलंटियर में अनपेक्षित बीमारी के लक्षण देखे गए हैं जो वैकसीन के साइड इफेक्ट हो सकते हैं.

सीरम इंस्टीट्यूट में फिलहाल वैक्सीन के दूसरे चरण का क्लिनिकल ट्रायल जारी था जिसके अगले सप्ताह तीसरे चरण में प्रवेश करने की योजना थी.

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COVER STORY: ऐसे बन रही है कोरोना की वैक्सीन

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