एमएसपी के लिए प्रतिबद्ध पर ये कभी क़ानून का हिस्सा नहीं रहाः कृषि मंत्री - प्रेस रिव्यू

नरेंद्र सिंह तोमर

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केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में कहा है कि सरकार एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य के प्रति प्रतिबद्ध है लेकिन ये कभी भी क़ानून का हिस्सा नहीं रहा है. विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए तोमर ने कहा कि जब वो सत्ता में थे तब उन्होंने इस पर क़ानून क्यों नहीं बनाया.

उन्होंने कहा, 'मैं विपक्ष के लोगों से कहना चाहूंगा कि आप सब सालों तक सरकार में रहे हैं, अगर एमएसपी के लिए क़ानून ज़रूरी था तो आपने ये क़ानून क्यों नहीं बनाया. एमएसपी क़ानून का अंग पहले भी नहीं था और एमएसपी क़ानून का अंग आज भी नहीं है.'

उन्होंने संकेत दिया कि सरकार एमएसपी पर विपक्ष की मांग नहीं मांगेगी.

केंद्र सरकार के हाल ही में लाए गए तीन विधेयकों का किसान बड़े पैमाने पर विरोध कर रहे हैं. सरकार इन विधेयकों को किसान हितैषी बता रही है जबकि किसानों का कहना है कि ये विधेयक कार्पोरेट के हाथों में कृषि क्षेत्र देने के लिए लाए गए हैं और इनसे किसानों का नुकसान होगा. किसानों को आशंका है कि उन्हें अपनी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं मिल सकेगा.

किसानों की मांग है कि एमएसपी को क़ानून में जगह दी जाए और एमएसपी से कम दाम पर ख़रीद को अपराध बनाया जाए.

रफ़ाल निर्माता ने ऑफ़सेट कांट्रैक्ट पूरा नहीं कियाः सीएजी

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इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक सीएजी ने कहा है कि रफ़ाल की निर्माता कंपनी ने ट्रांसफर ऑफ़ टेक्नोलॉजी यानी तकनीक के हस्तांतरण का वादा पूरा नहीं किया है. भारत ने फ्रांस की विमान निर्माता कंपनी दासो से 36 रफ़ाल लड़ाकू विमान ख़रीदे हैं.

बुधवार को जारी एक बयान में सीएजी ने कहा है - ये पता चला है कि मुख्य कांट्रेक्ट हासिल करने के लिए विदेशी वेंडरों ने कई ऑफ़सेट कमिटमेंट किए लेकिन बाद में इन्हें पूरा करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई.

सीएजी ने कहा - उदाहरण के तौर पर 36 मीडियम मल्टी रोल कांबेट एयरक्राफ्ट के आफ़सेट कांट्रेक्ट में वेंडर दासो एविएशन ने अपनी ऑफ़सेट ज़िम्मेदारी का तीस प्रतिशत पूरा करने के लिए डीआरडीओ को उच्च तकनीक देने का वादा किया था. डीआरडीओ भारत में हल्के लड़ाकू विमान का इंजन (कावेरी) बनाने के लिए तकनीकी मदद चाहता था, लेकिन वेंडर ने अभी तक तकनीक साझा करने की पुष्टि नहीं की है.

भारत ने फ्रांस से 36 रफ़ाल लड़ाकू विमान ख़रीदे हैं जिनका भारत में ज़बरदस्त प्रचार हुआ है. सरकार ने इस विमान ख़रीद को भारती सुरक्षा की दृष्टि से बेहद अहम बताया है.

ये ख़बर आज द हिंदू और द टाइम्स ऑफ़ इंडिया के पहले पन्ने पर भी प्रकाशित है.

वायरस को रोकने के लिए लॉकडाउन लगा सकते हैं सीएमः मोदी

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बात सरहद पार

दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

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द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित सात प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से कहा है कि वायरस को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर एक या दो दिन के लॉकडाउन लगाने का फैसला उन्हें ही करना है.

प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों से सबसे ज़्यादा प्रभावित 60 ज़िलों की स्थिति को ब्लॉक स्तर पर मॉनिटर करने के लिए भी कहा है.

कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिल नाडु, आंध्र प्रदेश, नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने बुधवार को वीडियो कांफ्रेंस के ज़रिए प्रधानमंत्री के साथ वार्ता की है. इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल थे.

प्रधानमंत्री ने कहा,"देशभर में लगाए गए लॉकडाउन ने संक्रमण की दर में नियंत्रण और क्षमता वृद्धि में कुछ हद तक मदद की है. लेकिन अब से छोटे स्तर पर लॉकडाउन लगाना ही सही रास्ता है ताकि रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर कम से कम असर हो. राज्य सरकारें ये फ़ैसला ख़ुद ही करें कि क्या एक या दो दिन का लॉकडाउन लगाना मददगार हो सकता है."

चीन की युद्ध नीति पर रूस की छाप?

हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि लद्दाख में चीन की की युद्धनीति पर रूस की छाप नज़र आती है. भारतीय वायुसेना के एक शीर्ष अधिकारी ने अख़बार से कहा है, नियंत्रण रेखा के पास पूर्वी लद्दाख और अक्साइ चिन इलाक़े में पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी के पचास हज़ार सैनिकों की तैनाती, साथ ही भारी हथियारों और मिसाइलों की तैनाती न सिर्फ़ चीन के सैन्य हथियारों बल्कि उसकी युद्धनीति पर रूस के प्रभाव का संकेत है.

शीर्ष अधिकारी ने अख़बार से कहा है कि जब भी कभी चीन की ओर से हमला होगा, उसमें भारी गोलीबारी और रॉकेट फ़ायर के कवर में सैनिक आगे बढ़ेंगे. ज़मीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलें चीन के भारी हथियारों की भारतीय वायुसेना के हमलों से रक्षा करेंगी. ये युद्ध लड़ने का पुराना सोवियत तरीका है जिसमें सैनिक नीचे छुप कर चलते हैं और उन्हें हवा से सुरक्षा दी जाती है.

रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय वायुसेना ने चीन से युद्ध की स्थिति में हर परिस्थिति से निबटने की तैयारी की है और उन्हें लेकर युद्धाभ्यास भी किए हैं.

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