सुरेश अंगड़ी, जो भविष्य में बन सकते थे कर्नाटक के मुख्यमंत्री

  • इमरान क़ुरैशी
  • बीबीसी हिंदी के लिए
सुरेश अंगड़ी

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सुरेश अंगड़ी

कोरोना वायरस संक्रमण के कारण बुधवार को केंद्रीय रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगड़ी का एम्स में निधन हो गया. उनकी पहचान एक ऐसे मंत्री के रूप में थी जो समस्या का हल ज़मीनी तरीक़े से निकालने में माहिर थे.

कर्नाटक में रेल सेवाओं को बेहतर बनाने का काफ़ी श्रेय उन्हें दिया जाता रहा है. शायद यही एक कारण था कि उन्हें मौजूदा मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा का उत्तराधिकारी भी माना जाने लगा था.

बेलगावी लोकसभा सीट से चार बार लगातार सांसद चुने जाने वाले सुरेश अंगड़ी को कर्नाटक के लिए नई ट्रेनें शुरू करने और यात्रियों की समस्याएँ कम करने की कोशिशों के वजह से बीजेपी के अलावा विपक्ष का भी चहेता माना जाता था. राज्य में ट्रेन सेवाओं की बेहतरी के लिए अभियान चलाने वाले लोग भी उनके काम से ख़ुश थे.

बेंगलुरू के लिए एक उप-नगरीय रेल सिस्टम के लिए अभियान चलाने वाले कार्यकर्ता संजीव ध्यानाम्वर ने बीबीसी हिंदी को बताया, "वो बहुत ही ज़मीनी व्यक्ति थे. जब भी हम कुछ मांग करते वो तुरंत मौक़े पर आते और अधिकारियों को उस माँग से जुड़ी हिदायत देते. वो डेडलाइन देकर जाते और हर महीने फ़ॉलोअप करते."

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सुरेश अंगड़ी का जन्म बेलगावी के गाँव में हुआ था. वो बाद में पढ़ाई के लिए अपने एक चाचा के घर बेलगावी शहर में आ गए. शहर के कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही वो राजनीति से जुड़े.

उनके चाचा लिंगराज पाटिल उस समय कृषि उत्पाद बाज़ार समिति के चेयरमैन थे. अंगड़ी 1996 में बीजेपी में शामिल हुए और अगले साल ही उन्हें ज़िलाध्यक्ष बना दिया गया. तब से उन्होंने बेलगावी को अपनी सियासी कर्मभूमि बनाया और चार बार लगातार वहीं से सांसद चुने गए.

छोटी-छोटी बातों का ध्यान

अंगड़ी कर्नाटक में रेलवे से जुड़ी छोटी-छोटी माँगों में भी दिलचस्पी दिखाते थे. बेंगलुरू से बेलगावी जाने वाली एक ट्रेन सुबह तीन बजे बेलगावी पहुँचती थी. उन्होंने इसे दुरुस्त करवाने में देर नहीं की और एक नई ट्रेन शुरू कर दी. ऐसे ही भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुद्दों का निपटारा करवाते हुए उन्होंने धारवाड़-किट्टूर-बेलगावी ट्रेन को भी शुरू किया.

संजीव ध्यानाम्वर कहते हैं, "उन्होंने बेंगलुरू उप नगरीय रेल परियोजना की हमारी माँग प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुँचा दी है. अब बस उसे केंद्रीय कैबिनेट से हरी झंडी मिलना बाक़ी है. शायद यही वजह है कि उनकी तुलना कांग्रेस के ज़माने में कर्नाटक से रेलवे मंत्री रहे सीके जाफ़र शरीफ़ से की जाती थी. जाफ़र शरीफ़ ने देश के रेल नेटवर्क को ब्रॉड गेज में तब्दील किया था."

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बेलगावी के एक वरिष्ठ पत्रकार सरजू काटकर बताते हैं, "बहुत से लोग ये तक नहीं जानते कि उनके निजि सचिव कौन थे. क्योंकि वो हर बार ख़ुद ही फ़ोन उठाते थे. वो समाज के हर तबक़े को साथ लेकर चलने में यक़ीन रखते थे."

काटकर उनसे जुड़ा एक क़िस्सा सुनाते हैं.

"बेलगावी में किसान अपनी ज़मीन के अधिग्रहण के बदले बेहतर मुआवज़े की माँग कर रहे थे. उन्हीं दिनों बेलगावी में ही राज्य की विधान सभा की बैठक हो रही थी. अपने तमाम सुरक्षाकर्मियों की सलाह को नज़रअंदाज़ करते हुए अंगड़ी धरना दे रहे किसानों के बीच जा बैठे और उनसे बातचीत करने लगे. थोड़ी देर में आला अधिकारी भी वहीं बुलाए गए. कुछ घंटों के भीतर प्रदर्शनकारी, अंगड़ी को उसी स्थान सम्मानित कर रहे थे."

सरजू काटकर ने बीबीसी हिंदी को बताया, "मुख्यमंत्री येदियुरप्पा की तरह वो भी लिंगायात थे, शायद इसलिए उनका नाम उत्तराधिकारी के रूप में भी लिया जाता रहा. केंद्रीय नेतृत्व उनके बारे में जानकारियाँ भी इकट्ठा कर रहा था."

कर्नाटक में पिछले कुछ हफ़्तो में ये चर्चा भी गर्म थी कि बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व येदियुरप्पा के उत्तराधिकारी की तलाश कर रहा है क्योंकि अगले विधानसभा चुनाव तक मुख्यमंत्री की उम्र 81 साल हो जाएगी. ऐसे क़यास भी थे कि इन चर्चाओं में एक प्रमुख नाम सुरेश अंगड़ी का था.

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