इस साल यानी 2021 में घर ख़रीदना फ़ायदेमंद या नुकसानदेह

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  • बीबीसी संवाददाता
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छवि डांग अपने नए निवेश से काफ़ी खुश हैं. उन्होंने अपने सपनों का घर ख़रीदा है. बीबीसी से वो कहती हैं, "मैं हमेशा साउथ मुंबई में रहना चाहती थी. इस महामारी के दौरान ये मुमकिन हो पाया क्योंकि बाज़ार में कीमतों में कमी आई. वो प्रॉपर्टी जो आमतौर पर 7 से 8 करोड़ रुपये में मिलती थीं, अब 5 से 6 करोड़ में मिल रही हैं. होम लोन भी सस्ता है. मुझे लगता है कि अगर आपके पास पैसा है तो घर ख़रीदने का ये सही समय है."

37 साल की डांग एक पब्लिक रिलेशन कंपनी चलाती हैं और ठाणे में रहती हैं. "गिरती कीमतों को देखकर मैंने पिछले साल नवंबर में घर ख़रीदने का फ़ैसला किया था. मैं इसका फ़ायदा उठाना चाहती थी."

इंडिया रियल इस्टेट रिपोर्ट 2020 के मुतबिक एक सर्वे में भाग लेने वाले 89 प्रतिशत लोगों का मानना है कि 2021 प्रॉपर्टी ख़रीदने के लिए सही साल है. ये सर्वे एक रियल इस्टेट प्लैटफॉर्म नोब्रोकर.कॉम के सर्वे ने किया है, जो देश के सभी बड़े शहरों में काम करती है.

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कोरोना वायरस संक्रमण के बावजूद घरों की बिक्री बढ़ी

नोब्रोकर.कॉम के को-फाउंडर और और चीफ़ बिज़नेस ऑफ़िसर सौरभ गर्ग ने बीबीसी को बताया, "दिलचस्प बात ये है कि जवान लोग जो पहले प्रॉपर्टी नहीं ख़रीदना चाहते थे, वो भी अब इस ख़रीद की योजना बना रहे हैं. सर्वे में शामिल 25 से 40 साल की उम्र के 63 प्रतिशत लोगों ने प्रॉपर्टी ख़रीदने में दिलचस्पी दिखाई. पिछले साल ये आंकड़ा 49 प्रतिशत था."

प्रॉपर्टी कनसल्टेंट जेएलएल इंडिया के मुताबिक जुलाई से सितंबर के मुक़ाबले अक्तूबर से दिसंबर के बीच घरों की ख़रीद में 51 प्रतिशत की बढ़ेतरी दर्ज की गई. इस मामले में सबसे अधिक तेज़ी महाराष्ट्र के पुणे शहर में देखी गई. यहाँ यह तेज़ी 147 प्रतिशत तक देखी गई.

जेएलएल की रिपोर्ट मुख्यतौर पर सात शहरों (मुंबई, बेंगलुरू, दिल्ली, पुणे, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद) पर आधारित है और इसके मुताबिक घरों की बिक्री में तेज़ी आई है.

एनेरॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट की रिपोर्ट भी इसी ओर इशारा करती है. उनके मुताबिक अक्तूबर से दिसंबर के बीच सात शहरों में 50,900 यूनिट की बिक्री दर्ज की गई.

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नौकरी जाने, सैलरी घटने का घरों की ख़रीद पर असर नहीं देखा गया

एक और दिलचस्प बात सामने आई है. इस दौरान नौकरियों के जाने और सैलरी कम होने के असर घरों की बिक्री पर देखने को नहीं मिला. कुछ जानकारों का मानना है कि कोरोना महामारी के दौरान लोगों को अपना घर लेने की ज़रूरत अधिक महसूस हुई.

केयर रेटिंग्स की रिसर्च एनालिस्ट उर्वर्शी एच जगाशेठ ने बीबीसी को बताया, "कुछ लोग ये मान सकते हैं कि महामारी के दौरान घरों की बिक्री बिल्कुल रुक गई होगी, लेकिन कंपनियों के वर्क फ्रॉम होम पर ज़ोर देने के कारण घर ही ऑफिस बन गए हैं. लिहाजा लोग अब अपना घर चाहते हैं, जहाँ जगह भी ज़्यादा हो. सस्ते होम लोन,आकर्षक कीमतें, आसान पेमेंट प्लान के साथ साथ डिमांड बढ़ाने के लिए सरकार के उठाए गए कदम से घरों के ख़रीदार बढ़े हैं, ख़ासतौर पर वहाँ जहाँ टैक्ट से जुड़े फ़ायदे हैं."

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हीरानंदनी ग्रुप के को-फाउंडर और एमडी डॉ. निरंजन हीरानंदनी मानते हैं कि सरकार की ओर से 2020 में की गई मदद का असर 2021 में दिखेगा.

उन्होंने कहा, "18 हज़ार करोड़ रुपये की अतिरिक्त फंडिग जो पीएमएवाई (प्रधानमंत्री आवास योजना) के तहत दी गई है, 2 करोड़ रुपये तक के घरों के लिए इनकम टैक्स में डेवलेपर्स और ख़रीदारों को राहत दी गई है, इसके अलावा दूसरी घोषणाओं का सकारात्मक असर 2021 में होगा."

नेशनल रियल इस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (महाराष्ट्र) की वाइस चेयरमैन मंजू याग्निक के मुताबिक, "सरकार की ओर से लगातार पॉलिसी के मामले में समर्थन, स्टैंप ड्यूटी और ब्याज कम करने के कारण 2021 उन लोगों के लिए सबसे अच्छा साल होगा जो अब तक घर नहीं ख़रीद सके हैं."

एनेरॉक ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि रिहायशी सेग्मेंट 2020 में अपने निचले स्तर पर पहुँच गया, इसका मतलब है कि कीमतें सबसे कम हैं- इसमें अभी डिस्काउंट और मोल तोल को नहीं जोड़ा गया है.

एनेरॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट के चेयरमैन अनुज पुरी के मुताबिक, "शहरों और अच्छे माइक्रो-मार्केट में, जहाँ बनी बनाई प्रॉपर्टी उपलब्ध हैं, नहीं बनने से जुड़ा कोई डर नहीं है, और ख़रीद लेने से किराया नहीं देना होगा. पिछले सालों की तुलना में बड़े डेवलपर्स हर बजट की प्रॉपर्टी बना रहे हैं. इसलिए मुमकिन है कि किसी अच्छी जगह पर अच्छी क्वॉलिटी के मकान मिल जाएं."

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कीमतों का क्या?

विशेषज्ञों की राय है कि देश भर में संपत्ति की कीमतें आने वाले समय में बढ़ेंगी.

एस रहेजा रिएलिटी के डायरेक्टर राम रहेजा के मुताबिक, "घरों की मांग को पूरा करने के लिए नई शुरू की गई परियोजनाओं की लागत बढ़ेगी क्योंकि कच्चे माल जैसे स्टील और सीमेंट के दाम बढ़ रहे हैं. घरों की डिमांड अभी बढ़ेगी इसलिए कीमतें भी बढ़ेंगी. 2021 में कीमतें 10 प्रतिशत बढ़ सकती हैं."

उन्होंने कहा, "2021 में सरकार से उम्मीदें होंगी कि वो इनपुट टैक्स क्रेडिट के साथ जीएसटी लाए, ब्याज की दरें, प्रीमियम और सेस को कम किया जाए."

स्वरूप अनीश के मुताबिक, "उपभोक्ता बिजली, गैस और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए बहुत पैसा दे रहा है. सरकार को इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट को कम करना होगा."

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