भारत-पाकिस्तान से अमेरिका के रिश्तों पर क्या बोले बाइडन के रक्षा मंत्री?

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रिटायर्ड जनरल लॉयड ऑस्टिन

अमेरिका के रक्षा मंत्री के पद के लिए नामांकित लॉयड ऑस्टिन ने कहा है कि 'जो बाइडन प्रशासन का उद्देश्य भारत के साथ अमेरिका की रक्षा साझेदारी को बढ़ाना रहेगा.'

अमेरिका के नये राष्ट्रपति जो बाइडन ने रक्षा मंत्री के पद के लिए रिटायर्ड जनरल लॉयड ऑस्टिन के नाम पर मोहर लगाई है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, मंगलवार को अपने नामांकन पर सुनवाई के दौरान सीनेट की एक समिति से ऑस्टिन ने कहा, "यदि मेरे नाम की पुष्टि होती है, तो भारत के साथ हमारे रक्षा संबंधों के मामले में मेरा उद्देश्य दोनों देशों के बीच साझेदारी और सहयोग को और मज़बूत करना रहेगा, ताकि भारत और अमेरिका, दोनों देशों के सैन्य हित सुरक्षित रह सकें."

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क्वॉड का ज़िक्र

इस दौरान ऑस्टिन ने कहा, "हम क्वॉड सुरक्षा वार्ता और अन्य क्षेत्रीय बहुपक्षीय कार्यक्रमों के माध्यम से भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को और गहरा, और व्यापक बनाने की भी कोशिश करेंगे."

'द क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग' जिसे क्वॉड (QUAD) के नाम से जाना जाता है, वो अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक 'अनौपचारिक राजनीतिक वार्ता समूह' है.

साल 2007 में जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे ने पहली बार इसका प्रस्ताव रखा था. भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने इसे समर्थन दिया, लेकिन 2007 में शुरू होने के बाद क्वॉड अगले 10 सालों तक निष्क्रिय रहा.

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साल 2017 में एक बार फिर क्वॉड के देश मिले. 2019 में बैठक का स्तर बढ़ा और चारों देशों के विदेश मंत्रियों ने इसमें हिस्सा लिया.

भारत की कोशिश रही है कि क्वॉड को लेकर कभी किसी देश को यह संकेत ना जाये कि ये कोई सैन्य गठबंधन है.

मगर दुनिया की नज़र में क्वॉड भले ही चार समान विचारधारा वाले देशों का एक समूह हो, पर इसे 'एंटी-चाइना' यानी चीन-विरोधी समूह के तौर पर ही देखा जाता रहा है.

और मंगलवार को अमेरिका के रक्षा मंत्री के पद के लिए नामांकित लॉयड ऑस्टिन ने इसी समूह का ज़िक्र किया.

ऑस्टिन ने इस बातचीत में पाकिस्तान से अमेरिका के रिश्तों के बारे में भी बात की.

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'पाकिस्तान की अहम भूमिका'

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उन्होंने कहा, "यदि मेरे नाम की पुष्टि होती है, तो मैं पाकिस्तान को यह संदेश ज़रूर देना चाहूँगा कि वो चरमपंथियों और हिंसक समूहों को अपने यहाँ ज़मीन तलाशने ना दे. हम पाकिस्तान के साथ कुछ अहम मुद्दों पर सहयोग बनाये रखेंगे और पाकिस्तान की फ़ौज के साथ भी रिश्ते बेहतर करना चाहेंगे. हमें लगता है कि अफ़ग़ानिस्तान में जब भी कोई राजनीतिक समाधान निकलेगा, तो उसमें पाकिस्तान की अहम भूमिका होगी. हमें अल-क़ायदा को हराने और क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए भी पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करना होगा."

ऑस्टिन ने कहा कि 'उनकी समझ ये है कि पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान शांति प्रक्रिया के समर्थन में अमेरिका की गुज़ारिशों को पूरा करने के लिए कुछ ज़रूरी क़दम उठाये हैं. साथ ही पाकिस्तान ने भारत विरोधी समूहों, जैसे लश्करे-तैय्यबा और जैश-ए-मोहम्मद के ख़िलाफ़ भी कुछ क़दम उठाये हैं. हालांकि, इस मामले में प्रगति अभी अधूरी है.'

उन्होंने कहा, "सुरक्षा सहायता निलंबन के अलावा कई ऐसी वजहें हैं जिनका पाकिस्तान के सहयोग पर असर पड़ सकता है. अफ़ग़ानिस्तान के साथ बातचीत और पुलवामा हमले के बाद उठाये गए क़दम, उन वजहों में शामिल हैं."

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई में पाकिस्तान से सहयोग में कमी' का हवाला देते हुए 2018 में पाकिस्तान को हर वित्तीय और सुरक्षा सहायता निलंबित कर दी थी. लेकिन लॉयड ऑस्टिन ने अपने हालिया बयानों में कुछ और ही संकेत दिये हैं.

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