स्वपन दासगुप्ता ने घिरने के बाद राज्यसभा से दिया इस्तीफ़ा

स्वपन दासगुप्ता

इमेज स्रोत, Getty Images

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार घोषित किए गए स्वपन दासगुप्ता ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है.

भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व पत्रकार स्वपन दासगुप्ता को पश्चिम बंगाल में तारकेश्वर सीट से उम्मीदवार बनाया है. स्वपन दासगुप्ता राज्यसभा में मनोनीत सांसद थे.

दासगुप्ता ने ट्वीट करके बताया है कि उन्होंने 'बेहतर बंगाल की लड़ाई के लिए राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है.'

उन्होंने ट्वीट में लिखा, "मैंने एक बेहतर बंगाल की लड़ाई के लिए ख़ुद को पूरी तरह से प्रतिबद्ध करने के लिए आज राज्यसभा से इस्तीफ़ा दे दिया है. मुझे उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में तारकेश्वर विधानसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन करूंगा."

टीएमसी-कांग्रेस ने बनाया था मुद्दा

इसी बात को लेकर विपक्षी कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने उनकी उम्मीदवारी पर सवाल उठाए थे और कहा था कि मनोनीत सदस्य होने के नाते पहले उन्हें अपने पद से त्यागपत्र देना चाहिए, फिर चुनावी मैदान में उतरना चाहिए.

राज्यसभा के चेयरमैन और उपराष्ट्रति वेकैंया नायडू को कांग्रेस के चीफ़ व्हिप जयराम रमेश ने चिट्ठी लिखी थी और कहा था कि स्वपन दासगुप्ता ने न तो सदन से त्यागपत्र दिया है और न ही कोई पार्टी ज्वॉइन की है, फिर भी वे विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं.

इमेज स्रोत, ANI

चिट्ठी में क्या लिखा था?

अपनी चिट्ठी में जयराम रमेश ने लिखा है- "क्या राज्यसभा का कोई मनोनीत सदस्य, जिसने नामांकन के छह महीने के अंदर कोई पार्टी ज्वॉइन नहीं की और राज्यसभा में वो किसी पार्टी का सांसद नहीं है, वो मनोनीत सदस्य के पद से इस्तीफ़ा दिए बिना संसदीय या विधानसभा चुनाव कैसे लड़ सकता है?"

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी आरोप लगाया था कि स्वपन दासगुप्ता ने संविधान की 10वीं अनुसूची का उल्लंघन किया है.

महुआ मोइत्रा ने संविधान की 10वीं अनुसूची को ट्वीट करते हुए लिखा है कि संविधान के मुताबिक़ अगर कोई मनोनीत सांसद शपथ लेने के छह महीने के बाद किसी पार्टी की सदस्यता लेता है, तो उसकी सदस्यता चली जाएगी.

महुआ ने लिखा है कि स्वपन दासगुप्ता ने अप्रैल 2016 में शपथ ली थी और अभी तक वे किसी पार्टी के सदस्य नहीं हैं. इस अधार पर बीजेपी में शामिल होने के कारण उनकी राज्यसभा सदस्यता ख़त्म कर देनी चाहिए.

औपचारिक रूप से नहीं थे बीजेपी सदस्य

दासगुप्ता को अप्रैल 2016 में राज्यसभा में राष्ट्रपति ने मनोनीत किया था.

इस मामले से अवगत एक व्यक्ति ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा है, "उनके पास चुनाव लड़ने के लिए 19 मार्च तक नामांकन करने का वक़्त था. अगर वो राज्यसभा से इस्तीफ़ा नहीं देते तो उन्हें सदन से निष्कासन भी झेलना पड़ सकता था."

दासगुप्ता का नाम राज्यसभा की वेबसाइट पर मनोनीत सदस्य की सूची में दर्ज है. उनकी तरह राकेश सिन्हा, सुब्रमण्यन स्वामी और रूपा गांगुली को भी मनोनीत किया गया था लेकिन वह बीजेपी के साथ जुड़ चुके थे.

दासगुप्ता औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल नहीं हुए थे. हालांकि, वो पार्टी से संबंधित मंचों पर नज़र आते थे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)