डासना: मुसलमान बोले- बच्चे की पिटाई की पर हमने मंदिर बनाने में मदद की थी- प्रेस रिव्यू

डासना मंदिर

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद के डासना में पानी पीने पर एक मुसलमान बच्चे की पिटाई के बाद चर्चा में आए हिंदू मंदिर के निर्माण में मुसलमानों ने भी मदद की थी. इस मंदिर के बाहर अब मुसलमानों का प्रवेश वर्जित होने का बोर्ड लगा है.

अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ डासना और मसूरी के मुसलमानों का कहना है कि एक समय यहाँ सांप्रदायिक सौहार्द का माहौल था और इस मंदिर के निर्माण में मुसलमानों ने भी मदद की थी.

रिपोर्ट के मुताबिक़ यहां के मुसलमानों का कहना है कि 80 के दशक में मंदिर के निर्माण में मुसलमानों ने भी बढ़-चढ़कर सहयोग किया था.

डासना नगर पंचायत ने भी मंदिर के लिए 6 एकड़ ज़मीन दी थी.

स्थानीय मुसलमानों के मुताबिक़ कुछ साल पहले तक मुसलमान भी मंदिर परिसर में बने तालाब में डुबकी लगाने जाया करते थे. यहां ये मान्यता है कि तालाब के पानी में डुबकी लगाने से बीमारियां ठीक हो जाती हैं.

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मंदिर परिसर में एक मैदान भी है जिसमें कभी अखाड़ा हुआ करता था. इसमें हिंदू और मुसलमान बच्चे पहलवानी का प्रशिक्षण लिया करते थे.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यति नरसिंहानंद सरस्वती के मंदिर का प्रमुख बनने के बाद माहौल बदल गया. पहले उन्होंने दशहरा मेले में मुसलमानों को आने से रोका और फिर मंदिर के बाहर मुसलमानों का प्रवेश वर्जित करने का बोर्ड लगा दिया.

लोगों के मुताबिक़ मेले में लाइट लगाने वाले एक मुसलमान युवक को भी बुरी तरह पीटा गया था. 12 मार्च को इसी मंदिर में पानी पीने गए एक मुसलमान बच्चे को बुरी तरह पीटने का वीडियो वायरल हुआ था.

हालांकि मंदिर के प्रमुख यति नरसिंहानंद सरस्वती का आरोप है कि बच्चा मंदिर का अपमान कर रहा था. उन्होंने बच्चे पर किए गए हमले को सही ठहराया है.

अशोका यूनिवर्सिटी में छात्रों का प्रदर्शन

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बात सरहद पार

दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

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अशोका यूनिवर्सिटी से दो प्रोफ़ेसरों प्रताप भानु मेहता और अरविंद सुब्रमण्यम के इस्तीफ़ों के विरोध में छात्रों ने दो दिन तक कक्षाओं का बहिष्कार करने का ऐलान किया है.

अपना इस्तीफ़ा देते हुए मेहता ने आरोप लगाए थे कि यूनिवर्सिटी उन्हें एक राजनीतिक बोझ समझ रही थी.

प्रताप भानु मेहता भारत के शीर्ष बुद्धिजीवियों में गिने जाते हैं. रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी उनका समर्थन किया है.

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार को जारी एक बयान में अशोका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने कहा है कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन इस बात को स्वीकार करे कि मेहता का राजनीतिक बोझ वाला बयान सही है.

छात्रों ने उन्हें बिना किसी शर्त का ऑफ़र लेटर (नौकरी का प्रस्ताव) दिए जाने की मांग भी की है.

छात्रों का कहना है कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया तो वो यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर का इस्तीफ़ा मांगने के लिए अलग से आंदोलन चलाएंगे.

मेहता के इस्तीफ़े ने भारत और दुनियाभर के अकादमिक जगत को हिला दिया है.

यूनिवर्सिटी के अध्यापकों ने भी वाइस चांसलर को पत्र लिखकर मेहता के इस्तीफ़े पर अपनी चिंताएं ज़ाहिर की हैं.

यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों के संगठन ने भी यूनिवर्सिटी में अकादमिक आज़ादी को बचाने के लिए विचार-विमर्श करने के लिए बैठक की है.

शुक्रवार को अकादमिक जगत के दुनिया भर के 150 से अधिक शीर्ष लोगों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को पत्र लिखकर मेहता के इस्तीफ़े को अकादमिक आज़ादी पर ख़तरनाक हमला बताया था.

अमरीकी रक्षामंत्री ने उठाया मानवाधिकारों का मुद्दा

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द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के दौरे पर अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने कहा है कि उन्होंने भारत में असम के मुसलमानों के मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा उठाया है. ऑस्टिन ने शनिवार को भारत के कैबिनेट मंत्रियों से मुलाक़ात की थी.

अख़बार ने एक सूत्र के हवाले से लिखा है कि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बातचीत के दौरान भी मानवाधिकारों के मुद्दे पर चर्चा हुई. सूत्र के मुताबिक, 'रक्षा मंत्री ने कहा कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के रूप में हमारे लिए मानवाधिकार और मूल्य अहम हैं और हम इनका पालन करते हुए ही आगे बढ़ेंगे.'

इससे पहले पत्रकारों से बात करते हुए ऑस्टिन ने कहा था कि उन्होंने भारत के सामने असम के मुसलमानों के मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा उठाया है.

उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी के साथ मानवाधिकार उल्लंघन पर बात करने का अवसर नहीं मिला.

म्यांमार से शरणार्थी आने दे भारतः मिजोरम सीएम

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म्यांमार में सैन्य शासन के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों के दौरान हिंसा हो रही है.

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक मिजोरम के सीएम ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर म्यांमार से शरणार्थियों को भारत आने देने की मांग की है.

मुख्यमंत्री जोरमथांगा ने गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर म्यांमार से आने वाले राजनीतिक शरणार्थियों को भारत आने की अनुमति देने की मांग की है.

अपने पत्र में सीएम ने लिखा है कि म्यांमार में मानवीय त्रास्दी घटित हो रही है.

म्यांमार में सेना ने फ़रवरी में लोकतांत्रिक सरकार का तख़्तापलट कर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी. तबसे ही वहां सैन्य शासन के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

रिपोर्टों के मुताबिक म्यांमार के पुलिस अधिकारियों समेत कई लोगों ने मिजोरम पहुंचकर शरण मांगी हैं.

भारत की केंद्र सरकार ने सीमावर्ती राज्यों और केंद्रीय बलों से प्रवासियों को सीमा पर ही रोकने और वापस उनके देश भेजने के लिए कहा है.

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