फिलिपींस ने चीन को अपने क्षेत्र में घुसपैठ रोकने के लिए कहा -आज की बड़ी ख़बरें

दक्षिणी चीन सागर

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फिलिपींस ने मांग की है कि चीन उसके समुद्री क्षेत्र से दो सौ नौकाओं को हटाए.

रक्षा मंत्री डेलफिन लौरेंज़ा ने कहा है कि चीन उसके अधिकारों में दखल दे रहा है.

फिलिपींस का कहना है कि जो नौकाएं दक्षिणी चीन सागर में पहुंची हैं, वो मछली मारने वाली नौकाओं नहीं लगतीं.

फिलिपींस का कहना है कि उन नौकाओं पर काम करनेवाले भी चीनी समुद्री मिलिशिया हैं.

पांच साल पहले एक अंतरराष्ट्रीय अदालत ने दक्षिणी चीन सागर के 90 प्रतिशत हिस्से पर संप्रभुता के चीन के दावे को खारिज कर दिया था.

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उत्तर प्रदेश: चित्रकूट में ज़हरीली शराब पीने से चार की मौत

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट ज़िले में ज़हरीली शराब पीने से चार लोगों की मौत हो गई है जबकि कई लोग बीमार हो गए हैं जिनका इलाज चल रहा है.

चित्रकूटधाम के पुलिस महानिरीक्षक के सत्यनारायण ने बीबीसी के सहयोगी पत्रकार समीरात्मज मिश्र को बताया, "ज़िले के राजापुर थाना क्षेत्र के खोपा गांव में ज़हरीली शराब पीने से लोगों की मौत की सूचना रविवार सुबह मिली. चार लोगों की मौत हो गई जबकि तीन लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. हालत गंभीर होने के चलते दो लोगों को राजापुर से प्रयागराज रेफ़र किया गया है."

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सूचना के बाद ज़िले के अधिकारी खोपा गाँव पहुँचे और बीमार लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया. स्थानीय लोगों के मुताबिक़, महुआ की कच्ची शराब पीने से शनिवार देर रात छह लोगों की हालत बिगड़ गई. इलाज के लिए सीएचसी राजापुर ले जाते समय रास्ते में दो लोगों ने दम तोड़ दिया जबकि दो लोगों की अस्पताल में मौत हो गई.

घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया. डीएम शुभ्रांत कुमार शुक्ल और एसपी अंकित मित्तल मौके पर पहुंच गए और अस्पताल में भर्ती लोगों से शराब के बारे में जानकारी ली. ग्रामीणों के मुताबिक़ महुआ की कच्ची शराब पीने से लोगों की हालत बिगड़ी.

बताया जा रहा है कि नशा बढ़ाने के लिए शराब में कोई केमिकल मिलाया गया था. हालाँकि पुलिस का कहना है कि मामले की तफ़तीश की जा रही है और जांच के बाद ही हकीकत सामने आएगी. ज़िले के डीएम और एसपी ने भी मौके पर पहुंचते ही छानबीन शुरू की.

पुलिस को कच्ची शराब बेचने वालों की धरपकड़ के आदेश दिए गए हैं लेकिन अभी तक कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है. दो दिन पहले प्रयागराज ज़िले में भी ज़हरीली शराब पीने से एक ही गाँव के 15 लोगों की मौत हो गई थी जबकि पिछले हफ़्ते प्रतापगढ़ ज़िले में पाँच लोग ज़हरीली शराब पीने से मर गए थे.

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बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फ़ाइल फ़ोटो)

बांग्लादेश में पीएम मोदी के ख़िलाफ़ बोलने वाले युवक को पुलिस ने हिरासत में लिया

बांग्लादेश में फ़ेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे की आलोचना करने वाले युवक को आज पुलिस ने अदालत में पेश किया.

इस युवक के ख़िलाफ़ 'डिजिटल सिक्योरिटी एक्ट' के तहत केस दर्ज किया गया है.

उत्तर पश्चिमी बांग्लादेश के ठाकुरगांव ज़िले की पुलिस ने इस युवक को शनिवार दोपहर गिरफ़्तार किया था.

इस गिरफ़्तारी के बारे में ज़्यादा जानकारी देते हुए ठाकुरगाँव सदर क्षेत्र के पुलिस अधिकारी तनवीरुल इस्लाम ने बीबीसी से कहा, "बलियाडांगी क्षेत्र के निवासी इस युवक ने फ़ेसबुक पर चार मिनट का एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें वो ना केवल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बल्कि बांग्लादेश की प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री का भी मज़ाक बना रहा था."

इस विवादित वीडियो में वह युवक बताता है कि वो क्यों पीएम मोदी का अपने देश में स्वागत नहीं करना चाहता.

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मोदी की प्रस्तावित बांग्लादेश यात्रा

पीएम मोदी 26-27 मार्च को बांग्लादेश के दौरे पर होंगे. उनकी इस यात्रा का कुछ अन्य संगठनों ने भी विरोध किया है. पुलिस ने बताया कि युवक को गिरफ़्तार कर लिया गया है और उन्होंने उसका फ़ोन भी ज़ब्त कर लिया है.

पुलिस का आरोप है कि इस युवक ने फ़ेसबुक पर अपने वीडियो के माध्यम से कई भड़काऊ बातें कहीं. पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान युवक ने कहा कि उसने फ़ेसबुक पर लाइक, कमेंट और शेयर पाने के इरादे से यह वीडियो वायरल किया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांग्लादेश की 50वीं वर्षगाँठ में शामिल होने के लिए बांग्लादेश की मौजूदा प्रधानमंत्री शेख हसीना के निमंत्रण पर ढाका जा रहे हैं. इस युवक को जिस क़ानून के तहत पुलिस ने गिरफ़्तार किया है, उसे लेकर बांग्लादेश में काफ़ी विवाद रहा है.

बांग्लादेश में बहुत से लोग मानते हैं कि देश में राजनीतिक असंतोष दो दबाने के लिए इस क़ानून का उपयोग किया जाता है.

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शरद पवार बोले, अनिल देशमुख पर अगले दो दिन में होगा फ़ैसला

महाराष्ट्र में राजनीतिक हलचल के बीच, एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने रविवार को प्रेस वार्ता कर ये बात कही कि "परमबीर सिंह को मुंबई के पुलिस कमिश्नर के पद से हटाया गया, इसलिए वे ऐसे आरोप लगा रहे हैं."

उन्होंने कहा कि देशमुख पर जो आरोप लगे हैं, वो वाक़ई गंभीर हैं, लेकिन परमबीर सिंह ने इस संबंध में कोई सबूत नहीं दिये हैं.

प्रेस से बातचीत में पवार ने कहा, "परमबीर सिंह ने अपने पत्र में 100 करोड़ रुपये वसूलने की बात कही, लेकिन ये नहीं बताया कि पैसा कहाँ गया. सवाल ये है कि परमबीर सिंह ने पद पर रहते हुए ये आरोप क्यों नहीं लगाये. पिछले साल परमबीर सिंह ने सचिन वाझे को बहाल किया था. उन्होंने ही उन्हें संवेदनशील मामले दिये. ये निर्णय सीएम या गृहमंत्री ने तो नहीं लिये थे."

जब उनसे पूछा गया कि क्या गृहमंत्री को सचिन वाझे के मामले (बहाली) की जानकारी नहीं थी? इस पर उन्होंने कहा कि "एक सब-इंस्पेक्टर की नियुक्ति या उसकी बहाली प्रदेश का गृहमंत्री नहीं करता."

शरद पवार बोले, "सरकार के अस्तित्व पर इसका कोई असर नहीं होगा. सरकार की छवि पर भी इसका कोई असर नहीं होगा."

उन्होंने कहा कि 'अनिल देशमुख पर कल या परसो तक फ़ैसला हो सकता है. कोई भी निर्णय सीएम और एनसीपी नेताओं में बातचीत के बाद लिया जायेगा.'

शरद पवार ने कहा कि 'वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को सुझाव देंगे कि पूर्व आईपीएस अधिकारी जूलियो रेबेरो से इन मामले की जाँच में मदद ली जा सकती है.'

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अनिल देशमुख ने परमबीर सिंह के आरोपों पर दी सफ़ाई

महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने एक प्रेस नोट जारी कर मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह द्वारा लगाये गये आरोपों पर सफाई दी है.

उन्होंने लिखा है कि 'परमबीर सिंह द्वारा लगाये गये आरोप बिल्कुल झूठे और बेबुनियाद हैं. परमबीर सिंह ने एक षडयंत्र के तहत ये आरोप लगाये हैं. उन्होंने महागठबंधन की छवि को धूमिल करने के लिए ऐसा किया है, इसलिए इस संदर्भ में कुछ बिन्दुओं पर ग़ौर किया जाना चाहिए.'

देशमुख ने यह प्रेस नोट अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से भी शेयर किया है.

उन्होंने लिखा है कि "सचिन वाजे को गिरफ़्तार हुए समय हो चुका है, फिर परमबीर सिंह अब तक (इतने दिनों तक) क्यों चुप रहे."

वे लिखते हैं, "मैंने एक अख़बार को दिये इंटरव्यू में यह स्पष्ट रूप से कहा था कि परमबीर सिंह के ख़िलाफ़ कुछ गंभीर मामले सामने आने के बाद ही हमने उन्हें मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद से हटाया है. पर वो लगातार ख़ुद को बचाने के लिए सबूत तैयार कर रहे थे. पुलिस विभाग में सब जानते हैं कि सचिन वाजे और एसीपी पाटिल, दोनों ही परमबीर सिंह के ख़ास रहे हैं. परमबीर सिंह ने सचिन वाझे को बहाल कराया जो इतने वर्षों तक निलंबित रहे."

"इसलिए मैं दोहराता हूँ कि परमबीर सिंह ने जो आरोप लगाये हैं, वो झूठे हैं. वे इन आरोपों को साबित करके दिखायें. मैं उनके ख़िलाफ़ मानहानि का मुक़दमा दर्ज करने वाला हूँ. अपने आप को बचाने के लिए ऐसा आरोप लगाना ठीक नहीं. अगर वो कह रहे हैं कि सचिन वाझे ने जनवरी में उन्हें सारी जानकारी दी, तो वे अब तक इस सूचना के साथ सामने क्यों नहीं आये."

गृह मंत्री अनिल देशमुख ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से परमबीर सिंह के आरोपों की निष्पक्ष जाँच कराने की माँग की है.

वहीं भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता नागपुर और मुंबई में महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं.

पार्टी कार्यकर्ता हाथों में पोस्टर लिये हुए हैं, जिन पर लिखा है, 'अनिल देशमुख इस्तीफ़ा दें.'

शनिवार को मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर यह आरोप लगाया था कि 'गृह मंत्री अनिल देशमुख ने शीर्ष पुलिस अधिकारियों को हर महीने 100 करोड़ रुपये की उगाही का टार्गेट दिया था.'

विरोध प्रदर्शन को देखते हुए नागपुर में गृह मंत्री अनिल देशमुख के घर के बाहर पुलिस तैनात की गई है.

इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा कि 'जो पत्र कथित तौर पर परमबीर सिंह ने भेजा है, वो कल शाम चार बजकर 37 मिनट पर प्राप्त हुआ था, पर वो पत्र किसी और ईमेल आईडी से प्राप्त हुआ, जो उनकी आधिकारिक ईमेल आईडी नहीं है. इस नए ईमेल एड्रेस की जाँच की जानी चाहिए. गृह मंत्री उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं.'

जबकि परमबीर सिंह ने कहा है कि 'वो ईमेल उन्होंने अपनी ही आईडी से भेजा था.'

इस बारे में प्रेस से बात करते हुए महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने कहा, "ये चिट्ठी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री द्वारा लिये गए सख़्त क़दमों की प्रतिक्रिया है. कोई सवाल ही नहीं कि इसकी वजह से गृह मंत्री इस्तीफ़ा दें या उन्हें बदला जाये."

शनिवार को भी अनिल देशमुख ने एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि 'मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने जो आरोप लगाए हैं, वो बेबुनियाद हैं. उन्होंने सचिन वाजे, मुकेश अंबानी और मनसुख हिरेन मामले में ख़ुद को बचाने के लिए ऐसा किया. अब तक जो जाँच हुई है, उससे स्पष्ट होता है कि उनका भी इस मामले से संबंध था.'

70 साल के अनिल देशमुख महाराष्ट्र की राजनीति के ऐसे चुनिंदा नेताओं में से हैं जिन्होंने हर पार्टी की सरकार में अपनी जगह बनाने में कामयाबी हासिल की.

हालांकि, इस विस्फोटक पत्र के बाद कुछ राजनीतिक विश्लेषकों को महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख का राजनीतिक करियर ख़तरे में नज़र आ रहा है.

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