बंगाल चुनाव में वोट डालने पर क्या कह रही हैं सोनागाछी की औरतें- ग्राउंड रिपोर्ट

  • भूमिका राय
  • कोलकता के सोनागाछी से
बंगाल चुनाव

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"वोट तो ज़रूर देंगे दीदी. वोट क्यों नहीं देंगे. यहां तो हम नक़ली नाम से खड़े हैं लेकिन वोट तो हमारी पहचान है. वो मेरे असली नाम को ज़िंदा रखता है. हम नागरिक हैं. लेकिन यहां खड़े होकर ना तो हम वोट सोचते हैं, ना चुनाव सोचते हैं ना सरकार सोचते हैं. यहां तो बस अपनी नौकरी सोचते हैं...और कुछ नहीं."

किसी भी दूसरे बाज़ार की तरह वहां भी लोगों की भीड़ थी. शोर था. ग्राहक थे. बिचौलिए थे और सौदा था. अपनी पहचान वाली औरतों के साथ नीतू (नक़ली नाम) भी कुछ मिनट पहले ही सौदे के लिए आकर खड़ी हुई थीं. 

 गंदे-मटमैले पानी से बजबजाती उस गली को पार करके हम इस बाज़ार तक पहुँचे थे. 

गली में घुसने के साथ ही दाईं ओर काली मां का एक छोटा सा मंदिर है. कुछ गाड़ियां बायीं ओर खड़ी थीं. 50-60 क़दम चलने के बाद दायीं ओर इमारतें हैं. जिनके चौखट के बाहर सीढ़ियों पर कई आदमी बैठे हुए थे. जैसे ही कोई मर्द उनके सामने से गुज़र रहा था वो सब के सब उसे घेर ले रहे थे. 

"एखाने एशो..."

 कई 'वो' जो इस गली से, इन लोगों के सामने से गुज़रे बाहर की सीढ़ियों पर बैठे उन लोगों के साथ अंदर बिल्डिंग में चले गए. उस समय शाम के छह बजे थे और अंधेरा होना शुरू ही हुआ था बस, लेकिन चाइनीज़ लाइट की लड़ियां ऊपर से नीचे तक जगमगा रही थीं. इसी गली के बायें मोड़ पर नीतू खड़ी थीं. और भी बहुत सी औरतें थीं इस बाज़ार में. 

बायीं ओर ही दीवार से लगी एक चाय की दुकान है, जहां नीली साड़ी पहने एक अधेड़ उम्र की औरत एक आदमी का नाम ले-लेकर उसे गालियां दे रही थी. काली-बैंगनी साड़ी पहने खड़ी नीतू बार-बार एक ही बात बोल रही थीं- "दीदी आप अपना ऑफ़िस वाला कार्ड गले में पहन लो नहीं तो कोई आपको भी हमारे साथ का ही समझ लेगा. आप पहन लो. ठीक रहेगा आपके लिए."

'हमारे साथ का समझ लेगा' कहने का मतलब सिर्फ़ इतना था कि ये सोनागाछी है तो कोई भी सौदे के लिए पूछ लेगा.

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यौन कर्मियों का सबसे बड़ा बाज़ार

सोनागाछी एशिया में यौन कर्मियों का सबसे बड़ा बाज़ार है. कोलकाता में इन यौनकर्मियों के संगठन दुर्बार महिला समन्वय समिति (डीएमएसएस) का कहना है कि इस इलाक़े में रोज़ाना 35 से 40 हज़ार ग्राहक आते हैं. हालांकि कोरोना के दौरान निश्चित तौर पर यह संख्या घटकर कुछ सौ ही रह गई.

सवाल ये भी है कि सरकार से क्या उम्मीदें रखती हैं यहां की औरतें? इस बाज़ार के ठीक बाहर बीजेपी, टीएमसी और लेफ़्ट के झंडे लहरा रहे थे लेकिन अंदर ना तो किसी पार्टी का झंडा था और ना ही किसी को चुनावी बातें करते सुना. लेकिन ऐसा नहीं है कि यहां की औरतों के मुद्दे नहीं हैं...या फिर उनकी कोई माँग नहीं है. किसी भी आम नागरिक की तरह इन सेक्स वर्कर्स की भी भविष्य की सरकार से कुछ उम्मीदें हैं और कुछ माँगें हैं.

 सोनागाछी की ही एक सेक्स वर्कर मनीषा (बदला हुआ नाम) कहती हैं, "विधान सभा चुनाव हो रहे हैं ये पता है लेकिन इसे लेकर क्या सोचते हैं क्या बताएं. अगर कोई हम औरतों से पूछे तो हम यही कहेंगे कि चाहे बीजेपी सत्ता में आए, चाहे टीएमसी आए..या फिर कोई और वो हमारे काम को प्रोफ़ेशन के तौर पर देखे."

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वो आगे कहती हैं, "मुझे ये याद भी नहीं है कि हम कितने सालों से अपनी इस बात को पूरी करने की माँग कर रहे हैं लेकिन अभी तक किसी ने हमारी नहीं सुनी."

मनीषा कहती हैं, "परेशानी तो बहुत है लेकिन एक बड़ी परेशानी ये है कि हम लोगों से ज़बरदस्ती वसूली की जाती है."

वो कहती हैं, "क्योंकि हम ये काम करते हैं तो आस-पास के वसूली वाले लोग हमसे जबरन वसूली करते हैं. हमारी कमाई तो ले ही लेते हैं, हमारे ग्राहकों को भी परेशान करते हैं, जिसकी वजह से हमारे ग्राहक कम होते हैं."

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 दीदी को चाहती हैं या मोदी को?

 मनीषा बताती हैं कि पहले वो और उनके साथ की औरतें नोटा पर वोट देती थीं लेकिन उनके नोटा पर वोट देने से भी कोई असर नहीं हुआ. 

"हम लोग नोटा पर वोट देते थे ये सोचकर कि चाहे बीजेपी हो, टीएमसी हो, या कोई दूसरी पार्टी, सब एक ही हैं लेकिन अब शायद किसी पार्टी को दें."

इसके पीछे की वजह बताते हुए वो कहती हैं, "हम चाहते हैं कि हमारे वोट से जो आए, वो कुछ करे. जब वोट देंगे तो पूछ भी पाएंगे."     

वोट देने की बात पर नीतू कहती हैं, "वोट तो देंगे क्योंकि वो मेरा काम है. अपनी मर्ज़ी से देंगे. किसी के कुछ कह देने से थोड़े दे देंगे. जो हमको समझ आएगा कि ठीक है उसे दे देंगे."

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 हमें अनुदान नहीं दें, नौकरी करते रहने दें

नीतू शादीशुदा हैं लेकिन पति ने उन्हें शादी के कुछ समय बाद ही छोड़ दिया था. एक बेटा है जो नीतू की मां के पास रहता है लेकिन घर में किसी को पता नहीं कि नीतू क्या करती हैं. 

नीतू कहती हैं, "वोट तो देंगे लेकिन हमको किसी सरकार से कुछ चाहिए नहीं. सरकार बस इतना करे कि हमारी नौकरी बंद नहीं करे. वरना कोई पचास हज़ार-एक लाख देकर मेरी ज़िंदगी नहीं बदल सकता है. ये काम तो करना ही पड़ेगा. पचास हज़ार देकर लोग सोचते हैं कि ज़िंदगी बीत जाएगी, ऐसे थोड़े होता है. इस नौकरी के बदले नौकरी दो तो हम ये छोड़ दें."

नीतू मानती हैं कि सोनागाछी है तो कई औरतों के घर चल रहे हैं. वो इसे कहीं से भी बुरा नहीं मानतीं अलबत्ता ये ज़रूर कहती हैं कि - 'सोनागाछी है तो 'सभ्य-समाज' में महिलाओं के लिए ठीक है नहीं तो उनके साथ और भी बुरा होता.'

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 वोट देंगे पर अयोग्य को नहीं

 नीतू चाहती हैं वही सरकार आए जो औरतों के लिए ऐसा कर दे कि उनको कहीं डर ना लगे. 

 साल 1991 से सोनागाछी में रहने वाली एक सेक्स वर्कर का कहना है, "हम उन लोगों से कोई उम्मीद भी कैसे कर सकते हैं, जिन्होंने कभी भी हमारी वो बातें नहीं मानी जिसकी हमने माँग की थी." 

 हालांकि वोट देने की बात वो भी करती हैं. "वोट तो देंगे. मेरा अधिकार है लेकिन किसी अयोग्य को देकर सत्ता में लाने से बेहतर है कि मैं नोटा का बटन दबा दूं."

 एक अन्य सेक्स वर्कर कहती हैं कि इस बार हम किसी भी नेता के बहकावे में या झूठे वादों में नहीं फंसेंगे.

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 क्या है सोनागाछी का इतिहास 

श्यामपुकुर विधान सभा क्षेत्र में आने वाले कोलकाता के बीचों बीच तंग गलियों से भरे सोनागाछी को वेश्यावृत्ति का एशिया का सबसे बड़ा इलाक़ा कहा जाता है. यहां क़रीब ग्यारह हज़ार से अधिक यौनकर्मियों का घर है.

सोनागाछी बंगाली शब्द है और इसका मतलब है - सोने का पेड़. ऐसा माना जाता है कि इस जगह का नाम सोना ग़ाज़ी के नाम पर पड़ा है. सोना ग़ाज़ी, एक डकैत थे जो बाद में संत बन गए. मूल रूप से उनका नाम सनाउल्लाह था और वो इसी जगह अपनी मां के साथ रहा करते थे.

पीटी नायर ने अपनी किताब "अ हिस्ट्री ऑफ़ कलकत्ता स्ट्रीट्स" में लिखा है कि सनाउल्लाह की मौत के बाद उनकी मां ने एक मस्जिद बनवायी जिसे सोना ग़ाज़ी नाम दिया.

सोनागाछी के शुरुआती इतिहास को लेकर कई तरह की धारणाएं और कहानियां है.  

बंगाल में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. जिसमें सोनागाछी की महिलाएं भी वोट करेंगी लेकिन 11 हज़ार से अधिक आबादी वाले इलाक़े में बहुतों के पास अभी तक वोटर कार्ड भी नहीं है.

यहां की यौन-कर्मियों के लिए काम करने वाली संस्था डीएमएससी की प्रमुख डॉ. जाना के अनुसार, "पहले उन्हें उम्मीद भरे शब्द दिए जाते हैं लेकिन जब उन्हें अपने इर्द-गिर्द कुछ बदलता नहीं दिखता है तो उन्हें उदासी तो होती ही है."

इस विधानसभा क्षेत्र में चुनाव के अंतिम चरण में 29 अप्रैल को मतदान होना है.

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