अनिल देशमुख के इस्तीफे के बाद एनसीपी नेता दिलीप वालसे पाटिल बने महाराष्ट्र के नए गृह मंत्री

दिलीप वालसे पाटिल

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दिलीप वालसे पाटिल

अनिल देशमुख के इस्तीफे के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता दिलीप वालसे पाटिल को महाराष्ट्र के गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है. उनके पास पहले श्रम और आबकारी विभाग की जिम्मेदारी थी.

मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि श्रम विभाग की जिम्मेदारी अब ग्रामीण विकास मंत्री हसन मुशरिफ़ संभालेंगे जबकि आबकारी विभाग उपमुख्यमंत्री अजित पवार देखेंगे.

इससे पहले सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की याचिका की सुनवाई करते हुए गृह मंत्री अनिल देशमुख पर लगे आरोपों की सीबीआई जांच का आदेश दिया था जिसके बाद देशमुख ने इस्तीफे की घोषणा कर दी.

अनिल देशमुख ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को भेजे गए अपने त्यागपत्र में कहा है कि सीबीआई जांच को देखते हुए उनका पद पर बने रहना नैतिक रूप से सही नहीं है. परमबीर सिंह ने अपनी याचिका में महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता और उद्धव सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक ने बताया कि अनिल देशमुख ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है. लेकिन मुख्यमंत्री ने उसे अभी तक स्वीकार नहीं किया है.

मलिक ने कहा कि परमबीर सिंह के आरोपों में कोई तथ्य नहीं है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गृह मंत्री के पद की जिम्मेदारी वर्तमान में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पास ही रहेगी.

नवाब मलिक ने बताया, "हाई कोर्ट के फ़ैसले के बाद गृह मंत्री अनिल देशमुख ने शरद पवार और पार्टी नेताओं से मुलाकात की और कहा कि वे पद पर नहीं बने रहना चाहते हैं. उन्होंने अपनी इस्तीफा दे दिया है. पार्टी ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वे उनका इस्तीफ़ा स्वीकार कर लें."

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अनिल देशमुख और परमबीर सिंह

भाजपा की प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख चंद्रकांत पाटिल ने देशमुख के इस्तीफ़े पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे इस बात से संतुष्ट हैं कि शरद पवार ने इस फैसले को गंभीरता से लेते हुए इस स्थिति पर विचार किया कि अनिल देशमुख सीबीआई जांच के दौरान पद पर नहीं रह सकते हैं. उन्होंने कहा कि सीबीआई की जांच के एक पखवाड़े बाद पूरा सच सामने आ जाएगा.

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क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने अनिल देशमुख के मामले में कहा, "शरद पवार जी देश के एक वरिष्ठ नेता हैं. वे इस बात को समझते हैं कि अनिल देशमुख को पूरी तरह से क्लीनचिट देने के क्या नतीजे हो सकते हैं. भाजपा को उम्मीद है कि इस मुद्दे के सभी पहलुओं की मुकम्मल जांच की जाएगी और जो लोग भी इसमें शामिल हैं, उन पर कार्रवाई की जाएगी."

उन्होंने कहा, "हमने ये विषय उठाया था कि ये टारगेट सिर्फ एक शहर मुंबई का है तो पूरे महाराष्ट्र का टारगेट क्या था? ये टारगेट सिर्फ एक मंत्री का है तो बाकी मंत्रियों का टारगेट क्या था? हम शुरू से एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे और मुंबई पुलिस के द्वारा ये संभव नहीं था."

रविशंकर प्रसाद ने आगे कहा, "जैसा आरोप लगाया गया था कि देशमुख जी ने सचिन वाझे को कहा था कि मुंबई में 17 सौ बार और रेस्तरां हैं तो आप 100 करोड़ रुपये कलेक्शन कर के दीजिए."

राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बारे में रविशंकर प्रसाद ने कहा, "मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे खामोश हैं. शरद पवार जी कहते हैं कि मंत्री के बारे में फैसला मुख्यमंत्री करते हैं. कांग्रेस और शिवसेना कहती है कि देशमुख जी के बारे में फैसला एनसीपी करेगी. आज तो कमाल हो गया, शरद पवार से अनुमति के बाद मुख्यमंत्री जी को इस्तीफा सौंपा गया. ये देश को क्या बताया जा रहा था. हम भी जानते हैं कि शरद पवार के इशारे पर ही वो इस्तीफा देते या न देते. लेकिन उद्धव ठाकरे कब बोलेंगे? उनकी खामोशी कई सवाल खड़े कर रही है."

अनिल देशमुख के इस्तीफ़े पर प्रतिक्रिया देने वालों में बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना भी शामिल हैं. उन्होंने कहा, "यह तो सिर्फ़ शुरुआत है, आगे आगे देखो होता है क्या."

हाई कोर्ट का फ़ैसला

हाई कोर्ट ने सीबीआई को ये जांच 15 दिनों के अंदर पूरी करने के लिए कहा है. कोर्ट ने अपने फ़ैसले में सीबीआई से ये भी कहा है कि अगर किसी अपराध की पुष्टि होती है तो इसकी प्राथमिकी भी दर्ज की जाए.

कोर्ट ने ये भी कहा कि अनिल देशमुख गृह मंत्री हैं, इसलिए पुलिस इसकी निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती है.

हाई कोर्ट में अपनी याचिका में पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ उन्हीं आरोपों को दोहराया जिसका जिक्र उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखी चिट्ठी में किया था.

परमबीर सिंह ने ये आरोप लगाया था कि गृह मंत्री पुलिस की जांच में दखल दे रहे हैं.

कुछ दिनों पहले उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास विस्फोटक मिलने के मामले में मुंबई पुलिस के अधिकारी सचिन वाझे की गिरफ्तारी हुई थी और शहर के पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह का तबादला कर दिया गया था. इसके बाद पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने गृह मंत्री अनिल देशमुख पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे.

महाराष्ट्र की राजनीति

इससे पहले, मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि गृह मंत्री अनिल देशमुख ने शीर्ष पुलिस अधिकारियों को हर महीने कथित तौर पर सौ करोड़ रुपये की उगाही का टार्गेट दिया था.

70 साल के अनिल देशमुख महाराष्ट्र की राजनीति के ऐसे चुनिंदा नेताओं में से हैं जिन्होंने हर पार्टी की सरकार में अपनी जगह बनाने में कामयाबी हासिल की है.

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के विस्फोटक पत्र के बाद राजनीतिक विश्लेषकों को महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख का राजनीतिक करियर ख़तरे में लग रहा था.

देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में बनी पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार के पाँच साल के कार्यकाल को छोड़ दिया जाए तो देशमुख साल 1995 के बाद से लगातार मंत्री रहे हैं.

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