कोरोना: वैक्सीन लगने के बाद भी संक्रमित होने वाले डॉक्टर की सलाह- ज़रूर लगवाएँ वैक्सीन

  • सरोज सिंह
  • बीबीसी संवाददाता
डॉक्टर पुनीत टंडन
इमेज कैप्शन,

डॉक्टर पुनीत टंडन

डिसक्लेमर : यह आपबीती है, एक सरकारी अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टर पुनीत टंडन की. डॉक्टर पुनीत, भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में पैथोलॉजी स्पेशलिस्ट के तौर पर काम करते हैं. उनकी उम्र 53 साल है. उनको किसी तरह की कोई दूसरी बीमारी नहीं है. वैक्सीन (कोविशिल्ड ) लगने के बाद वो डॉक्टर के तौर पर अपनी सेवाएं देते रहे हैं. उनकी पत्नी एनेस्थीसिया की डॉक्टर हैं और कोविड ड्यूटी में आईसीयू में रोटेशन पर काम करती रही हैं. उनकी बहन भी पैथोलॉजी विभाग में डॉक्टर हैं. डॉक्टर पुनीत की कहानी को पढ़ते वक़्त इन तथ्यों को ध्यान में रखने की ज़रूरत है. इस कहानी का मक़सद आपको डराना नहीं बल्कि अब तक उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आप तक ज़रूरी सूचना पहुँचाना है.

"15 जनवरी 2021 का दिन था. फ़ोन पर एक मैसेज आया अगले दिन आपको कोरोना वैक्सीन लगेगी. मैं बहुत ख़ुश था. मैंने कोरोना महामारी से लड़ते हुए डॉक्टरों को बेहद क़रीब से देखा था. मैं ख़ुद भी प्लाज़्मा थेरेपी से कोरोना के इलाज के तरीक़ों में शामिल रहा था. मेरी पत्नी भी कोरोना की ड्यूटी पर आईसीयू में तैनात रही है. बहन भी इसी पेशे में है. मुझे लगा कि आख़िरकार अब एक सुरक्षा कवच मिल ही जाएगा."

16 जनवरी को मुझे वैक्सीन की पहली डोज़ लगी. मुझे कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं हुआ. वैक्सीन सेंटर पर आधे घंटे रुकने के बाद मैं सामान्य महसूस कर रहा था. एक पैथोलॉजी डॉक्टर होने के नाते मैंने वैक्सीन लेने से पहले ही अपनी एंटी बॉडी लेवल चेक किया था, जो पहले डोज़ के एक दिन पहले 0.05 था. वैक्सीन के पहले डोज़ के बाद 30 जनवरी को 0.88 हो गया था.

पहले डोज़ के 38 दिन बाद 24 फ़रवरी 2021 को मुझे वैक्सीन की दूसरी डोज़ लगी. दूसरी डोज़ लगने से एक दिन पहले भी मैंने एंटी बॉडी टेस्ट किया जो 2.28 था. यानी धीरे धीरे शरीर में एंडी बॉडी की मौजूदगी बढ़ रही थी. दूसरे डोज़ के बाद भी कोई दिक़्क़त नहीं थी. जो सामान्य रेस्ट की बात वैक्सीन के बाद कही जाती है, मैंने उन सब नियमों का पालन किया था.

इमेज कैप्शन,

डॉक्टर पुनीत टंडन का वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट

दूसरे डोज़ के तीन हफ़्ते बाद 16 मार्च 2021 को मेरे शरीर में एंटी बॉडी 11.75 हो गई थी. लगा सब कुछ ठीक चल रहा था.

लेकिन 30 मार्च की सुबह मुझे शरीर में थोड़ी सी चुभन महसूस हुई. उसके अलावा सब सामान्य था. मैं एक रनर भी हूँ. रोज़ सुबह रनिंग के लिए जाता हूँ और फिर एक्सरसाइज़ भी करता हूँ. उस दिन चुभन को दरकिनार कर मैं दौड़ने निकल गया. लेकिन बीच में ही मुझे थकान महसूस होने लगी. ये मेरे लिए अजीब था. अमूमन एक बार में मुझे 10 किलोमीटर दौड़ने का अभ्यास है. फिर भी मैंने उस बात पर ध्यान नहीं दिया. इतना ज़रूर था कि मेरी ह्रदय गति और दिनों के मुक़ाबले मुझे तेज़ लगी. उसके बाद दिन के सारे काम किए. अस्पताल भी गया. लेकिन शाम होते-होते मुझे ज़ुकाम हो गया है और थोड़ी ठंड लग रही थी.

अगले दिन 31 मार्च 2021 को उठा तो मुझे हल्का बुख़ार था. तापमान चेक किया तो 99 डिग्री ही था. दिमाग़ में दो बात चल रही थी. कहीं कोरोना तो नहीं? फिर अगले ही पल ख़्याल आता मैंने तो वैक्सीन की दोनों डोज़ लगवाई है. ऐसा कैसे हो सकता है. लेकिन हूँ तो पेशे से डॉक्टर ही. जानता था कि वैक्सीन लगने के बाद भी कोरोना हो सकता था. मैंने अपना रैपिड एंटीजन टेस्ट करवाया. रिपोर्ट में पता चला कि मैं कोविड-19 पॉज़िटिव हूँ. डॉक्टर ने मुझे घर पर ही होम आइसोलेट करने की सलाह दी. उसके बाद में घर आ गया. और ख़ुद को एक कमरे में आइसोलेट कर लिया.

अपने दोस्त डॉक्टर के साथ कोविड-19 ट्रीटमेंट का पूरा प्लान मैंने समझा. कुछ और ब्लड टेस्ट करवाएं. चूंकि डॉक्टर हूँ, तो ख़ुद ही चेस्ट का सीटी स्कैन भी करवा लिया. इस पेशे में ज़्यादा पढ़ने की वजह से कुछ ज़्यादा ही सावधानी बरत ली. ब्लड रिपोर्ट में कुछ थोड़ी बहुत गड़बड़ी थी, लेकिन कुछ भी बहुत चिंता की बात नहीं थी. चेस्ट सीटी स्कैन बिलकुल ठीक थी. कोई दिक़्क़त नहीं थी. डॉक्टर की सलाह का पूरा पालन किया, एंटीबॉयटिक्स का कोर्स पूरा किया, एक कमरे में बंद रहा लेकिन अंदर ही अपनी वॉक भी जारी रखी. हालांकि दो दिन तक 99-100 डिग्री के बीच बुख़ार बना रहा. चौथे दिन दोबारा ब्लड टेस्ट कराया, इस बार सब ठीक हो रहा था. तीसरे दिन से बुख़ार आना भी बंद हो गया था.

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
पॉडकास्ट
बात सरहद पार

दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

बात सरहद पार

समाप्त

6 अप्रैल को RTPCR टेस्ट के बाद मुझे पता चला कि मैं कोविड-19 नेगेटिव हो गया हूँ. लेकिन होम आइसोलेशन में अब भी हूँ.

घर पर बूढ़े माँ-बाप भी हैं. उनके लिए चिंता रहती थी. लेकिन डॉक्टर होने के नाते उनसे साल भर से दूरी बनाए ही रखी थी. पत्नी और बच्चों का टेस्ट कराया तो वो नेगेटिव था. लेकिन मेरी बहन जो पैथोलॉजी विभाग में ही हैं, वो भी मेरे बाद कोरोना पॉज़िटिव पाई गईं .

मुझे नहीं मालूम कि मुझे कहाँ से संक्रमण मिला. अपनी तरफ़ से मैंने पूरी सावधानी रखी थी. लेकिन डॉक्टर हूँ कई मरीज़ों के सम्पर्क में आता हूँ.

लेकिन मेरी पूरी कहानी का सबसे अहम हिस्सा ये है कि मुझे गंभीर संक्रमण भी हो सकता था, कोरोना की वजह से अस्पताल जाना पड़ सकता था, जान तक जा सकती थी... अगर मैंने वैक्सीन की दोनों डोज़ नहीं ली होती. ये वैक्सीन का ही असर था कि मैं गंभीर रूप से कोरोना संक्रमित नहीं हुआ. आप भी इसलिए वैक्सीन ज़रूर लगवाएं. उसके बाद भी कोरोना आपको हो सकता है, लेकिन वो ख़तरनाक नहीं होगा. आपकी जान पर नहीं बन आएगी. वैक्सीन के बाद भी मास्क लगाए, दो ग़ज की दूरी बनाए रखें और बार बार हाथ ज़रूर धोएं."

इमेज कैप्शन,

डॉक्टर सुनीला गर्ग

डॉक्टर पुनीत की आपबीती पढ़ने के बाद भी वैक्सीन को लेकर आपके मन में कुछ सवाल रह गए हैं?

ऐसा उनके साथ क्यों और कैसे हुआ? यही समझने के लिए बीबीसी ने बात की मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज में कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के हेड डॉक्टर सुनीला गर्ग से बात की. डॉक्टर सुनीला सरकार के कोविड-19 टास्क फ़ोर्स की सदस्य भी हैं. उनके साथ सवाल जवाब के अंश :

सवाल: कोरोना वैक्सीन लगने के बाद भी डॉक्टर पुनीत को कोरोना क्यों हो गया?

जवाब: इसके लिए हमें उनके वैक्सीन के बाद के बिहेवियर के बारे में पता लगाना हो. लेकिन ये सही है कि कोरोना वैक्सीन के दोनों डोज़ लगने के बाद भी कोरोना हो सकता है. ऐसा बहुत कम ही होता है. इसी वजह से एफ़िकेसी डेटा की स्टडी की जाती है, जो बताता है कि वैक्सीन कितनी प्रतिशत सुरक्षित है. अभी तक किसी वैक्सीन निर्माता ने 100 फ़ीसद एफ़िकेसी का डेटा नहीं दिया है. भारत में बनी कोवैक्सीन की 80 फ़ीसद एफीकेसी बताई गई है, मतलब इसको लगाने के बाद 20 फ़ीसद संभावना है कि आपको कोरोना हो सकता है. कोविशिल्ड की एफ़िकेसी 70 फ़ीसद के आस-पास बताई जाती है. दोनों डोज़ के अंतराल पर भी कोविशिल्ड वैक्सीन की एफ़िकेसीबदल जाती है. 28 दिन के अंतराल पर कम और दो महीने के अंतराल पर लेने में ज़्यादा एफ़िकेसी होती है. डॉक्टर पुनीत पर हो सकता है एफ़िकेसी काम ना की हो.

सवाल: कोरोना वैक्सीन फिर क्यों लगाएं?

जवाब: वैक्सीन लगवाने के बाद आपको सीवियर कोविड19 बीमारी नहीं होगी. कोरोना की वजह से आपकी जान नहीं जाएगी. माइल्ड कोविड-19 या बिना लक्षण वाले कोरोना होने की संभावना फिर भी रहती है. यानी कोई सुरक्षा कवच ना होना और एक सुरक्षा कवच होना - दोनों में से चुनना हो तो आप किसे चुनेंगे? ज़ाहिर है सुरक्षा कवच को. इसलिए वैक्सीन लगवाना चाहिए. आम बोलचाल की भाषा में समझाएं तो एक बार आप वैक्सीन लगवा लेते हैं तो आपके शरीर में मेमरी सेल्स बन जाते हैं, जो कोरोना के ख़िलाफ़ कैसे लड़ना है, उसको याद रखते हैं. जैसे ही वायरस आप पर अटैक करता है, वो तुरंत काम पर लग जाते हैं. इसलिए वैक्सीन लगने के पहले, बाद में और उस दौरान भी मास्क ज़रूर पहने, दो ग़ज की दूरी रखें और हाथ बार-बार धोएं.

सवाल:कोवैक्सीन और कोविशिल्ड वैक्सीन से आम तौर पर कितने दिन सुरक्षित रह सकते हैं?

जवाब: अभी तक के ट्रायल पर छपी रिपोर्ट बताती है कि कोरोना वैक्सीन से लोग साल भर से ज़्यादा के लिए सुरक्षित हैं. लेकिन यहाँ ग़ौर करना होगा, इस बारे में स्टडी चल रही है, जैसे-जैसे समय बीतता जाएगा, नई स्टडी आती रहेगी और ये समय अवधि भी बदलते रहेंगे. इस बात पर भी चर्चा चल रही है कि वैक्सीन के बूस्टर डोज़ या और डोज़ लगवाने की ज़रूरत आगे पड़ेगी या नहीं.

सवाल: को-मॉर्बिड (दूसरी बीमारी) वालों के लिए वैक्सीन लगवाने के बाद ख़तरा ज़्यादा है? क्या उनको सिवियर इंफ़ेक्शन हो सकता है?

जवाब: उनके लिए वैक्सीन ज़्यादा बेहतर विकल्प है. कोमॉर्बिड को बिना वैक्सीन लगवाएं माइल्ड कोरोना भी होगा तो दिक़्क़त ज़्यादा बढ़ जाएगी. इसलिए वैक्सीन लगवाने के बाद उनको भी केवल माइल्ड इंफ़ेक्शन ही होगा और उससे लड़ने के लिए शरीर में एंटीबॉडी पहले से मौजूद होगा. इस वजह से उन्हें वैक्सीन लगवाने में प्राथमिकता दी गई है.

सवाल: वैक्सीन लगने के बाद दोबारा कोरोना होने के कितने फ़ीसद मामले देखने को मिलते हैं?

जवाब: ऐसे मामले बहुत ही कम हैं. इस पर अमेरिका में दो अलग-अलग स्टडी हुई है. एक में 8177 में से केवल चार मामले में कोरोना संक्रमण देखने को मिला है. दूसरी स्टडी में 14000 वैक्सीन लगे लोगों में से केवल सात मामलों में कोरोना संक्रमण पाया गया.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)