कोरोना: क्या भारत में महामारी की दूसरी लहर का पीक आ चुका है?

  • विजदान मोहम्मद कावूसा
  • बीबीसी मॉनिटरिंग
म्यूकर

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भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर ने हाहाकार मचा दिया था. अस्पताल में मरीज़ों को बेड नहीं मिल रहे थे, तो श्मशान घाटों और कब्रिस्तानों में लोगों के अंतिम संस्कार के लिए जगह की कमी होने लगी थी.

लेकिन पिछले कुछ दिनों में देश में संक्रमण के मामलों में कमी आई है, लेकिन हर दिन मरने वालों की संख्या अभी भी 4 हज़ार से अधिक है.

पिछले हफ़्ते के डेटा के मुताबिक़ नए मामलों की संख्या कम हो ही रही है, साथ ही सात दिनों का औसत (मूविंग एवरेज) भी कम हुआ है. साथ ही संक्रमण दर और अस्पतालों में भरे हुए बेड की संख्या भी गिरी है.

छह मई को भारत में संक्रमण के क़रीब 4,14,000 नए मामले दर्ज किए गए थे. महामारी के दौरान एक दिन में संक्रमितों की ये सबसे अधिक संख्या थी.

देश में अप्रैल महीने में छह लाख 90 हज़ार नए मामले दर्ज किए गए. ये दुनियाभर में दर्ज किए गए मामलों का एक तिहाई था. अमेरिका और ब्राज़ील में दर्ज किए गए संक्रमण की संख्या के मुक़ाबले ये संख्या तीन गुना थी. संक्रमण के मामलों में अमेरिका दूसरे और ब्राज़ील तीसरे स्थान पर है.

भारत में दूसरी लहर की पीक चुका है

भारत के संक्रमण के ग्राफ़ पर नज़र डालें तो मामलों के सात दिनों का औसत 8 मई को पीक पर पहुंचने के बाद से लगातार दसवें दिनों तक कम हुआ है. यानी की क़रीब 22 प्रतिशत की गिरावट, हर दिन तकरीबन 84,000 केस कम हुए. दूसरी लहर का ग्राफ़ आमतौर पर जैसा कोरोनावायरस का ग्राफ़ होता है, वैसा ही है.

सात दिनों का औसत हर दिन के संक्रमण के मामलों के मुक़ाबले बीमारी को बेहतर तरीके से समझने में मदद करता है.

लेकिन भारत में मरने वालों की संख्या अभी भी बढ़ रही है. देश में अभी तक एक दिन में सबसे अधिक मौतें 18 मई को रिकॉर्ड की गईं. ये संख्या 4,500 थी. मरने वालों की संख्या का पीक आमतौर पर संक्रमण के पीक के एक हफ़्ते बाद आता है क्योंकि मौत पॉज़िटिव पाए जाने के एक हफ़्ते से लेकर 15 दिन के बाद होती है.

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कम होता संक्रमण दर

भारत में संक्रमण दर या पॉज़िटिविटी रेट अब कम हो रही है, यानी जितने लोगों का टेस्ट किया जा रहा है उनमें पॉज़िटिव आने वालों की संख्या कम हो रही है. आठ मई को ख़त्म होने वाले हफ़्ते में ये दर 22.7 प्रतिशत थी, 18 मई को ये दर कम होकर 16.9 प्रतिशत हो गई. ये आंकड़ें संकेत देते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर पीक पर पहुंच गई है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ सही तरीके से टेस्ट किए जाने के बाद अगर संक्रमण दर दो हफ्तों तक 5 प्रतिशत से कम रहे, तो माना जाता है कि महामारी कंट्रोल में है.

सक्रिय मामले कम हो रहे हैं

सक्रिय मामले यानी कि वो लोग जो एक समय में संक्रमण का शिकार हैं, उनकी संख्या कम होती जा रही है. पीक पर पहुंचने के दो महीने पहले से ये संख्या बढ़ रही थी. सक्रिय मामलों की संख्या इस दौरान एक दिन में 1,38,000 तक पहुंच गई थी.

सक्रिय मामलों की संख्या से पता करना आसान होता है कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर उस वक्त कितना दबाव है. जितने ज़्यादा मरीज़ होंगे, उतने ही ज़्यादा स्वास्थ्यकर्मियों की ज़रुरत पड़ेगी.

सक्रिय मामले लगातार छह दिनों तक घटे हैं. पिछले हफ़्ते सक्रिय मामलों के कम होने की दर भी बढ़ी है. हर दिन 30,000 मामलों के मुक़ाबले अब संख्या एक लाख हो गई है.

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बड़े राज्यों में पीक पर पहुंचे मामले

देश के 20 में से 15 सबसे ज़्यादा आबादी वाले राज्यों में अनुमान है कि यहां कोरोना संक्रमण के मामले पीक पर पहुंच चुके हैं.

इन 20 राज्यों में देश की 97 फ़ीसद आबादी रहती है. 95 फ़ीसद कोरोना संक्रमण के मामले भी इन्हीं राज्यों में दर्ज किए गए हैं.

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आंध्र प्रदेश, असम, ओडिशा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल वो पांच राज्य हैं जहां संक्रमण के मामले अभी भी बढ़ रहे हैं. इस राज्यों में देश की कुल 23 फ़ीसद आबादी रहती है.

6 में से 5 सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में, जहां 50 प्रतिशत आबादी रहती है, अनुमान है कि संक्रमण पीक पर पहुंच चुका है.

छठा राज्य पश्चिम बंगाल है, जहां मामले पीक की ओर बढ़ते दिख रहे हैं. हालांकि वहां मामले कब कम होने शुरू होंगे इसका अंदाज़ा लगाना अभी मुश्किल है.

ज़्यादातर राज्यों में संक्रमण दर में भी कमी आई है. राजधानी दिल्ली में संक्रमण दर 21 प्रतिशत तक घटी है. ये दर इससे पहले 32.8 प्रतिशत तर पहुंच गई थी.

पॉज़िटिविटी रेट महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में भी कम हुई है. हालांकि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में इस रेट में इज़ाफ़ा हो रहा है और यहां 18 मई को सबसे अधिक पॉज़िटिविटी रेट दर्ज की गई थी.

स्वास्थ्य व्यवस्था पर कम हुआ दबाव

उन जगहों पर जहां पिछले एक-दो हफ़्तों से नए मामले कम आ रहे हैं, वहां स्वास्थ्य सुविधाओं पर दबाव कम होने की उम्मीद है. इसका असर दिखने भी लगा है.

दिल्ली में अस्पतालों के बेड पहले के मुक़ाबले खाली मिल रहे हैं. दिल्ली के बेड ऑक्यूपेंसी डैशबोर्ड के मुताबिक़ 19 मई को 6,750 में से 1,251 कोविड आइसीयू बेड खाली थे. इससे अलावा 2,352 में से 235 वेन्टिलेटर खाली थे.

दिल्ली में 1 मई को 94 प्रतिशत बेड भरे हुए थे, ये संख्या 18 मई को 59 प्रतिशत हो गई.

23 अप्रैल को जब मामले पीक पर थे, तब दिल्ली में संक्रमण के 25,294 नए मामले दर्ज किए गए थे. 18 मई को संक्रमण के 7,739 मामले दर्ज किए गए.

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