सुनंदा पुष्कर हत्या मामला: शशि थरूर के बरी किए जाने तक क्या-क्या हुआ

  • टीम बीबीसी हिंदी
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सुनंदा पुष्कर, शशि थरूर की फाइल फोटो

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कांग्रेस के सांसद शशि थरूर को बुधवार को बड़ी राहत तब मिली जब दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें अपनी पत्नी सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया.

अदालत ने सबूतों की कमी के आधार पर थरूर पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला ख़ारिज कर दिया. सुनंदा पुष्कर 17 जनवरी 2014 को दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में मृत पाई गई थीं.

हालाँकि शुरुआत में उनकी मौत को ख़ुदकुशी माना गया था मगर बाद में दिल्ली पुलिस ने दावा किया था कि उनकी हत्या की गई थी. हालांकि तब पुलिस ने किसी संदिग्ध का नाम नहीं लिया था.

साल 2018 में दिल्ली पुलिस ने शशि थरूर पर अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने और क्रूरता का आरोप लगाया. दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट उन्होंने इस मामले में अभियुक्त माना था.

उस वक़्त शशि थरूर ने ट्वीट करके चार्ज़शीट में लगाए गए आरोपों को आधारहीन बताया था और इसके ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ने की बात कही थी.

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लीला होटल जहां सुनंदा पुष्कर मृत पाई गई थीं

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समाप्त

जुलाई 2018 में एक सत्र अदालत ने थरूर को मामले में अग्रिम ज़मानत दी थी. इसे बाद में नियमित ज़मानत में बदल दिया गया था.

18 अगस्त, 2021 को अदालत ने अपना आदेश एक वर्चुअल सुनवाई में सुनाया जिसमें थरूर मौजूद थे. बरी किए जाने के बाद थरूर ने अदालत से कहा कि यह "साढ़े सात साल की पूर्ण यातना" थी.

अदालत का फ़ैसला आने के बाद बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि अगर दिल्ली पुलिस इस आदेश के ख़िलाफ़ हाई कोर्ट में अपील करती है तो वे फिर से हस्तक्षेप करने की मांग करेंगे.

एक ट्वीट में स्वामी ने कहा, "सुनंदा मर्डर केस में कोर्ट ने आरोप तय करने से इनकार कर दिया है. मैंने इस मामले में अपनी बात रखने के लिए याचिका दायर की थी लेकिन अभियुक्त और अभियोजक दोनों ने मेरी याचिका का विरोध किया. इसलिए मुझे बाहर रखा गया. यदि डीपी इस आदेश के ख़िलाफ़ उच्च न्यायालय में अपील करती है, तो मैं फिर से अपनी बात रखने की अपील करूंगा."

'लंबे डरावने सपने का अंत'

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शशि थरूर ने अदालत के आदेश के बाद एक बयान जारी कर न्यायाधीश गीतांजलि गोयल का आभार प्रकट किया है.

थरूर ने कहा कि यह उस लंबे डरावने सपने का अंत है जिसने मेरी दिवंगत पत्नी सुनंदा के दुखद निधन के बाद मुझे घेर लिया था.

थरूर ने कहा कि, "मैंने भारतीय न्यायपालिका में अपने विश्वास की वजह से दर्जनों निराधार आरोपों और मीडिया में की गई बदनामी को धैर्यपूर्वक झेला है और न्यायपालिका में मेरा विश्वास आज सही साबित हुआ है."

ये कहते हुए कि "हमारी न्याय प्रणाली में प्रक्रिया ही अक्सर सजा होती है" थरूर ने कहा कि न्याय मिलने के बाद उनका परिवार को सुनंदा का शांति से शोक मना पाएगा.

उन्होंने अपने वकीलों विशेष रूप से विकास पाहवा और गौरव गुप्ता का भी आभार व्यक्त किया.

शशि थरूर के वकील विकास पाहवा ने अदालत के फ़ैसले का स्वागत किया और कहा कि यह सात साल की लंबी लड़ाई थी और आख़िरकार न्याय की जीत हुई. पाहवा ने कहा कि, "मुझे ख़ुशी है कि आख़िरकार सात साल बाद न्याय हुआ है और दिल्ली पुलिस द्वारा लगाए गए सभी आरोपों से उन्हें सम्मानजनक रूप से मुक्त कर दिया गया है."

एडवोकेट पाहवा ने यह भी कहा कि उन्होंने हमेशा शशि थरूर को सलाह दी थी कि वे कोई सार्वजनिक बयान न दें क्योंकि मामला अदालत में विचाराधीन है.

पाहवा ने कहा कि पुलिस ने जो आत्महत्या के लिए उकसाने और क्रूरता के आरोप थरूर पर लगाए थे वे बेतुके थे. उन्होंने कहा कि, "इस मामले में अपराधों के सबसे आवश्यक तत्व भी मौजूद नहीं थे. मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी रिपोर्ट सहित विभिन्न मेडिकल बोर्डों की सभी रिपोर्टों ने डॉ शशि थरूर को हत्या या आत्महत्या के आरोपों से बरी कर दिया था."

पाहवा ने यह भी कहा कि दायर आरोपपत्र बिना किसी आधार के था और सुनंदा पुष्कर के परिवार के किसी सदस्य या मित्र द्वारा उत्पीड़न या आत्महत्या के लिए उकसाने की किसी ने कोई शिकायत नहीं की थी.

प्रॉसिक्यूशन बनाम डिफ़ेन्स

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प्रॉसिक्यूशन या अभियोजन पक्ष का कहना था कि पुष्कर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण ज़हर था लेकिन उनके शरीर पर 15 ऐसी चोटें थीं जो मौत से पहले की थीं. अभियोजन पक्ष का कहना था कि ये चोटें 12 घंटे से चार दिन पुरानी थीं और हाथापाई की वजह से लगी थीं.

डिफ़ेन्स या बचाव पक्ष ने इसका खंडन करते हुए कहा था कि पुष्कर की मौत का कारण अभी तक स्थापित नहीं हुआ है.

थरूर के वकील विकास पाहवा का कहना था कि ऐसी रिपोर्ट्स हैं जो कहती हैं कि यह न तो हत्या थी और न ही आत्महत्या. उन्होंने कहा कि पुष्कर की मानसिक स्थिति जानने के लिए एक मनोवैज्ञानिक शव परीक्षण किया गया था लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि उन्होंने आत्महत्या की या यह एक हत्या थी.

अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि सुनंदा पुष्कर अपने पति और पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार के बीच ब्लैकबेरी मैसेंजर (बीबीएम) पर संदेशों के आदान-प्रदान की वजह से थरूर से नाराज़ थीं.

इसी साल अप्रैल में अभियोजन पक्ष के वकील ने अदालत को बताया कि मामले की जांच कर रही एसआईटी को उस समय की पिछली सरकार की वजह से अमेरिकी जांच एजेंसी एफ़बीआई से संपर्क करना पड़ा था क्योंकि केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) की रिपोर्ट सही नहीं थी. बचाव पक्ष ने इसका खंडन करते हुए इसे एक गैर-ज़िम्मेदाराना बयान बताया था. न्यायाधीश ने भी अभियोजन पक्ष से पूछा था कि क्या वो केवल अनुमानों पर चल सकते हैं?

कब क्या हुआ?

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सुनंदा पुष्कर, शशि थरूर के विवाह की फाइल फोटो

16 जनवरी, 2014 को सुनंदा पुष्कर और पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार के बीच ट्विटर पर शशि थरूर के साथ कथित संबंधों को लेकर विवाद हुआ. इसके अगले ही दिन 17 जनवरी, 2014 को सुनंदा पुष्कर नई दिल्ली के होटल लीला पैलेस के सुइट नंबर 345 में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाई गईं.

शुरुआती जांच में पुलिस को शक़ था कि शायद ये आत्महत्या का मामला है. दवा के ओवरडोज़ से मौत होने की बात भी उठी क्योंकि पुष्कर का इलाज चल रहा था. 19 जनवरी, 2014 को सुनंदा पुष्कर के पोस्टमॉर्टम के बाद डॉक्टरों ने कहा कि यह "अचानक, अप्राकृतिक मौत" का मामला लगता है.

साथ ही यह भी कहा गया कि सुनंदा के हाथों पर एक दर्जन से अधिक चोट के निशान, उनके गाल पर एक घर्षण का निशान, और उनकी बाईं हथेली के किनारे पर दांत से काटने के गहरे निशान थे. डॉक्टरों के यह भी कहा था कि उनके शरीर एंटी-एंग्जायटी दवा अल्प्राजोलम के नाममात्र संकेत मिले थे और ऐसा कोई संकेत नहीं था कि दवाओं के ओवरडोज़ से उनकी मौत हुई हो.

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कोई जानलेवा बीमारी नहीं

पुष्कर की मौत से कुछ दिन पहले तक उनका इलाज करने वाले केरल के डॉक्टरों ने 20 जनवरी, 2014 को कहा कि उन्हें ऐसी किसी भी जानलेवा बीमारी का पता नहीं चला था जिससे पुष्कर की मौत हो सकती थी. 23 जनवरी, 2014 को जांचकर्ताओं ने कहा कि प्रथम दृष्टया पुष्कर की मौत किसी "छिपे हुए ज़हर" से हुई. उनके शरीर में अवसाद-रोधी अल्प्राजोलम और दर्द-निवारक एक्सेड्रिन दवाओं के निशान मिले थे.

आगे की जांच के लिए विसरा के नमूनों को सीएफ़एसएल भेजा गया. साथ ही पुष्कर की मौत की जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को ट्रांसफ़र कर दी गयी. लेकिन दो दिन बाद मामला वापस दिल्ली पुलिस को ट्रांसफ़र कर दिया गया. जुलाई 2014 में पुष्कर का पोस्टमार्टम करने वाले पैनल का नेतृत्व करने वाले एम्स के डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने दावा किया कि उन पर ऑटोप्सी रिपोर्ट में हेरफ़ेर करने के लिए दबाव डाला जा रहा था.

गुप्ता ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) में एक हलफ़नामा दायर कर आरोप लगाया कि उन पर मामले को छुपाने और एक "टेलर-मेड रिपोर्ट" देने के लिए दबाव डाला गया. गुप्ता ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि पुष्कर के शरीर पर चोट के 15 निशान थे, जिनमें से अधिकांश ने मौत में योगदान नहीं दिया था.

उन्होनें एक इंजेक्शन का निशान और एक दांत से काटने के निशान का ज़िक्र किया. साथ ही यह भी कहा कि पुष्कर के पेट में अल्प्राजोलम दवा की अधिक मात्रा की मौजूदगी थी.

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फ़ोरेंसिक रिपोर्ट अनिर्णायक

अक्टूबर 2014 में दिल्ली पुलिस ने एम्स की एक नई फोरेंसिक रिपोर्ट को अनिर्णायक कहा. नवंबर 2014 में बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने संकेत दिया कि वह सुनंदा पुष्कर की रहस्यमय मौत की अदालत की निगरानी में जांच की मांग करते हुए एक जनहित याचिका दायर कर सकते हैं.

मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब जनवरी 2015 में दिल्ली के तत्कालीन पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी ने कहा कि पुष्कर ने आत्महत्या नहीं की बल्कि उनकी हत्या की गई है. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने मामले में अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज किया.

फरवरी 2015 में पुष्कर के विसरा के नमूने जांच के लिए वाशिंगटन में एफ़बीआई लैब भेजे गए. इसका मक़सद उस ज़हर की पहचान करना था जिससे पुष्कर की मौत हुई थी. उसी साल नवम्बर में एफ़बीआई ने विसरा की रिपोर्ट दिल्ली पुलिस को सौंपी. रिपोर्ट में कहा गया कि पुष्कर की मौत ज़हर की वजह से नहीं हुई.

फरवरी 2016 में दिल्ली पुलिस के विशेष जांच दल ने शशि थरूर से पूछताछ की जिसमें उन्होंने कहा कि पुष्कर की मौत दवा के ओवरडोज़ के कारण हुई. जुलाई 2017 में बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दिल्ली उच्च न्यायालय से मांग की कि इस मामले की जांच सीबीआई के नेतृत्व वाले विशेष जांच दल द्वारा अदालत की निगरानी में करवाई जाए.

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