मुज़फ़्फ़रनगर में आज किसान महापंचायत: जानिए क्या हैं योजनाएं

  • शहबाज़ अनवर
  • बीबीसी हिंदी के लिए
किसान आंदोलन

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मुज़फ़्फ़रनगर में रविवार को होने वाली महापंचायत में शामिल होने वाले किसानों को कोई परेशानी ना हो इसके लिए बड़े स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं.

किसान संगठन और प्रशासनिक अमला दोनों इस आयोजन को लेकर तैयारियों के पूरे दावे कर रहे हैं.

मुज़फ़्फ़रनगर के जीआईसी कॉलेज के विशाल मैदान में किसान महापंचायत का आयोजन होना है. इस महापंचायत में कई राज्यों से किसानों के शामिल होने का अनुमान लगाया जा रहा है.

इस बारे में भारतीय किसान यूनियन के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक कहते हैं, "देश के कोने-कोने से किसान इस महापंचायत में शिरकत करेंगे. महापंचायत में हरियाणा के अलावा पंजाब और कई अन्य राज्यों से महिला जत्थेदार भी पहुँच रही हैं.''

''हमारा मानना है कि महापंचायत में क़रीब पाँच लाख किसान पहुंचेंगे. पंचायत स्थल भर जाने की स्थिति में शहर में जगह-जगह माइक और एलईडी लगाए गए हैं जिससे किसान वहाँ से भी पंचायत स्थल को देख और सुन सकें."

हालांकि भीड़ को लेकर प्रशासन का अपना अलग अनुमान है. मुज़फ़्फ़रनगर के एसडीएम सदर दीपक कुमार ने बताया कि प्रशासन को 50 हज़ार की भीड़ पहुँचने का अनुमान है.

एक अन्य किसान नेता और बीकेयू मुरादाबाद के पूर्व मंडल अध्यक्ष दिनेश कुमार बताते हैं, "राजकीय इंटर कॉलेज के विशाल मैदान में यह महापंचायत है. ये मैदान 50 बीघा से भी अधिक क्षेत्र में फैला है. यहाँ क़रीब 70 से 80 हज़ार किसान बैठ सकते हैं. मंच भी क़रीब 60 फीट लंबा और 60 फीट चौड़ा बनाया गया है."

वहीं इस महापंचायत को बुलाने किसान नेता राकेश टिकैत ने ट्विट किया है कि ये महापंचायत ऐतिहासिक होने वाली है.

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राकेश टिकैत ग़ाज़ीपुर बॉर्डर से किसान महापंचायत में हिस्सा लेने के लिए मुज़फ़्फ़रनगर पहुंचेंगे. यह पूरा इलाक़ा उनके पिता महेंद्र सिंह टिकैत के असर वाला माना जाता है. लगभग दस महीनों के आंदोलन के बाद पहला मौक़ा होगा, जिसमें राकेश टिकैत और उनके भाई नरेश टिकैत एक साथ दिखेंगे.

इस महापंचायत में जाट किसानों के साथ मुस्लिम किसान भी नज़र आ रहे हैं. ग़ुलाम मोहम्मद जौला महेंद्र सिंह टिकैत के साथी रहे हैं. वर्तमान में ग़ुलाम मोहम्मद भारतीय किसान मज़दूर मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और क़रीब 24 गाँवों की खाप के चौधरी भी हैं.

वह कहते हैं, "मैं बाबा महेंद्र सिंह टिकैत के साथ कईं वर्षों तक रहा हूँ.2013 के दंगों के बाद से भाकियू से अलग हो गया था, तभी मैंने भारतीय किसान मज़दूर मंच बनाया था. लेकिन जनवरी में एक महापंचायत में हमारे बीच गिले-शिकवे दूर हो गए."

मुज़फ्फरनगर महापंचायत को लेकर ग़ुलाम मोहम्मद जौला ने बताया, "राकेश टिकैत पूरी तरह किसानों के साथ खड़े हैं. वह अब भाजपा को चुनौती दे रहे हैं. 2022 में सरकार को हराने की बात कह रहे हैं. इसी को लेकर ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर जमे हैं और दूसरे प्रदेशों में भी पहुँच रहे हैं. हम भी रविवार को अपने हज़ारों साथी किसानों के साथ वहां, पहुंचेंगे. हर गाँव से ट्रैक्टर पहुंचेगा. महापंचायत बिल्कुल सफल होगी."

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाटों ने पिछले चुनावों में बीजेपी का साथ दिया है, ये बात राकेश टिकैत ख़ुद भी कई बार दोहरा चुके हैं कि उन्होंने भी बीजेपी को वोट दिया था. इस महापंचायत को यूपी विधानसभा चुनाव के नज़रिए से भी अहम माना जा रहा है.

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किसान आंदोलन सिंघु पर हुआ तेज़, राकेश टिकैत क्या बोले?

ये रहेगी रूट की व्यवस्था

अलग-अलग राज्यों से आने वाले किसानों को देखते हुए पार्किंग और रूट को लेकर भी तैयारी की गई है. प्रशासन और किसान नेताओं के बीच बातचीत के बाद रूट मैप तैयार किया गया है.

भारतीय किसान यूनियन के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने मीडिया से कहा, "मेरठ की ओर से आने वाले वाहनों की पार्किंग नुमाइश कैंप में होगी. सहारनपुर, रुड़की रोड की पार्किंग माल गोदाम द्वितीय, बिजनौर, मुरादाबाद, जानसठ रोड की पार्किंग माल गोदाम नंबर एक में होगी जबकि शामली, पानीपत, मेरठ, करनाल रोड की पार्किंग डीएवी और इस्लामिया स्कूल में रहेगी."

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महापंचायत शांतिपूर्वक कराना प्रशासन की प्राथमिकता

महापंचायत में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह चौकन्ना है. एडीजी लॉ एंड ऑर्डर से लेकर आईजी डीआईजी तक ने महापंचायत स्थल का निरीक्षण किया है.

ये निरीक्षण पिछले लगभग तीन दिन से जारी है.

महापंचायत में क्या-क्या सुरक्षा इंतज़ाम रहेंगे, इसे लेकर डीआईजी डॉक्टर प्रीतिंदर सिंह कहते हैं, "हम और एसएसपी सभा स्थल की व्यवस्था देखने के लिए फ्लीट कर रहे हैं. एलआईयू की टीम और डॉग स्क्वायड भी साथ है. टेंट लगाने वालों से उनकी बैरिकेडिंग के बारे में पता किया गया है."

"जिन रूट्स से लोगों को आना है वहां स्थान विशेष पर पार्किंग स्थल बनाए गए हैं, उनकी विज़िट की जा रही है. रेंज, ज़ोन और डीजीपी हेड क्वार्टर से भी फोर्स अलॉट की गई है. इसके अलावा पैरामिलिट्री फोर्स और पीएसी भी तैनात की गई है."

भारतीय किसान यूनियन युवा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह कहते हैं, "पंचायत स्थल के अलावा शहर में अलग-अलग स्थानों पर दो से ढाई हज़ार किसान वॉलंटियर लगाए गए हैं. मंच, माइक, पंडाल, पार्किंग, भंडारे की व्यवस्था देखने के लिए अलग-अलग किसानों को ज़िम्मेदारी दी गई है."

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इन्हीं तैयारियों को ध्यान में रखते हुए संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से किसानों के भोजन करने की शहर में कई जगह व्यवस्था की गई है, इसके लिए अलग-अलग स्थानों पर एक हज़ार से अधिक भंडारे लगाए जाने का दावा किया जा रहा है.

इतनी बड़ी संख्या में किसानों के खाने पीने की व्यवस्था के सवाल पर दिगंबर कहते हैं, "देखिए शहर भर में अलग-अलग स्थानों पर क़रीब एक हजार भंडारों की व्यवस्था की गई है. ये भंडारे गाँवों से आ रहे हैं. इसके अलावा पाँच सौ मोबाइल भंडारे हैं जबकि पाँच सौ से सात सौ ऐसे और भी भंडारे हैं."

किसान नेताओं का अनुमान है कि शनिवार की रात तक बीस हज़ार से अधिक किसान मुज़फ्फरनगर पहुँच जाएंगे जबकि महापंचायत के दिन ये संख्या हज़ारों में पहुंचने की संभावना जताई.

किसानों को प्रशासन की ओर से भी सहयोग किया जा रहा है. दिगंबर सिंह भी प्रशासन की ओर से इस तरफ़ ध्यान रखने की बात की तस्दीक करते हैं.

इस बारे में मुज़फ्फरनगर के एडीएम प्रशासन अमित कुमार ने कहा है, "किसानों की ओर से एक हज़ार वालंटियर लगाए गए हैं. ये लोग भीड़ और ट्रैफ़िक को भी मैनेज करेंगे. हमने मोबाइल टॉयलेट, पानी के टैंकर, मेडिकल कैंप, भंडारों में पीने के पानी की व्यवस्था की है. किसान पीने के पानी के लिए ख़ुद भी वैकल्पिक पाइपलाइन आदि डाल व्यवस्था में लगे हैं."

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किसान आंदोलन: टिकरी बॉर्डर पर प्रशासन ने बिछाई कीलों और सरियों की चादर

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किसानों के लिए खुले मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारों के दरवाज़े

किसान महापंचायत में भारी भीड़ जुटने के अनुमान को देखते हुए भाकियू ने किसानों के ठहरने के लिए शहरभर के तमाम बैंक्वेट हॉल, होटल आदि में किसानों के ठहरने की व्यवस्था की है.

इसके अलावा मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारों तक में दूर-दराज़ से आए किसानों को ठहरवाने की व्यवस्था की गई है.

किसान नेता दिगंबर सिंह कहते हैं, "महापंचायत में कई राज्यों के किसान पहुंचेंगे. उनके लिए शहर में होटलों और कईं बैंक्वेट हॉल के अलावा मंदिरों, मस्जिदों और गुरुद्वारों तक में रुकने की व्यवस्था की गई है. उनके दरवाज़े भी किसानों के लिए खुले हैं. रात्रि विश्राम के लिए वहां उचित व्यवस्था करा दी गई है."

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पंजाब से आए एक अन्य किसान महेंद्र सलूजा जब मुज़फ्फरनगर पहुंचे तो यहां की व्यवस्था देखकर काफी ख़ुश हुए.

उन्होंने कहा, "जब हमें मालूम पड़ा कि यहां मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारों तक में व्यवस्था की गई है तो दिल ख़ुश हो गया. मालूम पड़ रहा है कि सभी लोग किसान विरोधी नीतियों के ख़िलाफ हैं."

किसान महापंचायत में सोनू चौधरी पानी आदि की व्यवस्था देख रहे हैं. यह युवा किसान नेता उत्तर प्रदेश में किसानों को हरियाणा और पंजाब की तरह ही सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली की मांग करते हैं.

सोनू कहते हैं, "उत्तर प्रदेश में बिजली बिल का मुद्दा भी काफी बड़ा है. वह किसानों को यहां बिजली के मामले में कोई राहत नहीं है.गन्ने का भुगतान हो या न हो लेकिन उन्हें बिजली बिल अदा ही करना पड़ता है. सिंचाई के लिए किसानों को मुफ्त बिजली मिलनी चाहिए."

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किसान आंदोलन के बीच जज़्बातों की डोर से बंधे किसान परिवार की कहानी

रैली का उद्देश्य सरकार देख ले, उसके विरोध में कितने लोग

भारतीय किसान यूनियन के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने मीडिया से कहा, "हमारा मंच अराजनीतिक है. रैली का उद्देश्य यही है कि सरकार देख ले कि कितने लोग उसके विरोध में है."

"हमारे पास लोकतंत्र में सरकार पर दबाव बनाने के लिए क्या है, या तो धरना दे सकते हैं या फिर भीड़ दिखा सकते हैं. सरकार को दिखाना चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश में चुनाव है, हमारा फ़ैसला कर लो नहीं तो नुक़सान होगा."

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किसान आंदोलन में पहुंच रहे युवाओं का दर्द

पंजाब से आए किसान जरनैल सिंह अपने कईं किसान साथियों के साथ महापंचायत में शिरकत के लिए पहुंचे हैं.

जरनैल सिंह कहते हैं, "शनिवार को कई लोग पंजाब से यूपी के मुज़फ्फरनगर पहुंचे हैं. इतनी बड़ी महापंचायत में हम अपनी ताक़त सरकार को दिखाना चाहते हैं. लंबे समय से किसान अपनी मांग सरकार से रख रहे हैं लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है."

महापंचायत में शामिल होने पहुंचे भारतीय किसान यूनियन युवा के हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष रवि आज़ाद ने कहा, "बीजेपी की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. कृषि बिलों की वापसी, एमएसपी का क़ानून की मांगों तक लड़ाई जारी है. भाजपा को 50 सीटों से ऊपर नहीं जाने देंगे. रही बात मुस्लिम और जाटों के बीच सदभाव की तो ये सदभाव क़ायम है. अब जाति-धर्म में नहीं बटेंगे. अब केवल देशभक्तों और देश को बेचने वालों के बीच लड़ाई है."

ग़ौरतलब है कि तीन कृषि क़ानून के विरोध में दिल्ली की सीमा पर सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन दसवें महीने में प्रवेश कर चुका है.

इन दस महीनों में किसान नेताओं और सरकार के बीच कई राउंड की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब तक इसका कोई नतीजा नहीं निकला है.

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