अमित शाह बोले, लोकतंत्र में सबसे बड़ा योगदान बीट कॉन्स्टेबल का है- प्रेस रिव्यू

अमित शाह

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि लोकतंत्र का मतलब केवल चुनाव नहीं होता है बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी का संरक्षण लोकतंत्र है जिसे पुलिस क़ानून एवं व्यवस्था बरकरार रखकर सुनिश्चित करती है.

उन्होंने कहा, "लोकतंत्र में सबसे बड़ा योगदान बीट कांस्टेबल का है जो नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है. कोरोनाकाल में पुलिस बलों को उनकी सेवाओं के लिए नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में उन्हें जिस प्रकार से सम्मानित किया गया उससे हर भारतीय को गर्व व आनंद की अनुभूति हुई."

ब्यूरो ऑफ़ पुलिस रिसर्च एंड डेवेलपमेंट (बीपीआरडी) की 51वीं स्थापना दिवस के मौके पर उन्होंने कहा, "कई बार मैं लोकतंत्र की बहस देखता हूं. संसद, विधानसभा, न्यायालय, चुनाव आयोग, सीएजी, विजिलेंस कमिश्नर, इनकी बहुत चर्चा होती है कि इन लोगों ने लोकतंत्र को सफल बनाया है. इसलिए नहीं कि मैं गृह मंत्री हूं बल्कि मैं बचपन से ये सोचता हूं कि लोकतंत्र को सफल बनाने में सबसे बड़ा योगदान बीट के कॉन्स्टेबल का है जो नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करता है. वरना लोकतंत्र सफल नहीं हो सकता है."

"मैंने कई बार कहा है, मैं आज फिर से कहना चाहता हूं कि पूरे सरकारी अमले में सबसे कठिन काम अगर किसी सरकारी कर्मचारी का है तो वो पुलिस का है. मैंने कई बार दीपावाली की रात को बाहर निकलते हुए देखा है कि कॉन्स्टेबल ट्रैफिक की व्यवस्था देखते हैं. मेरे मन में छोटा सा सवाल आता है कि इनके लिए दीपावली नहीं है क्या?"

"कोई बहन राखी बांधने के लिए जाती है और अपने भाई को राखी बांधकर सुरक्षित वापस आती है और वहां पर किसी कॉन्स्टेबल को व्यवस्था करते हुए देखते हैं तो बहन के मन ये सवाल क्यों नहीं आता कि इसकी बहन राखी नहीं बांधना चाहती है क्या? होली हम सब लोगों के लिए त्योहार है लेकिन पुलिस के लिए होली कानून एवं व्यवस्था संभालने का विषय है. चाहे जन्माष्टमी हो, ईद हो या मोहर्रम हो, हर जगह इतनी कठिन जिम्मेदारी शायद ही किसी सरकारी कर्मचारी पर आती हो. न काम के घंटे तय होते हैं. न काम में सुनिश्चितता होती है. मैंने देखा है कि इनके शरीर पर भी बहुत असर पड़ता है. लेकिन इसे बहुत कम स्वीकारा गया है."

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार में छपी रिपोर्ट के अनुसार गृह मंत्री ने कहा, "लोकतंत्र महज चुनाव नहीं होते हैं. लोकतंत्र में सबसे महत्वपूर्ण होता है व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी का संरक्षण. अगर क़ानून और व्यवस्था को ठीक से लागू नहीं किया गया तो लोकतंत्र सफल नहीं हो सकता है."

उन्होंने कहा कि वो पुलिस ही है जो ये सुरक्षा मुहैया कराती है.

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हक़्कानी नेटवर्क के अनस हक़्क़ानी तालिबान द्वारा ज़ब्त किए गए हथियारों का जायजा लेते हुए

तालिबान के साथ बातचीत आश्वस्त करने वाली थी: भारत

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दोहा में तालिबान के साथ भारत सरकार की बातचीत के एलान के चार दिनों बाद विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने शुक्रवार को वॉशिंगटन में कहा कि तालिबान का रुख़ अभी तक 'भरोसा पैदा करने वाला' और 'उचित' रहा है.

'द हिंदू' अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ विदेश सचिव ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि काबुल की नई हुकूमत को लेकर सरकार एहतियात बरत रही है.

विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला का ये बयान ऐसे वक़्त में आया है, जब सरकार गठन को लेकर तालिबान की कोशिशें जारी हैं. ऐसी रिपोर्टे हैं कि तालिबान के अलग-अलग धड़ों के बीच मतभेद हैं और इस वजह से काबुल में सरकार गठन को लेकर देरी हो रही है.

विदेश सचिव ने संवाददाताओं से कहा, "मुझे लगता है कि तालिबान ने अपनी तरफ़ से भरोसा पैदा करने वाले संकेत दिए हैं. उनके साथ हमारा संपर्क सीमित है और हम ये नहीं कह सकते कि हमारी कोई ठोस बातचीत हो रही है. लेकिन अभी तक जो भी बातचीत हुई है, ऐसा लगता है कि तालिबान जिस तरह से चीज़ों को हैंडल कर रहा है, वो वाजिब है."

विदेश सचिव के बयान से ये संकेत भी मिले कि तालिबान के साथ एक से ज़्यादा बार संपर्क हुआ है.

भारत सरकार के बयान के अनुसार, तालिबान के दोहा स्थित दफ़्तर के प्रमुख मोहम्मद शेर अब्बास स्टेनकज़ई और क़तर में भारत के राजदूत दीपक मित्तल की मंगलवार को भारतीय दूतावास में मुलाकात हुई. ये मीटिंग क़तर के आग्रह के बाद हुई थी.

अधिकारियों का कहना है कि तालिबान अफ़ग़ानिस्तान में दिलचस्पी रखने वाले देशों से संपर्क करना चाहता है और भारत के साथ बातचीत की उसकी पहल इसी मुहिम का हिस्सा है.

अधिकारियों ने 'द हिंदू' अख़बार को बताया कि अफ़ग़ानिस्तान में सरकार गठन को लेकर चल रही गतिविधियों पर भारत क़रीबी नज़र रखे हुए है. भारत को आशंका है कि काबुल में सरकार गठन को लेकर हो रही देरी की वजह हक़्क़ानी नेटवर्क अपने लिए किसी बड़ी भूमिका की मांग कर रहा है. हक़्क़ानी नेटवर्क ने कई बार भारतीय हितों को निशाना बनाया है.

द हिन्दू से ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के सीनियर फेलो कबीर तनेजा ने कहा, ''अगर अफ़ग़ानिस्तान की नई सरकार में हक़्क़ानी को कोई बड़ी ज़िम्मेदारी मिलती है तो यह भारत के लिए झटका होगा. पाकिस्तान नियंत्रित और भारत से दुश्मनी रखने वाले हक़्क़ानी को सरकार में कोई अहम भूमिका मिलती है तो भारत की अफ़ग़ानिस्तान में मज़बूत मौजूदगी मुश्किल होगी.

इस बीच काबुल में पाकिस्तान के ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख लेफ़्टिनेंट जनरल फ़ैज़ हामीद शनिवार को काबुल पहुँचे हैं. कहा जा रहा है कि उन्हें तालिबान ने बुलाया है.

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काकिनाडा पोर्ट की फ़ाइल फ़ोटो

काकिनाडा बंदरगाह पर 50 दिनों से फंसा चीनी जहाज

भारत के काकिनाडा बंदरगाह पर चीन का एक व्यापारिक जहाज पिछले 50 दिनों से फंसा हुआ है.

दक्षिण भारतीय अख़बार डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय एजेंसी प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी इंश्योरेंस (पीआईआई) चीनी जहाज 'एमटी कियान ताई-1' के मुद्दे को सुलझाने के लिए कोशिश कर रही है.

अख़बार का कहना है कि ये चीनी जहाज काकिनाडा एंकोरेज पोर्ट पर पिछले 50 दिनों से जहाज के कप्तान वांग ज़ेयान की वजह से फंसा हुआ है. वे एक चीनी नागरिक हैं और वे जहाज के चालक दल के भारतीय सदस्यों को शिप पर आने की इजाजत नहीं दे रहे हैं.

इस विवाद की शुरुआत जहाज के स्वामित्व का चीनी कंपनी 'सीकॉन शिप्स मैनेजमेंट' से सिंगापुर की 'ओका शिप मैनेजमेंट' कंपनी के हाथों में जाने के बाद शुरू हुई.

डेक्कन क्रॉनिकल के अनुसार, ओका शिप कंपनी जहाज के चालक दल को भारतीय स्टाफ़ से बदलना चाहती है लेकिन चीनी कैप्टन इसके लिए तैयार नहीं है.

शनिवार को इस सिलसिले में दोनों कंपनियों की सिंगापुर में मीटिंग भी हुई है और इसके बाद मामले को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए पीआईआई को लाया गया है. पीआईआई और सीकॉन शिप्स मैनेजमेंट के अधिकारी जहाज के कैप्टन से इस सिलसिले में बात कर रहे हैं.

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कोरोना महामारी की तीसरी लहर से बच्चों को ख़तरा

कोरोना महामारी की संभावित तीसरी लहर में बच्चों में संक्रमण के मामले दूसरी लहर की चरम वाली स्थिति से सात गुना तक बढ़ सकते हैं.

कोलकाता से छपने वाले टेलीग्राफ़ अख़बार की इस रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल ऐसा होने की आशंका कर्नाटक के लिए जताई गई है लेकिन ये दूसरे राज्यों में भी हो सकता है.

बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ पब्लिक हेल्थ ने भविष्य में महामारी के स्वरूप को लेकर इन संभावनाओं के पैदा होने का अनुमान लगाया है.

ये आशंकाएं जताई गई हैं कि जिस तरह से लोग सावधानी बरतने में कोताही कर रहे हैं, इम्युनिटी कमज़ोर पड़ रही है और कोरोना वायरस के नए वैरिएंट की संभावना महामारी की तीसरी लहर की वजह बन सकती है.

बेंगलुरु के इन दोनों संस्थानों की रिसर्च रिपोर्ट में कर्नाटक को महामारी की तीसरी लहर से बचने के लिए सलाह भी दी गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके लिए टीकाकरण की मौजूदा दर को दोगुना किए जाने और कोविड प्रोटोकॉल के नियमों को कड़ाई से लागू किए जाने की ज़रूरत है. ऐसा करने पर कर्नाटक महामारी के प्रभाव को कम कर सकता है या उसे टाल भी सकता है.

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चीफ़ जस्टिस एनवी रमन्ना और हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त की गईं महिला जज

हाई कोर्ट जजों की नियुक्ति को लेकर केंद्र और सुप्रीम कोर्ट के बीच विवाद

देश के पांच उच्च न्यायालयों में 12 जजों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने ये स्पष्ट किया है कि वो अपनी सिफारिश पर कायम रहेगा. इन 12 जजों में तीन न्यायिक सेवा के अधिकारी भी हैं.

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने इन 12 नामों की नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी. अख़बार का कहना है कि सरकार और न्यायपालिका के बीच ये विवाद तूल पकड़ सकता है.

चीफ़ जस्टिस एनवी रमन्ना की अगुवाई वाले कॉलेजियम ने पिछले हफ़्ते देश के 12 उच्च न्यायालयों के लिए 68 उम्मीदवारों के नाम की सिफारिश की थी. कॉलेजियम की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर शुक्रवार को प्रकाशित की गई है. निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, केंद्र की आपत्ति के बाद भी कॉलेजियम अगर अपनी सिफारिश पर कायम रहता है तो सरकार उसे मानने के लिए बाध्य है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के ये कहने के बावजूद कि इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए समय काफी अहम है, केंद्र सरकार चाहे तो इन नामों पर अनिश्चित काल के लिए बैठ सकती है. इलाहाबाद हाई कोर्ट के लिए कॉलेजियम ने कहा है कि वो तीन ज्युडिशियल ऑफ़िसर ओम प्रकाश त्रिपाठी, उमेश चंद्र शर्मा और सैयद वाइज़ मियां के नामों की अपनी सिफारिश पर कायम है.

इन तीनों के नाम की सिफारिश चार फरवरी को की गई थी. इनके अलावा 8 अन्य ज्युडिशियल ऑफ़िसर के नाम की भी सिफारिश की गई थी. केंद्र ने इस लिस्ट से सात नामों पर मार्च में मुहर लगा दी थी. ओम प्रकाश त्रिपाठी, उमेश चंद्र शर्मा और सैयद वाइज़ मियां इस समय क्रमश: वाराणसी, इटावा और अमरोहा के सेशन जज हैं.

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