योगी- मोदी- अखिलेश: 'अब्बाजान' के बाद अब कानून व्यवस्था पर वार- पलटवार

अखिलेश यादव

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समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'अब्बाजान' वाली टिप्पणी पर पलटवार किया.

अखिलेश यादव ने दावा किया सरकार गंवाने की आशंका में मुख्यमंत्री की भाषा बदल गई है.

अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और उनकी सरकार पर कई हमले किए. उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "भारतीय जनता पार्टी की सरकार का जाना तय है. इसीलिए सरकार के मुखिया की भाषा बदल गई है."

उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को ही अलीगढ़ की एक रैली में क़ानून व्यवस्था के सवाल पर पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार को घेरा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे पर योगी आदित्यनाथ सरकार की तारीफ की. लेकिन अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर भी मौजूदा सरकार को कठघरे में खड़ा किया.

अखिलेश यादव ने 'अब्बाजान' से जुड़ी टिप्पणी को लेकर कहा, "उनकी (मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की) भाषा इसीलिए बदल गई है क्योंकि उत्तर प्रदेश की जनता अब बदलाव चाहती है. खुशहाली चाहती है, जिस तरह से काम समाजवादी सरकार में हो रहे थे, उन्हें दोबारा चाहती है."

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कहां से शुरू हुआ विवाद

'अब्बाजान' को लेकर विवाद और बहस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रविवार को कुशीनगर में हुई एक रैली के बाद शुरु हुई. उन्होंने साल 2017 से पहले की सरकारों पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया.

योगी आदित्यनाथ ने कहा, "क्या ये राशन 2017 के पहले भी मिलता था?...क्योंकि तब तो अब्बाजान कहने वाले राशन हजम कर जाते थे. तब कुशीनगर का राशन नेपाल पहुंच जाता था, बांग्लादेश पहुंच जाता था."

योगी आदित्यानाथ की अगुवाई में साल 2017 में प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी. उनके पहले अखिलेश यादव प्रदेश के मुख्यमंत्री थे. योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच पहले भी कई मुद्दों पर ज़ुबानी वार-पलटवार हो चुका है.

योगी आदित्याथ की रविवार की रैली के बाद ही 'अब्बाजान' शब्द सोशल मीडिया पर ट्रेंड होने लगा था. इसे लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी और एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी समेत कई नेता योगी आदित्यनाथ को सोशल मीडिया पर घेर चुके हैं.

विज्ञापन से जुड़ा विवाद

अखिलेश यादव ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में योगी आदित्यनाथ के आरोपों का जवाब दिया. उन्होंने मुख्यमंत्री के विकास के दावों पर सवाल उठाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के रविवार को ही एक अख़बार में छपे उस विज्ञापन का ज़िक्र किया, जिसे लेकर विवाद हो गया था. इस विज्ञापन में तस्वीर योगी आदित्यनाथ की थी लेकिन फ्लाईओवर और इमारत पश्चिम बंगाल की थी. विज्ञापन में इस्तेमाल की गई एक तस्वीर देश के बाहर की थी.

अखिलेश यादव ने कहा, "अभी तक ये सरकार नाम बदल रही थी. रंग बदल रही थी. समाजवादियों के काम पर अपना नाम लगा रही थी. अब तो दूसरे प्रदेशों के और दुनिया के दूसरे हिस्सों से भी फोटो चुराकर अपना काम बताने में सरकार आगे बढ़ रही है."

अखिलेश यादव ने कहा, "मैं बधाई देना चाहता हूं सोशल मीडिया के तमाम नौजवानों को जिन्होंने कम से कम भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री को दिखा दिया कि विकास क्या होता है?"

क़ानून-व्यवस्था से जुड़े दावे

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उधर, योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को क़ानून व्यवस्था के मुद्दे पर मोर्चा खोला.

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुई एक रैली में उन्होंने कहा, "पहले उत्तर प्रदेश की पहचान अपराध और गड्ढों से होती थी.पहले हमारी बहनें और बेटियां सुरक्षित नहीं थीं.यहां तक कि भैंस और बैल भी सुरक्षित नहीं थे. आज ऐसा नहीं है."

समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान तत्कालीन मंत्री आज़म ख़ान की भैंस चोरी होने को लेकर हुआ विवाद प्रदेश की राजनीति में छाया रहा था. मुख्यमंत्री के बयान को उसी से जोड़कर देखा जा रहा है.

राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर एक विश्वविद्यालय का शिलान्यास करने आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अलीगढ़ की रैली में योगी आदित्यनाथ सरकार की तारीफ की और पूर्व की सरकारों पर सवाल उठाया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "एक दौर था जब शासन प्रशासन गुंडों और माफियाओं की मनमानी से चलता था लेकिन अब वसूली करने वाले माफिया राज चलाने वाले सलाखों के पीछे हैं."

मोदी ने आगे कहा, " राजकाज को भ्रष्टाचारियों के हवाले कर दिया गया था. आज योगी जी की सरकार पूरी ईमानदारी से यूपी के विकास में जुटी हुई है."

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मायावती ने बीजेपी को वोट देने की बात क्यों कही?

अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री के दावों पर सवाल उठाने में देर नहीं की.

मंगलवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी के बयान का ज़िक्र करते हुए सवाल हुआ तो अखिलेश यादव ने कहा, "मैंने सुना नहीं उनका भाषण लेकिन अगर प्रधानमंत्री ने ऐसा कहा है तो उन्हें डायल 100 का डेटा मंगाना चाहिए. उन्हें देखना चाहिए कि उत्तर प्रदेश में अपराध कौन बढ़ा रहा है और कम से कम मुख्यमंत्री जी को निर्देश देकर जाएं कि टॉप टेन माफिया उत्तर प्रदेश के कौन हैं?"

उत्तर प्रदेश के साल 2017 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान 'भयमुक्त शासन' बीजेपी का एक प्रमुख वादा था. बीजेपी को उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 403 में से 312 से ज़्यादा सीटें हासिल हुईं थीं. 2017 तक प्रदेश में सरकार चला रही समाजवादी पार्टी सिर्फ 47 सीटें हासिल कर सकी थी.

लेकिन अब अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और दूसरे विपक्षी दल क़ानून व्यवस्था के सवाल पर योगी आदित्यनाथ की बीजेपी सरकार को घेरते रहे हैं.

अखिलेश यादव ने आगे कहा, " ये तो सबको पता है कि उत्तर प्रदेश के वो मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने अपने मुकदमे वापस लिए हैं. एनसीआरबी का डेटा क्या कहता है कि लूट, डकैती, महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध, हत्याएं, सबसे ज़्यादा कहां हैं? मानवाधिकार आयोग से सबसे ज़्यादा नोटिस किसको मिले हैं? मैंने पहले भी कहा था कि झूठ बोलने का सबसे अच्छा प्रशिक्षण केंद्र भारतीय जनता पार्टी चलाती है."

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