केरल के फ़िल्म निर्माता अली अकबर ने इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म क्यों अपनाया?

  • इमरान क़ुरैशी
  • बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
अली अकबर

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केरल के फ़िल्मकार अली अकबर ने इस्लाम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने का फ़ैसला किया है. उनका नया नाम राम सिम्हन होगा. अली अकबर का कहना है कि उन्होंने जनरल रावत की हेलीकॉप्टर हादसे में मौत पर कुछ लोगों की प्रतिक्रिया से आहत होकर हिंदू धर्म अपनाया हैं.

जनरल रावत की मौत की ख़बर पर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने हंसने की इमोजी बनाई थी, अली अकबर इसी से दुखी थे.

अली अकबर ने बीबीसी हिंदी से कहा, "हमारे आर्मी चीफ़ की मौत के बाद बहुत से लोगों ने हंसने की इमोजी लगाई. ये बहुत ख़राब बात थी. आप सोशल मीडिया पर ऐसे लोगों के नाम देख सकते हैं. वो सभी मुसलमान हैं. हम सिर्फ़ अपने धर्म को सबसे पहले रखकर कैसे जी सकते हैं. मेरे नज़रिए में धर्म तीसरे नंबर पर आता है. पहले नंबर पर मेरा देश है दूसरे नंबर पर भी मेरा देश ही है और फिर तीसरे नंबर पर धर्म है."

अली अकबर का मानना है कि जनरल रावत क मौत पर इस तरह की प्रतिक्रिया इसलिए आई क्योंकि उन्होंने कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान और चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की.

हताश नज़र आ रहे अली अकबर (59) ने कहा, "किसी भी मुसलमान नेता ने ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ मुंह नहीं खोला और इस तरह के पोस्ट ना करने के लिए नहीं कहा. केरल में इस्लामिक आंदोलन अब इस्लामिक नहीं रह गया है. वो अब केरल को एक इस्लामी राज्य बनाना चाहते हैं. कुछ नेता तो ये बात सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं."

अकबर ऐसे पहले फ़िल्म निर्माताओं में से हैं जिन्होंने सबसे पहले फ़िल्म '1921--- फ्रॉम रिवर टू रिवर' बनाने की घोषणा की थी. वो अपनी फ़िल्म के ज़रिए ये दर्शाना चाहते हैं कि उस दौर में मालाबार क्षेत्र में ब्रितानी शासन के ख़िलाफ़ हुआ विद्रोह असल में एक सांप्रदायिक दंगा था जिसमें मुसलमानों ने हिंदुओं का नरसंहार किया था.

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कई घटनाओं का हवाला

"वो (मुसलमान नेता) पिछले एक साल से मेरे पीछे पड़े हैं. वो नहीं चाहते कि समाज को ये सच पता चले. मैंने अब ये फ़िल्म पूरी कर ली है और मैं इसे अगले महीने रिलीज़ करने जा रहा हूं."

अली अकबर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी करते हुए कहा है कि वो अब उस कपड़े को उतार रहे हैं जो उन्हें जन्म के समय पहना दिया गया था.

अली अकबर ने कहा, "आज से मैं भारतीय हूं. ये मेरा जवाब है उन लोगों को जिन्होंने भारत के ख़िलाफ़ हंसते हुए हज़ारों इमोजी पोस्ट किए."

हालांकि इस वीडियो पर प्रतिक्रियाएं आने के बाद उन्होंने इसे हटा दिया है.

अकबर ने ऐसी कई घटनाओं का ज़िक्र किया है जिनकी वजह से उन्हें दुख हुआ और उन्होंने इस्लाम को छोड़ने का फ़ैसला किया.

उन्होंने कहा, "पाला में एक गांव है जिसमें अधिकतर ईसाई रहते हैं. यहां एक बड़ा चर्च भी है. यहां के कट्टरवादी मुसलमान गांव का नाम इरितिपेटा से बदलकर अरुवीधूरा करना चाहते हैं. वो नाम बदलना चाहते हैं क्योंकि ये एक ईसाई इलाक़ा है."

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फ़िल्म निर्माता आरोप लगाते हैं कि केरल में इस्लामीकरण का अभियान 1970 के दशक में शुरू हुआ और इसमें खाड़ी देशों से आ रहा पैसा भी लग रहा है.

वो कहते हैं, "लेकिन सरकार इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है. जब मैं एक दशक पहले कुवैत में रह रहा था तब मैंने इसके बारे में शिकायत की थी. तब भी मैंने इन लोगों के 'लव जेहाद' और 'हलाल जेहाद' के बारे में चेताया था."

अकबर कहते हैं, "मैंने चेतावनी दी थी कि ऐसा समय आएगा जब दूसरे धर्मों के लोग मुसलमानों के साथ बैठना और बात करना छोड़ देंगे. अब ऐसा माहौल बन गया है जब मुसलमानों को शक की निगाह से देखा जाने लगा है."

वो कहते हैं, "अगर कोई हमारे धर्म में गलत कर रहा है तो शीर्ष नेताओं को ज़िम्मेदार ठहराना चाहिए. उन्हें इसके ख़िलाफ़ अभियान चलाना चाहिए. यहां नेतृत्व की तरफ से कोई जवाबदेही ही नहीं है."

अकबर और उनकी ईसाई पत्नी लूसीअम्मा अगले सप्ताह आर्य समाज के ज़रिए नए धर्म में पंजीकरण की तैयारी कर रहे हैं. उनका इरादा अगले बीस दिनों में हिंदू धर्म को अपनाने का है.

अकबर कहते हैं कि उनके दो बच्चे 30 साल और 25 साल के हैं और वो मुसलमान हैं. अकबर कहते हैं कि उनके बच्चे बालिग हैं और वो अपना धर्म स्वयं चुन सकते हैं.

हिंदू धर्म ही क्यों, ईसाई धर्म क्यों नहीं?

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अली अकबर कहते हैं, "क्योंकि हिंदुत्व एक धर्म नहीं है बल्कि एक संस्कृति है. यहां नर्क में जाने का कोई डर नहीं है. आप एक इंसान की तरह रह सकते हो क्योंकि भगवान आपके ही भीतर है. ईश्वर को अपने भीतर देखना उसे देखना का सर्वश्रेष्ठ नज़रिया है."

उन्होंने अपना नाम राम सिम्हन रखने का निर्णय लिया है क्योंकि उनका दावा है कि वो केरल में इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने वाले पहले व्यक्ति थे.

अली अकबर कहते हैं, "राम सिम्हन केरल में हिंदू धर्म अपनाने वाले पहले मुसलमान थे. अगस्त 1947 में भारत के आज़ाद होने से कुछ दिन पहले ही उनकी हत्या कर दी गई थी."

अकबर इससे पहले भी इस्लामवादियों के ख़िलाफ़ अपनी टिप्पणियों के चलते विवादों में रहे हैं. 2018 में उन पर हमला किया गया था. तब उन्होंने टिप्पणी की थी कि मुसलमान संगीतकार एआर रहमान के इस्लाम धर्म अपनाने का उदाहरण देकर हिंदुओं को धर्म परिवर्तन करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

इसके तीन साल पहले उन्होंने आरोप लगाया था कि मदरसे में उनके उस्ताद ने उनका शोषण किया था.

जब उनसे पूछा गया कि आपके आलोचक कहते हैं कि आप आरएसएस की विचारधारा पर चल रहे हैं तो वो कहते हैं, "मैं क्यों उस विचारधारा पर नहीं चल सकता. आरएसएस भारत की सांस्कृतिक शाखा है. आरएसएस में एक मुस्लिम मंच भी है. ये एक राष्ट्रवादी संगठन हैं."

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