पुरुलिया में धमाका, माओवादी प्रवक्ता गिरफ़्तार

  • 24 जून 2009

पश्चिम बंगाल में जहाँ पुलिस ने माओवादियों के प्रवक्ता को गिरफ़्तार किया है, वहीं माओवादी विद्रोहियों ने पुरुलिया में शराब की एक फ़ैक्ट्री में धमाका किया है.

Image caption माओवादियों के ख़िलाफ़ सुरक्षाबलों के अभियान के बीच आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है

राज्य की पुलिस ने मंगलवार रात को माओवादी प्रवक्ता गौर चक्रबर्ती को कोलकाता में हिरासत में लिया था जब वे एक बंगाली टीवी चैनल के शो में भाग लेकर टीवी स्टूडियो से बाहर निकल रहे थे. पूछताछ के बाद उन्हें औपचारिक तौर पर बुधवार को गिरफ़्तार कर लिया गया.

पुलिस ने तीन जानी-मानी हस्तियों - अपर्ना सेन, साँवली मित्रा और कौशिक सेन के ख़िलाफ़ भी धारा 144 का उल्लंघन के मामले दर्ज किए हैं.

पश्चिम बंगाल के लालगढ़ क्षेत्र में हाल के दिनों में माओवादियों और जनजातियों के लोगों की सत्ताधारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के ख़िलाफ़ हिंसा के बाद स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है.

सीपीएम के दफ़्तरों को जलाए जाने और हिंसा की अन्य घटनाएँ होने के बाद राज्य सरकार ने स्थानीय पुलिस की मदद के लिए अर्धसैनिक बलों को बुलाया था. इसके बाद सीपीआई (माओवादी) संगठन पर भारत सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया था.

ताज़ा घटनाक्रम

बीबीसी संवाददाता सुबीर भौमिक के अनुसार लालगढ़ क्षेत्र में ताज़ा घटनाक्रम में बुधवार को माओवादी विद्रोहियों ने पुरुलिया ज़िले के कुरली गाँव में शराब बनाने की एक फ़ैक्ट्री में धमाका किया. ये जगह लालगढ़ से ज़्यादा दूर नहीं है.

विद्रोहियों ने शराब की कई पेटियों को नष्ट कर दिया और साथ ही मालिक को शराब न बनाने की धमकी भी दी.

पुलिस के अनुसार सशस्त्र माओवादियों ने इसके बाद वाम दलों के एक नेता को मारने की कोशिश की लेकिन वे बच निकले.

लालगढ़ में मौजूद स्थानीय पत्रकार अमिताभ भट्टासाली ने बीबीसी को बताया कि वहाँ लोग डरे हुए हैं और अपने घर छोड़कर भाग रहे हैं.

Image caption केंद्र सरकार का कहना है कि सुरक्षाबलों के अभियान में अपेक्षा से अधिक समय भी लग सकता है

उनका कहना है कि लगभग 30 हज़ार लोग लालगढ़ से पलायन कर राहत शिविरों में पहुँच गए हैं जहाँ सरकारी एजेंसियाँ और ग़ैर-सरकारी संस्थाएँ उनकी मदद कर रही हैं.

अमिताभ भट्टासाली के अनुसार लोग माओवादियों और पुलिस कार्रवाई दोनों से ही भयभीत हैं.

उनके अनुसार राज्य पुलिस और अर्धसैनिक बल लालगढ़ थाने में तो पहुँचे थे लेकिन उस इलाक़े में माओवादियों का नियंत्रण कभी रहा ही नहीं है और जिस 40 वर्ग किलोमीटर के इलाक़े में माओवादियों का गढ़ वहाँ अर्धसैनिक बल अपने अभियान के सातवें दिन भी नहीं पहुँच पाए हैं.

रविवार को सुरक्षा बलों ने एक दूसरे रास्ते से माओवादियों के गढ़ में दाख़िल होने की कोशिश की थी लेकिन वे नाकाम रहे थे. भीषण गोलीबारी और बारूदी सुरंग के फटने से 11 लोग - आठ पुलिसकर्मी और तीन माओवादी घायल हुए थे.

बातचीत की पेशकश

मंगलवार को माओवादियों ने सरकार से बातचीत की पशकश की थी.

बीबीसी संवाददाता सुबीर भौमिक ने कोलकाता से बताया है कि ऐसी संभावना बहुत कम है कि माओवादियों की हाल की बातचीत की पेशकश को सरकार स्वीकार करेगी.

सुबीर भौमिक का कहना है, "सरकार को एहसास हो रहा है कि माओवादी परेशानी में हैं इसीलिए संघर्षविराम की बात कर रहे हैं. राज्य के मुख्य सचिव अशोक मोहन चक्रबर्ती ने स्पष्ट कहा है कि बातचीत का सवाल ही पैदा नहीं होता क्योंकि माओवादियों के ख़िलाफ़ ऑपरेशन जारी है और इसे आसपास के इलाक़ो में भी फैलाया जाएगा."

उधर राज्य में सत्ताधारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता नीलोत्पल बासु ने बीबीसी संवाददाता इक़बाल अहमद के साथ बातचीत में राज्य सरकार की गौर चक्रबर्ती के मामले में कार्रवाई को सही ठहराया है.

उनका कहना था, "माओवादी खुले तौर पर मीडिया के ज़रिए अपनी बात रख रहे हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री पर पिछले साल नवंबर हुए जानलेवा हमले में हाथ होने की बात स्वीकार की है. यदि कोई माओवादियों से जुड़ा हुआ है तो उससे पूछताछ करने का अधिकार तो पुलिस को है."

नीलोत्पल बासु का कहना था कि माओवादी संगठन कुछ ऐसे कामों से जुड़ा हुआ है जिनमें क़ानून का उल्लंघन होता है और यहाँ तक लोगों की जान भी चली जाती है और ऐसे में पुलिस को कार्रवाई तो करनी ही होगी.