मीरा कुमार बनीं पहली महिला स्पीकर

  • 25 जून 2009

भारतीय लोकसभा में तीन जून 2009 को इतिहास रचा गया जब मीरा कुमार लोकसभा की पहली महिला स्पीकर चुन ली गईं.

Image caption मीरा कुमार पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम की बेटी हैं और दलित समुदाय से हैं

मीरा कुमार दलित समुदाय से हैं और वे पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम की बेटी हैं. स्पीकर के पद पर निर्वाचन के लिए लाए गए प्रस्ताव को सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने ध्वनि मत से पारित कर दिया. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता लाल कृष्ण आडवाणी मीरा कुमार को स्पीकर की कुर्सी तक छोड़ कर आए. उन्हें कुछ दिन पहले ही मनमोहन सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था लेकिन स्पीकर के पद की पेशकश के बाद उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

मीरा कुमार का चयन सर्वसम्मति से हुआ है. उनके लिए दाख़िल किए गए नामांकन पर्चों पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से लेकर लालकृष्ण आडवाणी, शरद पवार समेत कई नेताओं ने हस्ताक्षर किए.

स्पीकर के पद के लिए नामांकन भरने की समयसीमा समाप्त होने तक केवल मीरा कुमार ने ही पर्चे दाखिल किए थे.

मीरा कुमार का करियर

  • 1970 के दशक में भारतीय विदेश सेवा में प्रवेश
  • आईएफ़एस में विभिन्न पदों पर कई देशों में काम
  • 1980 के दशक में राजनीति में प्रवेश
  • वर्ष 1985 में पहली बार बनी सांसद
  • वर्ष 2009 में पाँचवीं बार बनीं सांसद

'ऐतिहासिक घड़ी'

मीरा कुमार ने 70 के दशक में भारतीय विदेश सेवा में नौकरी की और कई देशों में नियुक्त रहीं. वे भारत-मॉरिशस संयुक्त आयोग की सदस्य भी रह चुकी हैं और ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग में भी काम कर चुकी हैं. राजनीति में उनका प्रवेश 80 के दशक में हुआ. वर्ष 1985 में वे पहली बार बिजनौर से सांसद चुनी गईं. वर्ष 1990 में वे कांग्रेस पार्टी की कार्यकारिणी की सदस्य बनीं और अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की महासचिव भी चुनी गईं. वे दूसरी बार सांसद बनीं वर्ष 1996 में और संसद में तीसरी पारी उन्होंने 1998 में शुरु की. वर्ष 2004 में बिहार के सासाराम से लोकसभा के लिए उनका चयन हुआ. वर्ष 2004 की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में उन्हें सामाजिक न्याय मंत्री बनाया गया था. इस बार वे पाँचवीं बार संसद के लिए चुनी गई हैं. मीरा कुमार ने स्पीकर पद के लिए चुने जाने को ऐतिहासिक घड़ी बताया है. टीकाकारों का कहना है कि मीरा कुमार को लोकसभा का स्पीकर बनाने से कांग्रेस को कुछ फ़ायदा हो सकता है क्योंकि पार्टी ख़ुद को महिलाओं और दलितों के हितैशी के रूप में पेश कर सकती है.

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