नई शिक्षा नीति: भाजपा ने किया विरोध

मुरली मनोहर जोशी
Image caption भाजपा ने यूपीए सरकार की नई शिक्षा नीति का विरोध किया है

भारतीय जनता पार्टी ने देश में एक बोर्ड और एक पाठ्यक्रम लागू करने की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की नीति का विरोध किया है. भाजपा का कहना है कि सरकार को इस बारे में फिर से विचार करना चाहिए. भाजपा नेता और पूर्व मानव संसाधन मंत्री डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी ने मांग की है कि इसके लिए सभी पार्टियों के नेताओं और शिक्षाविदों की बैठक बुलानी चाहिए. डॉक्टर जोशी ने आरोप लगाया कि समवर्ती सूची में शामिल होने के बावजूद यूपीए सरकार राज्यों से विचार किए बिना शिक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण संशोधन कर रही है जो पार्टी को स्वीकार्य नहीं है.

उनका कहना था कि सौ दिन हड़बड़ी में सरकार गड़बड़ी की ओर बढ़ रही है. डॉक्टर जोशी ने कहा कि सौ दिन में सरकार यदि कुछ खास नहीं कर पाती है तो उसे माफ़ किया जा सकता है लेकिन सौ दिन की हड़बड़ी में शिक्षा प्रणाली को चौपट नहीं करने दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि यूजीसी, एआईसीटीई और भारतीय चिकित्सा परिषद को समाप्त कर उसके स्थान पर नियामक इकाई का गठन उचित नहीं है. उनका कहना था कि शिक्षा में निजी और विदेशी दखलंदाज़ी बढ़ाने के लिए इस प्रकार के क़दम उठाए जा रहे हैं. उल्लेखनीय है कि इसके पहले केंद्रीय मानव संसाधन विकासमंत्री कपिल सिब्बल ने आगामी सौ दिनों के दौरान भारत की शिक्षा व्यवस्था में कई अहम सुधार लागू करने की घोषणा की थी, इसमें दसवीं के बोर्ड की परीक्षा समाप्त करने का प्रस्ताव भी शामिल है.

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