भारत के कई शहरों में समलैंगिक परेड

समलैंगिक परेड
Image caption भारत में समलैंगिकता गैरक़ानूनी है लेकिन दुनिया के कई देशों में इसे मान्यता प्राप्त है

भारत के प्रमुख शहरों में समलैंगिकों की परेड के आयोजन के बीच केंद्र सरकार विवादास्पद समलैंगिक संबंधों को क़ानूनी मान्यता देने पर विचार कर रही है.

देश के मेट्रो शहरों यानी मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई में समलैंगिकों ने शाम के समय बड़ा जूलूस निकाला और धारा 377 को ख़त्म करने की मांग की. समलैंगिकों की परेड का लगातार दूसरे वर्ष देश में आयोजन हुआ है. दिल्ली में हुई परेड बाराखंभा से निकल कर जंतर मंतर तक पहुंची और प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि समलैंगिक संबंधों को क़ानूनी मान्यता दी जाए. इससे पहले शनिवार को क़ानून मंत्री वीरप्पा मोयली ने कहा था कि समलैंगिकों संबंधों को मान्यता देने के संबंध में क़ानून मंत्रालय, गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय बातचीत करने वाले हैं. उल्लेखनीय है कि भारत में पुरुषों और स्त्रियों के बीच समलैंगिक संबंध गैर क़ानूनी और अनैतिक माने जाते हैं और धारा 377 के तहत ऐसे संबंध बनाए जाने पर कड़ी सजा का भी प्रावधान है. भारत में समलैंगिक अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाएं लगातार इसका विरोध करती रही हैं और इसको हटाने के लिए सरकार से आग्रह करती रही हैं. ऐसी ही एक संस्था नाज़ फाउंडेशन ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है और याचिका पर बहस के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि वो समलैंगिक संबंधों पर लगे प्रतिबंध का समर्थन करती है. नाज़ फाउंडेशन जैसी संस्थाओं का कहना है कि इस तरह के क़ानूनों के कारण एचआईवी को रोकने में भी दिक्कतें होती हैं क्योंकि समलैंगिक संबंधों के गैर क़ानूनी होने के कारण समलैंगिक पुरुष अपने सेक्स जीवन के बारे में खुलकर सामने नहीं आते हैं. एड्स के काम करने वाली सरकारी संगठन नाको का भी यही रुख रहा है लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने पूर्व में स्वयंसेवी संस्थानों की यह बात मानने से इंकार किया है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और क़ानून मंत्रालय विचार करने वाले हैं. इस संबंध में प्रधानमंत्री ने गृह और स्वास्थ्य मंत्रालय से अपने मतभेद दूर करने को कहा था.