अखिलेश का राजतिलक

अखिलेश यादव
Image caption मुलायम सिंह ने अखिलेश को अपना उत्तराधिकार सौंप दिया है

बात पिछले विधान सभा चुनाव की है. मुलायम सिंह यादव एक चुनावी जनसभा के बाद मंच के पीछे अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे. तभी एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि आप अपना राजनीतिक उत्तराधिकार किसे देंगे भाई शिवपाल या बेटे अखिलेश को? पुराने पहलवान मुलायम सिंह ने अपनी दोनों भुजाओं पर निगाह डाली और कहा, "अभी मैं बूढ़ा नही हुआ." बात आई गई हो गई. इस लोक सभा चुनाव में भी मुलायम सिंह ने पूरे दमख़म से प्रचार किया. कई सीटों और वोट शेयर में नुकसान के बावजूद उनकी समाजवादी पार्टी नंबर एक बन कर उभरी. और फिर अचानक ख़बर आई कि मुलायम सिंह यादव ने अपने सांसद बेटे अखिलेश यादव को समाजवादी पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई का अध्यक्ष बना दिया. शिवपाल विधायक हैं और इसलिए वह विधान सभा में पार्टी के नेता बना दिए गए. समाजवादी पार्टी का जनाधार मुख्यतः उत्तर प्रदेश तक सीमित है इसलिए उत्तर प्रदेश में पार्टी का अध्यक्ष बनाते ही यह साफ़ हो गया कि मुलायम ने अखिलेश को अपना उत्तराधिकार सौंप दिया है और अगले विधान सभा चुनाव में समाजवादी पार्टी उन्हीं के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी. एक दिन तो यह होना ही था क्योंकि अब समाजवादियों के लिए भी राजनीति में वंशवाद कोई मुद्दा नही है. मगर बात अखिलेश को उत्तराधिकार सौंपने की नही बल्कि उसके टाइमिंग या समय की है. लोक सभा चुनाव में समाजवादी पार्टी 23 सीटें पाकर नंबर एक पर ज़रूर है, लेकिन कांग्रेस पार्टी बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी को पीछे धकेलकर 21 सीटें लेकर दूसरे नंबर पर आ गई है. कांग्रेस की इस अप्रत्याशित सफलता से समाजवादी पार्टी में खलबली है. ख़तरा यह है वर्ष 1989 से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सेकुलर पार्टी की जिस पोजीशन पर समाजवादी पार्टी क़ाबिज़ थी उस पर कहीं कांग्रेस फिर से वापस न आ जाए. माना जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी को यह अप्रत्याशित सफलता राहुल गांधी के नेतृत्व, उनकी दूरगामी रणनीति और मेहनत से मिली है. राहुल गांधी ने यह कह कर समाजवादी पार्टी की चिंता और बढ़ा दी कि वह अब अपना ध्यान उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करने में लगाएँगे और जरूरत हुई तो अपने को उत्तर प्रदेश के भावी मुख्यमंत्री के तौर पर भी पेश करेंगे.

युवा के हाथों में नेतृत्व

राजनीतिक प्रेक्षक मानते हैं कि दरअसल अखिलेश यादव के हाथ में पार्टी की कमान आना भारतीय राजनीति में चल रही नई बयार का असर है. अभी तक मार्केटिंग कंपनियाँ माल बेचने के लिए नयी पीढ़ी पर ध्यान केंद्रित कर रही थीं अब राजनीतिक दल भी देश में युवा वर्ग की बढ़ती तादाद को देखते हुए पार्टी में नए ख़ून को ज्यादा महत्व दे रहे हैं. मुलायम सिंह अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं और वह अपनी पार्टी को इस बात के लिए तैयार कर रहे हैं कि वह आगे चलकर राहुल गांधी की नई राजनीति का मुकाबला कर सके. वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान भारतीय राजनीति में एक बड़ा परिवर्तन होता देख रहे हैं. उनका कहना है, ''यह निश्चित संकेत आ रहा है कि अब आपको कमान देनी है यंग आदमी के हाथ में. भारत में इस समय जो आबादी है उसमें 35 साल से कम लोगों की तादाद ज्यादा है, और हर पार्टी कह रही है कि हम जवानो को मौका देंगे.''

विरासत में राजनीति

अखिलेश विरासत में नेतृत्व मिलने की बात टाल देते हैं. उनका कहना है कि इस लोक सभा में 125 से अधिक ऐसे लोग चुनकर आए हैं जो राजनीतिक परिवारों से जुड़े हुए हैं. वे कहते हैं, "विरासत में अगर हमें मिला है तो वह लाठी और संघर्ष और सड़कों पर हम लोगों को निकलना पड़ेगा. "

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी में इस पीढ़ी परिवर्तन के बाद भारतीय जनता पार्टी में भी इस बात का दबाव बढ़ रहा है कि नेतृत्व युवा वर्ग को सौंपा जाए. कुछ समय पहले बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने अपने बेटे पंकज सिंह को उत्तर प्रदेश बीजेपी युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया था लेकिन चूँकि बीजेपी नेतृत्व पर एक परिवार का आधिपत्य नही है इसलिए बगावत हो गई और पंकज सिंह को पीछे हटना पड़ा. हाल ही में बीजेपी विधायकों की बैठक में वरुण गांधी को नेतृत्व सौंपने की मांग उठी है. लोक दल नेता अजित सिंह ने भी जयंत चौधरी को पार्टी महासचिव बनाकर ज़िम्मेदारी सौंपी है.

जहाँ तक बात बहुजन समाज पार्टी की ही तो देश की आजादी के बाद ही पैदा हुईं. सुश्री मायावती अभी 53 साल की हैं. उन्हें अभी बहुत लंबी पारी खेलनी है. उत्तर प्रदेश को देश कि राजनीति की प्रयोगशाला माना जाता है. अब राहुल बनाम अखिलेश के बहाने नई युवा राजनीति शुरू हुई है. मगर दोनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उस युवा वर्ग को राजनीति की मुख्यधारा में लाना है जिसकी दिलचस्पी राजनीति में है ही नहीं. राजनीति से विमुख इस युवा वर्ग को आकर्षित करने के लिए केवल परिवार की विरासत नहीं, बल्कि लोकतंत्र और समता पर आधारित एक नई सोच और एक ऐसा बड़ा सपना चाहिए जिसमें हर युवा को अपने भविष्य के लिए आशा की किरण दिखाई दे.

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