लिब्रहान आयोग ने रिपोर्ट सौंपी

बाबरी मस्जिद विध्वंस
Image caption छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को कट्टरंपथी हिंदुओं ने गिरा दिया था

दिसंबर 1992 में उत्तर प्रदेश के अयोध्या में कट्टरपंथी हिंदुओं के एक प्रदर्शन के दौरान बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद इस मामले की जाँच के लिए गठित लिब्रहान आयोग ने अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री मनमोहिन सिंह को सौंप दी है.

ग़ौरतलब है कि इस आयोग की रिपोर्ट 17 वर्षों की जाँच और अनेक बार आयोग का कार्यकाल बढ़ाए जाने के बाद आई है.

छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को गिराया गया था और उसके बाद गठित इस आयोग की अवधि 48 बार बढ़ाई गई.

सबसे अधिक अवधि

इस तरह ये भारत के इतिहास में सबसे अधिक अवधि वाला जाँच आयोग साबित हुआ. मंगलवार को जब रिटायर्ड जस्टिस एमएस लिब्रहान ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंपी तो उस समय गृह मंत्री पी चिदंबरम भी वहाँ मौजूद थे. इस रिपोर्ट में क्या कुछ कहा गया है, इस बारे में जानकारी फ़िलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है. मंगलवार को रिपोर्ट सौंपने के बाद जब सेवानिवृत्त जस्टिस एमएस लिब्रहान से मीडिया ने सवाल किए तो उन्होंने जाँच में पाई गई जानकारी के बारे में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया. आयोग को इस बात की जाँच करनी थी कि किन परिस्थितियों में बाबरी मस्जिद गिराई गई. लिब्रहान आयोग को 16 मार्च 1993 तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी लेकिन उसके बाद लगातार इसकी अवधि बढ़ाई जाती रही.