अयोध्या विवाद से जुड़ी 23 फा़इलें ग़ायब

  • 8 जुलाई 2009
अयोध्या (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद को लेकर पिछले 60 साल से विवाद चल रहा है

उत्तर प्रदेश सचिवालय से अयोध्या विवाद से संबंधित 23 फाइलें ग़ायब हैं. ये बात प्रदेश के मुख्य सचिव अतुल गुप्ता ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच को सौंपे एक हलफ़नामे में स्वीकार की है.

अदालत ने संकेत दिए हैं कि वह इस मामले की सीबीआई से जाँच कराने का आदेश दे सकती है.

ग़ौरतलब है कि हिंदू और मुसलमानों के बीच अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद को लेकर पिछले 60 साल से विवाद चल रहा है.

बाबरी मस्जिद को छह दिसंबर, 1992 को कट्टरपंथी हिंदुओं की एक भीड़ ने गिरा दिया था.

इसकी जाँच के लिए सरकार ने लिब्राहन आयोग का गठन किया था. इस आयोग ने पिछले हफ़्ते अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी है.

अदालत ने मुख्य सचिव अतुल गुप्ता को सात अहम दस्तावेज़ों के बारे में जानकारी देने के लिए विशेष रूप से तलब किया था.

राज्य प्रशासन का कहना है कि ये दस्तावेज़ सरकारी रिकॉर्ड से 2002 से ही ग़ायब हैं.

छह जून, 2009 की गृह सचिव की रिपोर्ट में कहा गया है कि अयोध्या विवाद से संबंधित 23 फाइलें गृह मंत्रालय के विशेष सेल से ग़ायब हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि ये फाइलें सुभाष भान साध नामक एक अधिकारी के पास थीं जिनका निधन हो चुका है.

इस मामले की सुनवाई कर रही तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने इसे गंभीरता से लिया है.

अहम दस्तावेज़

इन दस्तावेज़ों में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की ओर से राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत को भेजा गया टेलीग्राम भी शामिल है.

अन्य छह दस्तावेज़ों में राज्य सरकार और ज़िला प्रशासन के बीच हुआ पत्राचार शामिल है. ये दस्तावेज़ कुछ किताबों में प्रकाशित भी हुए हैं.

इन पत्रों से पता चलता है कि तत्कालीन ज़िलाधिकारी केके नैयर ने विवादित परिसर से मूर्तियाँ हटाने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि इससे ख़ून-ख़राबा होगा.

अदालत इस बात पर ज़ोर दे रही है कि राज्य सरकार इन दस्तावेज़ों को खोजकर पेश करे जिससे 60 साल पुराने इस विवाद की शुरुआत का पता चल सके.

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